पर्यटन उद्योग से दौड़ सकता है कौशांबी, दर्जनों की संख्या में धर्मिक व पौराणिक स्थलों तक नहीं पहुंचा विकास

पर्यटन सिर्फ हमारे जीवन में खुशियों के पल को वापस लाने में ही मदद नहीं करता बल्कि यह किसी भी स्थान के सामाजिक सांस्कृतिक राजनैतिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आज के समय में जहां हर देश की पहली जरूरत अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। वहीं आज पर्यटन के कारण कई देशों की अर्थव्यवस्था शीर्ष पर है। विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर यदि जनपद कौशांबी के पर्यटन स्थलों पर नजर डालें तो जैन व बौद्ध तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध कौशांबी भी पर्यटन के लिहाज से देश दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचता है। जरूरत है कि यहां पर पर्यटन को उद्योग के रूप में विकसित किया जाए। छोटी-छोटी कमियों को दूर कर यहां पर्यटन को एक नया रूप दिया जा सकता है। पर्यटन की असीम संभावनाओं वाला जिले में केवल थोड़ी जागरूकता व ध्यान देने की जरूरत है। यह स्वत देश दुनिया में अपनी पहचान बना लेगा।

JagranSun, 26 Sep 2021 11:52 PM (IST)
पर्यटन उद्योग से दौड़ सकता है कौशांबी, दर्जनों की संख्या में धर्मिक व पौराणिक स्थलों तक नहीं पहुंचा विकास

कौशांबी। पर्यटन सिर्फ हमारे जीवन में खुशियों के पल को वापस लाने में ही मदद नहीं करता, बल्कि यह किसी भी स्थान के सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आज के समय में जहां हर देश की पहली जरूरत अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। वहीं आज पर्यटन के कारण कई देशों की अर्थव्यवस्था शीर्ष पर है। विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर यदि जनपद कौशांबी के पर्यटन स्थलों पर नजर डालें तो जैन व बौद्ध तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध कौशांबी भी पर्यटन के लिहाज से देश दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचता है। जरूरत है कि यहां पर पर्यटन को उद्योग के रूप में विकसित किया जाए। छोटी-छोटी कमियों को दूर कर यहां पर्यटन को एक नया रूप दिया जा सकता है। पर्यटन की असीम संभावनाओं वाला जिले में केवल थोड़ी जागरूकता व ध्यान देने की जरूरत है। यह स्वत: देश दुनिया में अपनी पहचान बना लेगा।

कौशांबी गंगा व यमुना नदी के मध्य बसा है। यहां जहां एक ओर यमुना किनारे बौद्ध व जैन तीर्थ स्थल है तो दूसरी ओर गंगा किनारे 51वीं शक्ति पीठ में शामिल मां शीतला का दरबार सजा है। मुस्लिम धर्म से जुड़े तमाम दरगाह, हिदू संत महात्माओं के ओज से तपोस्थल बन चुकी कुटी व आश्रम आज भी लोगों को खुश और शांति देते हैं। जैन धर्म की बात करें तो कौशांबी में जैन धर्म के छठे तीर्थंकर पद्मप्रभु का जन्म स्थल है। बुद्ध काल की परम प्रसिद्ध नगरी, जो वत्स देश की राजधानी थी। वर्तमान में यह स्थान कौशांबी ही है। ऐतिहासिक ²ष्टि से भी कौशांबी काफी महत्वपूर्ण है। यहां

स्थित प्रमुख पर्यटन स्थलों में शीतला माता मंदिर, संत मलूक दास का निवास स्थान, ख्वाजा कड़क शाह की मजार, प्रभाष गिरि, जैन मंदिर और बौद्ध मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

अलवारा स्थित झील व महेवा घाट के पास संत तुलसीदास की ससुराल रत्नावली, चरवा ग्राम स्थित चरक मुनि आश्रम को किसी परिचय की जरूरत नहीं है। सभी पौराणिक हैं। धर्म ग्रंथ इनके वर्णन से भरे हैं। कौशांबी के पर्यटन स्थल

यहां पांडु के वंशज राजा परीक्षित, राजा उदयन से लेकर सम्राट अशोक ने अपनी राजधानी बनाया। जिसके साक्ष्य आज भी मौजूद है। इसके अलावा जनपद में जैन मंदिर, बौद्ध मंदिर, शीतला मंदिर सहित अनेक पर्यटक स्थल मौजूद है। जो कौशांबी के पौराणिक और समृद्धिशाली इतिहास के गवाह बने हुए हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार हस्तिनापुर नरेश निचक्षु जो राजा परीक्षित के वंशज थे। हस्तिनापुर के नदी में बह जाने के बाद वत्स वर्तमान में कौशांबी को अपनी राजधानी बनाया था। इसके अलावा अन्य तमाम स्थल पग पग पर हैं। पर्यटन स्थल के विकास के लिए कराए गए कार्य

कौशांबी प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के रूप में विकसित भले न हो, लेकिन अपना महत्व रखते हैं। बौद्ध सर्किट में शामिल होने की वजह से प्रभाष गिरी स्थित जैन मंदिर व बौद्ध मंदिर में विदेशों से भी पर्यटकों के आने की वजह से विकास कार्य हुआ है। इसके अलावा अशोक स्तंभ, घोषिता राम विहार, श्येन चिती में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग कायाकल्प करा चुका है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग का एक करोड़ अस्सी लाख की लागत से गेस्ट हाउस व ओपन एयर थिएटर बन कर तैयार हो गया है। साढ़े दस हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जिसमें बौद्ध थीम पार्क बनना हैं। इसके अलावा श्रीलंका मंदिर, कंबोडियन मंदिर, जैन मंदिर, वर्मा मंदिर बने हैं।

वर्तमान में 51वीं शक्तिपीठ शीतला धाम में विकास हुआ। पर्यटन विभाग की ओर से कायाकल्प व सौंदर्यीकरण कारण का कार्य गतिमान है। मुख्य मंदिर के पास पैंतीस लाख के प्रस्तावित प्रोजेक्ट में यात्री शेड, मंदिर की छत, सोलर लाइट, इंटरलाकिग मार्ग सुंदरीकरण जैसे कार्य चल रहे है। हनुमान घाट पर लगभग 48 लाख की लागत से शवदाह गृह का निर्माण कराया जा रहा है। वहीं कुबरी घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए घाट का सौंदर्यीकरण कराते हुए नमामि गंगे योजना से पांच करोड़ 28 लाख की लागत पक्का घाट बनाकर कायाकल्प किया गया है। यहां पर साल पर दर्शनार्थी व पर्यटकों का आवागमन बना रहता है। जिससे क्षेत्रीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं। वर्तमान में उद्यान विभाग ने गंगा के किनारे स्थित गांवों में फलदार पौधों को लगाने की योजना बनाई है। राम वन गमन मार्ग से चरवा को जोड़े जाने के बाद यहां स्थित चरक मुनि आश्रम को विकसित करने की संभावना बढ़ गई है।

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