जब जान बचाने की जद्दोजहद तब 151 में खराब पड़े 55 वेंटिलेटर

जब जान बचाने की जद्दोजहद तब 151 में खराब पड़े 55 वेंटिलेटर

कोरोना काल में अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही आई सामने।

JagranFri, 07 May 2021 01:59 AM (IST)

जागरण संवाददाता, कानपुर : संकट के इस दौर में जब जान बचाने की जद्दोजहद है। ऑक्सीजन बेड, इंटेसिव केयर यूनिट (आइसीयू) , हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) की किल्लत है। संक्रमितों की जांच बचाने के लिए स्वजन एक अस्पताल से दूसरे अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं। इस कठिन समय में भी सिस्टम की लापरवाही और अस्पताल प्रबंधनों की अदूरदर्शिता का खामियाजा लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है। हद देखिए, हैलट अस्पताल के पास 151 वेंटिलेटर हैं, लेकिन इनमें से काम सिर्फ 96 ही कर रहे हैं। 55 वेंटिलेटर पूरी तरह खराब हैं। इनमें से तमाम तो ऐसे हैं जो पिछले साल ही स्टार्ट नहीं हुए थे। यदि ये ठीक होते तो कई संक्रमितों का दम टूटने से बचाया जा सकता था।

जिम्मेदारी की लापरवाही की सीमा सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती। जब उनसे वेंटिलेटर खराब होने के बारे में पूछा जाता है तो दो टूक जवाब देते हैं कि चिकित्सा महानिदेशालय को सारी जानकारी है, मगर ये नहीं बताते हें वेंटिलेटर की कमी होने वाली मौतों का जिम्मेदार आखिर किसे माना जाए। सिर्फ हैलट की बात करें तो यहां पिछले वर्ष पीएम केयर फंड, एग्वा और ड्रैगर कंपनी के वेंटिलेटर आए थे। इनमें एग्वा कंपनी के वेंटिलेटर शुरू ही नहीं हुए। सिर्फ ड्रैगर और पीएम केयर फंड से आए वेंटिलेटर ही काम कर रहे हैं। अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. ज्योति सक्सेना ने बताया कि न्यूरो साइंस कोविड अस्पताल और कोविड मैटरनिटी विग के आइसीयू व एचडीयू में 86 वेंटिलेटर काम कर रहे हैं, जबकि 10 को वार्ड नंबर एक, दो, तीन और चार में स्थापित किया गया है।

कांशीराम अस्पताल में भी हालात खराब

सिर्फ हैलट ही नहीं कांशीराम कोविड अस्पताल में भी 19 वेंटिलेटर हैँ इनमें से 15 वेंटिलेटर पिछले साल पीएम केयर फंड और चार शासन से मिले थे। एनस्थीसिया का सिर्फ एक डॉक्टर होने की वजह से इनका संचालन बहुत कम हो रहा है। इसी का परिणाम है कि जबमरीज की तबीयत बिगड़ती है तो उसे सीधे हैलट रेफर कर दिया जाता है।

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कई मरीजों को होता लाभ

आइसीयू और एचडीयू से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि वेंटिलेटर पर फेफड़ों के गंभीर रोगी, जिन्हें सांस लेने में बेहद कठिनाई हो, उन्हें रखा जाता है। यह बाइपैप और एचएनएफसी मोड में भी काम करते हैं। रोगी को जितनी जरूरत होती है, उसके मुताबिक ऑक्सीजन की सप्लाई की जा सकती है। कोरोना के गंभीर रोगियों के लिए वेंटिलेटर से 40 से 80 लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट सप्लाई कर सकते हैं।

हाई क्वालिटी के 18 वेंटिलेटर

हैलट अस्पताल के कोविड अस्पताल में 18 वेंटिलेटर हाई क्वालिटी के हैं। यह पहले मेडिसिन आइसीयू और न्यूरो साइंस आइसीयू में स्थापित थे। इन्हें कोविड अस्पताल के लिए भेज दिया गया।

