दूरी थी संक्रमण से बचाव की ढाल, तब प्रवीणा ने पेश की मिसाल

दूरी थी संक्रमण से बचाव की ढाल, तब प्रवीणा ने पेश की मिसाल

कासगंज संवाद सहयोगी खेलती कूदती प्रतिभाएं जब लाकडाउन में बिखरने लगीं तो शिक्षिका प्रवीना दीक्षित ने आनलाइन कक्षाओं का आयोजन ही नहीं किया बल्कि गाइड लाइन का पालन करते हुए मुहल्ला कक्षाएं भी लगाईं।

JagranWed, 14 Apr 2021 04:59 AM (IST)

कासगंज, संवाद सहयोगी: खेलती कूदती प्रतिभाएं जब लाकडाउन में बिखरने लगीं तो शिक्षिका प्रवीना दीक्षित ने आनलाइन कक्षाओं का आयोजन ही नहीं किया बल्कि गाइड लाइन का पालन करते हुए मुहल्ला कक्षाएं भी लगाईं। इनमें बालिकाओं को शिक्षा दी।

बीते साल 24 मार्च को जब लाकडाउन लगा तो सब कुछ अव्यवस्थित हो गया। इसका प्रभाव शिक्षा पर भी पड़ा। धीमे-धीमे आनलाइन कक्षाएं शुरू हुईं। लाकडाउन में प्रतिबंधों के साथ छूट मिलने लगी। निजी स्कूल में अध्ययनरत विद्यार्थियों के अभिभावक तो आनलाइन कक्षाओं में रुचि दिखाने लगे, लेकिन सरकारी स्कूलों के अभिभावक आर्थिक समृद्ध और तकनीकी ज्ञान अधिक न होने के कारण आनलाइन शिक्षा से बच्चों को जोड़ने में पिछड़ रहे थे। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की बालिकाएं घर पर थीं। इन बालिकाओं में पढ़ने की ललक थी, लेकिन उनकी प्रतिभा को मुकाम नहीं मिल पा रहा था। तब प्रवीणा दीक्षित ने देखा कि यदि प्रतिभाएं बिखर गर्इं तो उन्हें संभालना मुश्किल होगा। ऐसे में उन्होंने आनलाइन कक्षाओं के साथ मुहल्ला कक्षाओं को लगाया। वह प्रत्येक मुहल्ले में पहुंचीं, जहां उनके विद्यालय में अध्ययनरत बालिकाओं के घर थे। वहां जाकर अभिभावकों को बताया कि किस तरह आनलाइन शिक्षा से बच्चे जुड़ेंगे। उनके इस प्रयास का नतीजा निकला कि तमाम प्रतिभाओं में निखार आया। जब लाकडाउन में आनलाइन शिक्षा की मानसिक दक्षता का परीक्षण हुआ तो 50 बालिकाओं को बेहतर शिक्षा पाने का प्रशस्ति पत्र विभाग की ओर से मिला। हमेशा यह प्रयास रहा है कि मेरे विद्यालय की बालिकाएं शिक्षा के क्षेत्र में ऊंचाइयां छूती रहें। लाकडाउन में मैं काफी चितित थी, लेकिन उद्देश्य बनाया की प्रतिभाओं को बिखरने नहीं दूंगी और फिर मुकाम हासिल कर लिया।

- प्रवीणा दीक्षित, शिक्षिका कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय

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