इटावा में अजीब हाल है स्वास्थ्य विभाग का... यहां पर डॉक्टर नहीं वार्ड ब्वाय चला रहे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

इस क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों की करीब 30 हजार की आबादी इस केंद्र पर इलाज के लिए निर्भर है। 22 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने जनपद के दौरे के समय सभी स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे

Akash DwivediTue, 08 Jun 2021 04:20 PM (IST)
करीब दो दशक पहले यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अस्तित्व में आया था

इटावा (गोपाल पोरवाल)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिजौली वार्ड ब्वाय के सहारे चल रहा है। डॉक्टरों, दवाइयों के अभाव में यह खुद ही बीमार है। यहां वार्ड ब्वाय के अलावा फार्मासिस्ट, स्वास्थ्य निरीक्षिका, एएनएम, स्टाफ नर्स, स्वीपर सहित आधा दर्जन कर्मचारियों की तैनाती है लेकिन आते एक भी नहीं हैं। सुरक्षा के लिए चौकीदार की व्यवस्था नहीं है। ब्लाक मुख्यालय से इटावा की तरफ 10 किमी दूर नेशनल हाईवे के किनारे यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित है। पूर्व सांसद प्रेमदास कठेरिया का पैतृक गांव भी यही है। करीब दो दशक पहले यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अस्तित्व में आया था।

इस क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों की करीब 30 हजार की आबादी इस केंद्र पर इलाज के लिए निर्भर है। 22 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने जनपद के दौरे के समय सभी स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे लेकिन यहां पर दवाइयों की तो छोडि़ए, स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी पर ही कोई नहीं आता है।

दैनिक जागरण की टीम जब परिसर में पहुंची तो शानदार इमारत, स्वच्छता और परिसर के अंदर रोपे गए पौधों को देखकर यह महसूस हुआ कि यहां हर आने वाले को इलाज मिले या न मिले लेकिन स्वच्छ वायु और पर्यावरण जरूर मिल रहा है।

मुख्य दरवाजे पर आशा कार्यकर्ता कुंती देवी व श्रीदेवी मिलीं। उन्होंने बताया कि अंदर स्टाफ नर्स मधु मालिनी व एएनएम सुधा पाल, वार्ड ब्वाय सीताराम मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि वह कोविड-19 के कार्य को कर रही हैं। उन्होंने बताया कि यहां पर किसी भी चिकित्सक की तैनाती नहीं है। पहले यहां प्रतिदिन 70 मरीज आते थे लेकिन अब केवल एक दो मरीज आ रहे हैं। फार्मासिस्ट पंकज कटियार की तैनाती है लेकिन वह कहीं बाहर गए हुए हैं। स्वीपर मुकेश कुमार की ड्यूटी जनपद मुख्यालय पर लगा दी गई है। हेल्थ विजिटर मिथलेश कुमारी भी मौजूद नहीं थीं। दवाइयों की उपलब्धता न के बराबर है। परिसर में स्टाफ के लिए बने आवास शोपीस बन गए हैं, उनके कोई रहने वाला नहीं है।

तीन बार मिल चुका है कायाकल्प अवार्ड : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को कायाकल्प योजना के तहत शासन द्वारा तीन बार अवार्ड भी मिल चुका है लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर यहां की व्यवस्थाएं धरातल पर कितनी खरी हैं यह क्षेत्र के लोग बताते हैं। कोविड-19 की तीसरी लहर से लडऩे के लिए यह स्वास्थ्य केंद्र कतई तैयार नहीं है।

इनका ये है कहना

अस्पताल में इलाज के लिए डॉक्टर की तैनाती के प्रयास किए जा रहे हैं। अभी ज्यादातर स्टाफ कोविड-19 ड्यूटी में लगा हुआ है। - डा. गौरव त्रिपाठी, अधीक्षक सीएचसी महेवा

 

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