इंजीनियरों ने खड़े किए हाथ

जो वेंटिलेटर खराब थे, उनकी मरम्मत के लिए थर्ड पार्टी से सहयोग मांगा गया तो उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए। उनका कहना था कि यह कंपनी से ही गड़बड़ वेंटिलेटर आए हैं, इन्हें ठीक नहीं किया जा सकता।

100 से ज्यादा मॉनीटर भी अटके

हैलट अस्पताल प्रशासन ने दक्षिण भारत की एक कंपनी को 100 से अधिक मॉनीटर का आर्डर किया था, लेकिन उसकी सप्लाई भी अब तक नहीं हो सकी है। अधिकारियों की ओर से कई बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है। इससे पल्स, ऑक्सीजन के लेवल, दिल की धड़कन आदि की मॉनीटरिग होती है। भरमा रहे जिम्मेदार.

कांशीराम अस्पताल में 20 वेंटिलेटर लगाने की जगह है और सभी वेंटिलेटर काम कर रहे हैं। जिलाधिकारी से कहा गया है कि जो छह वेंटिलेटर इस्तेमाल नहीं हो रहे, उन्हें मेडिकल कालेज को दे दिया जाए। मेडिकल कालेज में लगातार चलने की वजह से कुछ वेंटिलेटर खराब होते हैं। इस समय आठ वेंटिलेटर खराब हैं। पिछले वर्ष पीएम केयर फंड से जो 26 वेंटीलेटर आए थे। वे भी खराब हैं, उन्हें लौटाने के लिए शासन को पिछले वर्ष ही पत्र भेज दिया गया था।

- सतीश महाना, औद्योगिक विकास मंत्री, प्रदेश सरकार।

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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से कहा है कि वे वेंटिलेटर की आपूर्ति करने वाली कंपनी से बात करें। यदि तत्काल वेंटिलेटर नहीं लगाए जाते तो मुकदमा दर्ज कराएं और शासन को कार्रवाई से अवगत कराएं। कांशीराम अस्पताल के सीएमएस से वेंटिलेटर की आपूर्ति करने वाली कंपनी के प्रतिनिधि को बुलाने के लिए कहा है, ताकि जो अभी तक इंस्टॉल नहीं हुए हैं, उन्हें इंस्टॉल कराया जाए। मेडिकल कॉलेज में रखे वेंटिलेटर शुरू कराने के लिए प्राचार्य ने शासन को पत्र लिखा है।

- डॉ. राजशेखर, मंडलायुक्त अस्पताल में पर्याप्त वेंटिलेटर, बाईपैप, सीपैप मशीनें हैं। एग्वा कंपनी के वेंटिलेटर खराब हैं। बेल कंपनी के वेंटिलेटर में खराबी आई है, उसे सही कराया जा रहा है। शासन और चिकित्सा महानिदेशक को जानकारी दी गई है। एक दो दिन में इंजीनियर आने की संभावना है।

- प्रो. आरबी कमल, प्रिसिपल जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज इन्होंने स्वीकारा सच

चेस्ट रोग और जर्नल फिजीशियन के केवल एक ही डॉक्टर हैं। तकनीशियन और पैरामेडिकल स्टाफ कम हें। शासन को कई बार लिखा जा चुका है। ऑक्सीजन का संकट भी बना हुआ है। वेंटिलेटर चलाने में मुश्किल आ रही है।

- डॉ. दिनेश सचान, सीएमएस कांशीराम कोविड अस्पताल

------------------------- 50 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मिले

जिला प्रशासन की ओर से हैलट अस्पताल को बुधवार देर शाम 50 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर दे दिए गए। इसमें से 10 को मुरारी लाल चेस्ट हॉस्पिटल और 40 को मेडिसिन वार्ड में लगाया जाएगा। इनसे आठ लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन मिलती है।

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