जल संरक्षण : उपेक्षा के शिकार तालाबों का खत्म हो रहा अस्तित्व

जल संरक्षण : उपेक्षा के शिकार तालाबों का खत्म हो रहा अस्तित्व

जल संरक्षण में तालाबों के महत्व से इन्कार नहीं किया जा सकता। तालाबों में जमा बारिश के पानी की हर एक बूंद धरती के अंदर पहुंचती है लेकिन पुराने तालाबों की उपेक्षा हो रही है। यह जल संचय के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

JagranSat, 17 Apr 2021 10:27 PM (IST)

सरायअकिल : जल संरक्षण में तालाबों के महत्व से इन्कार नहीं किया जा सकता। तालाबों में जमा बारिश के पानी की हर एक बूंद धरती के अंदर पहुंचती है, लेकिन पुराने तालाबों की उपेक्षा हो रही है। यह जल संचय के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

सरायअकिल कस्बे के प्राचीन तालाबों की हालत दयनीय है। उचित रख-रखाव न होने के कारण यह तालाब अपना अस्तित्व बचाने की जंग लड़ रहे हैं। कस्बे के अंदर तीन प्रमुख तालाब अपने विशालकाय रूप और कभी न सूखने वाले तालाबों में शुमार थे, लेकिन वर्तमान में इनका अस्तित्व खत्म होता नजर आ रहा है। कस्बे के बीचो बीच मोटई कहार का तालाब जो दस्तावेजों में साढ़े तीन बीघे दर्ज है, लेकिन वर्तमान में यह तालाब दो बीघे के करीब ही रह गया है। वहीं मौलवीगंज स्थित रामणा के पास छतउवा तालाब है। यह कागजों में चार बीघे का है, लेकिन मौके पर दो से ढाई बीघा होने में भी संकट है। इसी प्रकार बुद्धपुरी मोहल्ले का सबसे बड़ा रमसगरा तालाब अपनी गहराई और विस्तृत फैलाव के लिए प्रसिद्ध था। नगर पालिका के अभिलेखों में यह पांच बीघे के करीब दर्ज है। इस तालाब के चारों ओर लगातार अतिक्रमण होता जा रहा है। जिससे तालाब के अस्तित्व पर खतरा बना है। नगर पंचायत इसके संरक्षण का ध्यान नहीं रखती। ऐसे में यह तालाब कूड़े से हर साल पटता जा रहा।

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बोले कस्बावासी..

नगर पंचायत के जिम्मेदार इन तालाबों की देखरेख करते तो कम से कम इन तालाब के आसपास बसे लोगों को पानी के संकट से निजात मिल सकती थी। यह तालाब आज भी लोगों की अधिकांश समस्या दूर कर सकते हैं।

- लुस्सू पांडेय हर जगह तालाबों के अस्तित्व को बचाने का प्रयास हो रहा है, नगर पंचायत सरायअकिल में भी इस प्रकार का अभियान चलना चाहिए। इससे तालाबों का भविष्य बेहतर होगा।

- राकेश कुमार तालाब कूड़े से पटते जा रहे हैं। यह किसी के लिए बेहतर नहीं है। जल स्त्रोतों का इस प्रकार नष्ट होना अच्छे संकेत नहीं है। इस प्रकार की लापरवाही पर अंकुश लगना चाहिए।

- रमेश कुमार तालाब हमारी संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। आज भी शुभ अवसर पर तालाबों के पूजन की प्रथा है। हम इनकी पूजा तो करते हैं। पर सुरक्षा नहीं करते। इस आदत में सुधार की जरूरत है।

- धर्म प्रकाश

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