नाम हयात उल्ला और चारो वेदों का ज्ञान पाकर बन गये चतु्र्वेदी

कौशांबी [प्रमोद यादव]। देववाणी संस्कृत यानि हमारी संस्कृति की वाहक। वसुधैव कुटुंबकम की बात है इसमें, साथ ही सब धर्मों का सार भी। इस भाषा के प्रचार प्रसार में सक्रिय पांच वक्त के नमाजी 75 साल के हयात उल्ला 'चतुर्वेदी का कृतित्व यही बताता है कि भाषा को मजहब की संकीर्णता से नहीं बांधा जा सकता। लोग संस्कृत को आसानी से सीख और समझ सकें,इसलिए उन्होंने संस्कृत परिचारिका सहित कई किताबें भी लिखी हैं। गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल कहे जा सकते हैं हयात उल्ला। कहते हैं कि देववाणी में नया ङ्क्षहदुस्तान बनाने का माद्दा है, बशर्ते नीति निर्धारक इसे समझें।

कौशांबी जिले के छीता हर्रायपुर निवासी हयात उल्ला के नाम में 'चतुर्वेदी लिखा होना चौंकाता है। दरअसल चारों वेदों का ज्ञान होने के कारण सालों पहले उन्हें 'चतुर्वेदी की उपाधि दी गई थी। वर्ष 2003 में वह एमआर शेरवानी इंटर कॉलेज इलाहाबाद से रिटायर हुए। वहां उन्होंने अर्से तक हिंदी और संस्कृत पढ़ाई। रिटायर होने के बाद दूसरे स्कूलों में निश्शुल्क संस्कृत पढ़ा रहे हैं। संस्कृत की मौजूदा दशा से वह चिंतित हैं। 

हिंदी  और अंग्रेजी पर भी उनकी वैसी ही पकड़ है जैसी संस्कृत पर। कहते हैं कि संस्कृत ही ऐसी भाषा है जो मजहबी दीवार तोड़कर नए हिंदुस्तान को गढ़ सकती है। अंग्रेजों ने साजिश के तहत भारत से संस्कृत को कमजोर कर अंग्रेजी को बढ़ावा दिया। यह साजिश हमारे नेता भी नहीं समझ पाए और आज भी अंग्रेजों की नीति पर चल रहे हैं।

हो रही जिहाद की गलत व्याख्या

जागरण से विशेष मुलाकात में उन्होंने कहा कि कुछ तथाकथित लोग जिहाद की गलत व्याख्या कर रहे हैं। जिहाद मतलब है धर्मयुद्ध। महाभारत भी धर्मयुद्ध था। वह धर्म की रक्षा के लिए हुआ था। धर्म रक्षा का मतलब इंसानियत की रक्षा से है न कि किसी धर्म विशेष की रक्षा।

शाकाहार है सेहत का राज

हयात उल्ला अपनी सेहत का राज शाकाहार को बताते हैं। कहते हैं कि वेद और कुरआन एक ही बात कहते हैं। इसमें कोई भेद नहीं है। धर्म के ठेकेदारों ने भ्रमित किया है। 

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