आखिरी पड़ाव पर जिदगी फिर भी आस बाकी

आखिरी पड़ाव पर जिदगी फिर भी आस बाकी

लवकुश यादव कसेंदा आखिरी पड़ाव तक पहुंच चुके बुजुर्गो में अभी भी अपने पसंदीदा प्रत्याशी चुन

JagranSun, 09 May 2021 09:51 PM (IST)

लवकुश यादव, कसेंदा : आखिरी पड़ाव तक पहुंच चुके बुजुर्गो में अभी भी अपने पसंदीदा प्रत्याशी चुनने की आस लगी है। उनकी सोच है की शायद कभी कोई अच्छा प्रत्याशी प्रधान बने जो गांव को सही विकास तक ले जाए। सरकारी सुविधाओं से वंचित गरीबों और गांव के जरूरतमंदों को संपूर्ण सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाए। जिससे गांव के लोगों का भला हो और उन्हें विभिन्न समस्याओं से निजात मिल सके। इसी आस को लेकर रविवार को हुए मतदान में बुजुर्गों का वोटिंग करने का हौसला देखने को मिला है।

केंद्र और प्रदेश सरकार वर्षो से गरीबों को सहूलियत और नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की धारा बहाने का प्रयास है, लेकिन नगरों और ग्रामीण क्षेत्रों में चुने जाने वाले जन प्रतिनिधियों की अपनी जेब भरने की लालसा पूरी नहीं होती। जिससे ग्रामीणों तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचता है। जिसके चलते वर्षों से किया जा रहा सरकार का देश से गरीबी दूर करने का सपना अधूरा है। आजादी के बाद से ही ग्राम सभाओं में गांव के विकास के लिए ग्राम प्रधानों का चुनाव किया जा रहा है। लेकिन वर्षों से चल रही प्रधानों के आने जाने की प्रक्रिया से भी ग्रामीणों की जरूरतें पूरी नहीं हो पाती नाली खड़ंजा, गांव में सरकारी स्कूल, पानी टंकी, खेल मैदान पंचायत भवन शादी हाल आदि सुविधाओं की लाभ जहां समान्य लोगों को रहती है। विकास खंड चायल के समदा गांव निवासी लक्ष्मी देवी (81) पत्नी स्वर्गीय राम दुलारे अपने नाती प्रदीप के साथ पोलिंग बूथ पर पहुंची। इसी प्रकार सिराथू विकास खंड के रूपनारायणपुर गोरियो निवासी रामसजी (82) पत्नी राम कुमारे अपने नाती अनिल की के सहार वोटिंग किया है।

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