राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में बंदरबाट, प्रधान-पंचायत मित्र समेत 10 पर मुकदमा

राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में बंदरबाट, प्रधान-पंचायत मित्र समेत 10 पर मुकदमा

राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर धनराशि के बंदर बांट के मामले में सोमवार को जिलाधिकारी अमित कुमार सिंह के निर्देश पर प्रधान व पंचायत मित्र समेत 10 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गयौ। अब पुलिस मामले की विवेचना कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।

Publish Date:Mon, 30 Nov 2020 10:13 PM (IST) Author: Jagran

कौशांबी : राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर धनराशि के बंदर बांट के मामले में सोमवार को जिलाधिकारी अमित कुमार सिंह के निर्देश पर प्रधान व पंचायत मित्र समेत 10 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गयौ। अब पुलिस मामले की विवेचना कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।

कौशांबी ब्लाक क्षेत्र के कायमपुर व हकीमपुर गांव में राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के नाम पर जालसाजों ने फर्जी तरीके से अभिलेख तैयार किए। इसके बाद उनके नाम पर 30-30 हजार रुपये की धनराशि निकाल ली। इतना ही नहीं, जिन लोगों के नाम पर यह धनराशि निकाली गई थी। उनको मात्र दो-दो हजार रुपये ही मिले। दैनिक जागरण ने मामले की पड़ताल करते हुए इसे समाचारीय अभियान का रूप दिया। एक सप्ताह तक खबर प्रकाशित होने पर जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को जांच का निर्देश दिया। उन्होंने टीम गठित की तो समाज कल्याण विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारी व कर्मचारी भयभीत हैं। मुख्य विकास अधिकारी शशीकांत ने बताया कि कायमपुर गांव में प्रधान ने पूरी साजिश रची थी। प्रधान समेत नौ के खिलाफ समाज कल्याण अधिकारी सुधीर कुमार की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ है। वहीं, हकीमपुर गांव में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी व लेखाकार अशोक सिंह ने जांच की। जांच के दौरान उन्होंने पंचायत मित्र जय सिंह पुत्र भुंवर रैदास को मामले का दोषी पाया। मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि पंचायत मित्र ने गांव के 15 लाभार्थियों के नाम पर धनराशि निकाली थी। उनको मात्र दो-दो हजार रुपये देता था। शेष धनराशि उसने हड़प ली थी। बताया कि जांच टीम को 13 लाभार्थियों के पति जीवित मिले। इसके बाद पंचायत मित्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। बताया कि पंचायत मित्र की सेवा समाप्त करने को लेकर भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

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कहीं चहेतों को बचाने की कोशिश तो नहीं

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समाज कल्याण विभाग से संचालित पारिवारिक लाभ योजना का लाभ दिए जाने के लिए बड़े स्तर पर पड़ताल होती है। मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर हलफनामे तक लगते हैं। मृत्यु प्रमाण पत्र संबंधित ब्लाक के एडीओ पंचायत के निर्देश पर ग्राम पंचायत सचिव जारी करता है। वहां हलफनामा अधिवक्ता तैयार करते हैं। इतनी बड़ी संख्या में एक गांव के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होते हैं और सभी के नाम पर पारिवारिक लाभ योजना की स्वीकृत मिलती है। इतना ही नहीं, ब्लाक से लेकर जिले तक के अधिकारियों के सामने से पत्रावली गुजरती है। किसी भी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया और फर्जी लोगों के खाते में धनराशि पहुंच गई। अधिकारियों की जांच में केवल प्रधान व गांव के पंचायत मित्र का नाम सामने आया, जो सब से छोटी इकाई हैं। सोमवार को हुई कार्रवाई में पूरा दोष इनके ऊपर लगाया गया। ऐसा लगता है कि आनन-फानन में हुई यह कार्रवाई अन्य बड़े अधिकारियों व कर्मचारियों को बचाने की साजिश है।

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