खुद नौकरी को भटके, अब बांट रहे रोजगार

खुद नौकरी को भटके, अब बांट रहे रोजगार
Publish Date:Thu, 29 Oct 2020 07:52 PM (IST) Author: Jagran

शत्रुघ्न सिंह, सिकंदरा (कानपुर देहात)

18 साल पहले वर्ष 2002 में कानपुर देहात के राजपुर क्षेत्र के पैलावर गांव निवासी भूपेंद्र कुमार पाल ने बीए की डिग्री हासिल की। फिर दो साल तक आइजीटी बांबे से आर्ट कला का प्रशिक्षण लेकर नौकरी की तलाश में जुटे। काफी भटके, लेकिन नौकरी नहीं मिली। इस पर खेतीबाड़ी की ओर रुख किया। शुरुआत गेहूं, चना, धान और बाजरा जैसी परंपरागत फसलों के उत्पादन से हुई। प्रतिवर्ष डेढ़ लाख रुपये कमाए, लेकिन मन नहीं भरा। तीन साल पहले सब्जी उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाए तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब पांच बीघा खेती में प्रतिवर्ष सात से 10 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं। जिले के साथ ही औरैया, इटावा और लखनऊ-दिल्ली तक सब्जी की खेप पहुंचा रहे हैं। सब्जी उत्पादन से लेकर बिक्री करने तक में 50 से अधिक लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी पा रहे हैं।

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ऐसे सूझा सब्जी की खेती का तरीका

भूपेंद्र बताते हैं कि तीन साल पहले राजपुर कस्बा निवासी रफीक ने सब्जी कारोबार के लिए उनका एक बीघा खेत बलकट पर लिया। लागत निकालने के बाद करीब दो लाख रुपये की कमाई की। बस यहीं से उन्हें भी तरीका सूझा और सब्जी की खेती करने लगे।

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खुद बने लखपति, दूसरे भी उसी राह पर

भूपेंद्र कुमार पाल परंपरागत खेती छोड़ सब्जी उगा कर लखपति बन चुके हैं। अब उनसे प्रेरणा लेकर आसपास के गांवों बदनपुर डेरा, खासबरा, डौंडियापुर में भी किसान सब्जी उत्पादन की दिशा में बढ़े हैं। जैविक विधि से सब्जी उत्पादन करने के कारण मांग बढ़ने से भिंडी, टमाटर के बाद अब बैगन, मिर्च, शिमला मिर्च, आलू, प्याज, लहसुन, धनिया व अदरक की पैदावार भी वह कर रहे हैं।

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किसान उत्पादक संगठन बनाने की तैयारी

भूपेंद्र अपनी महज पांच बीघा खेती में बेहतर उत्पादन लेने के बाद अब किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाने की तैयारी में जुटे हैं। उनका मानना है कि कई किसानों का समूह बनाकर जैविक विधि से सब्जी उत्पादन करके बिक्री से फायदा बढ़ेगा।

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