सेवानिवृत्ति की उम्र पार फिर भी वर्दी का रौब, पीआरडी में कूटरचित प्रमाणपत्रों के आधार पर दर्जनों जवान कर रहे ड्यूटी

जनपद में युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग अपने कारनामों के चलते हमेशा सुर्खियों में रहा है । फिर चाहे ड्यूटी लगाने का मामला हो या फिर कूटरचित अभिलेखों के आधार पर दोबारा तैनाती पाने का। हर बार शिकायत हुई लेकिन मामला टांय-टांय फिस हो गया।

JagranSun, 28 Nov 2021 08:39 PM (IST)
सेवानिवृत्ति की उम्र पार फिर भी वर्दी का रौब, पीआरडी में कूटरचित प्रमाणपत्रों के आधार पर दर्जनों जवान कर रहे ड्यूटी

कौशांबी। जनपद में युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग अपने कारनामों के चलते हमेशा सुर्खियों में रहा है । फिर चाहे ड्यूटी लगाने का मामला हो या फिर कूटरचित अभिलेखों के आधार पर दोबारा तैनाती पाने का। हर बार शिकायत हुई लेकिन मामला टांय-टांय फिस हो गया। अधिकारियों की लीपापोती का परिणाम यह रहा कि सेवा निवृत्ति की उम्र पार होने के बाद सरसवां ब्लाक कमांडर ड्यूटी पर लगे पीआरडी जवानों पर वर्दी का रौब दिखा रहे हैं।

कौशांबी जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग में फर्जी और कूटरचित प्रमाण पत्रों के दम पर ड्यूटी कर रहे हैं। जबकि पूरी ईमानदारी से प्रशिक्षण व शिक्षा लेने वाले जवान बिना ड्यूटी के भटक रहे हैं। विभाग में वर्ष 2003 से लेकर वर्ष 2021 तक फर्जी जवानों की बाढ़ सी आ गयी है। यहां करीब 67 से अधिक जवान शैक्षिक और प्रशिक्षण प्रमाण पत्र में हेराफेरी करके विभाग में डटे हुए हैं। जिसके चलते युवाओं को मौका नहीं मिल पा रहा है। ताजा मामला सरसवां विकास खंड में तैनात कार्यवाहक ब्लाक कमांडर हीरालाल का है। इन्होंने वर्ष 1993 में 22 दिवसीय प्रशिक्षण माघ मेला कैंप प्रयागराज (इलाहाबाद) में प्राप्त किया था। जबकि विभागीय अभिलेखों में इनको 2003 में भर्ती दिखाया गया है। प्रशिक्षण के समय दिए गए शैक्षिक प्रमाण पत्र में इनका जन्मदिन 5 अक्टूबर सन् 1955 दर्ज है। इस हिसाब से देखा जाय तो हीरालाल अक्टूबर 2021 में ही 66 वर्ष के हो चुके हैं लेकिन अधिकारियों की मिली भगत से अभिलेखों में हेराफेरी करके आज भी सरसवां ब्लाक कमांडर बनकर पीआरडी जवानों पर रौब गांठते हुए फिर रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर कई पीआरडी जवानों ने इन पर हर महीने वसूली और पैसा लेकर भर्ती कराने का भी आरोप लगाते हैं। कुल मिला कर देखा जाय तो विभाग में भ्रष्टाचार की जड़े गहरी हैं। यदि उच्चाधिकारी मामले की तह तक जाएं तो पूर्व से लेकर अब तक कार्यरत रहे कई अधिकारियों की गर्दन फंसना तय है। इस संबंध में प्रभारी जिला युवा कल्याण अधिकारी छंगूराम सरोज का कहना है कि हीरालाल के शैक्षिक दस्तावेजों को देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। यदि हमारे अभिलेखों में इनकी उम्र 66 साल से अधिक होगी तो शासनादेश के अनुसार इनके खिलाफ कदम उठाया जाएगा।

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