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पूर्व प्राचार्य बोले...कोरोना वायरस से बचाव के लिए वैक्सीनेशन संग सतर्कता और सावधानी जरूरी

चेस्ट फिजीशियन एवं जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. डॉ. एसके कटियार

जो दरवाजे खिड़कियों फर्श या लिफ्ट-कार के हैंडल आदि में चिपक जाती हैं। असावधानी बरतते हुए छूने से हाथ के जरिए वायरस आंख मुंह नाक और कान से शरीर के अंदर प्रवेश कर सकता है। शोध में पाया गया है कि वायरस प्लास्टिक पर 72 घंटे स्टील पर 48 घंटे

Akash DwivediFri, 14 May 2021 11:10 AM (IST)

कानपुर, जेएनएन। कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। हर व्यक्ति संक्रमण की वजह से डरा हुआ है। चेस्ट फिजीशियन एवं जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. डॉ. एसके कटियार ने दैनिक जागरण के साक्षात्कार में कोरोना वायरस के संक्रमण, बचाव एवं वैक्सीनेशन को लेकर बेबाकी से जवाब दिया। डॉ. कटियार का कहना है कि वायरस के संक्रमण से बचने के लिए सुरक्षा और सावधानी जरूरी है। वैक्सीन लगवाएं और बचाव के प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करें। अगर संक्रमण हो जाए तो घबराएं नहीं, 95 फीसद लोग घरों में डॉक्टरों की सलाह का पालन करते हुए स्वस्थ हो रहे हैं। पेश है उनसे बातचीत के अंश :

सवाल : कोरोना संक्रमित के संपर्क में आने के कितने दिन बाद बीमारी के लक्षण आते हैं?

जवाब : सामान्यत: संक्रमण के 2-14 दिन लगते हैं, लेकिन इसमें दूसरे फैक्टर भी होते हैं। कितना एक्सपोजर हुआ, संक्रमित के संपर्क में कितने दिन रहे। प्रतिरोधक क्षमता कैसी है। एंटी कैंसर दवाइयां, स्टेरॉयड और धूमपान तो नहीं करते हैं।

सवाल : कोरोना जैसे लक्षण के बाद भी आरटीपीसीआर की रिपोर्ट निगेटिव आने पर क्या करें?

जवाब : आरटीपीसीआर जांच में 30 फीसद में लक्षण होने के बाद भी रिपोर्ट निगेटिव आती है। इसमें यह भी निर्भर करता है कि नेजल और थ्रोट से सैंपल कैसे लिया गया है। लक्षण होने पर रिपोर्ट निगेटिव है और बुखार नहीं उतर रहा तो संदिग्ध मानते हुए इलाज करें। एक्सरे, ब्लड की जांच व पीडि़त की हिस्ट्री जरूर पता करें। जरूरी होने पर सीटी थोरेक्स जांच कराएं।

सवाल : बिना लक्षण के कोरोना चपेट में आकर दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं?

जवाब : अगर घर में संक्रमित व्यक्ति हैं या किसी संक्रमित संपर्क में आए हैं। ऐसे में जांच जरूर कराएं, क्योंकि जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) अच्छी होती है। उनमें किसी प्रकार के लक्षण नहीं आते हैं, लेकिन ऐसे व्यक्ति दूसरों को संक्रमित करते रहते हैं।

सवाल : कोरोना वायरस बाहर कितनी देर तक जीवित रह सकता है?

जवाब : संक्रमित के खांसने, छीकने, बात करने और सांस लेने से ड्रापलेट््स (बूंद) बाहर आती हैं, जिसमें छोटी और बड़ी बूंदे होती हैं, जिसमें वायरस भी होता है। बड़ी बूंदे 1-2 फीट और छोटी बूंदे 10-15 फीट तक हवा में उड़ती हैं। जो दरवाजे, खिड़कियों, फर्श या लिफ्ट-कार के हैंडल आदि में चिपक जाती हैं। असावधानी बरतते हुए छूने से हाथ के जरिए वायरस आंख, मुंह, नाक और कान से शरीर के अंदर प्रवेश कर सकता है। शोध में पाया गया है कि वायरस प्लास्टिक पर 72 घंटे, स्टील पर 48 घंटे, कार्डबोर्ड पर 24 घंटे और कॉपर पर 4 घंटे जीवित रहता है। इसलिए इथेनॉल के स्प्रे से इन चीजों का समय-समय पर संक्रमण रहित करते रहें। ऐसे भी 48 घंटे में वायरस की क्षमता भी नगण्य हो जाती है।

सवाल : इलाज के दौरान रिकवरी की स्थिति कैसे जान सकते हैं?

जवाब : रिकवरी की स्थिति लक्षण से पता चलती है, जिसमें बुखार उतरना, गले में दिक्कत कम होना, आक्सीजन की स्थिति बेहतर होना। इसके अलावा ब्लड के विभिन्न पैरामीटर की जांच और फेफड़े के एक्सरे से संक्रमण की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

सवाल : क्या संक्रमित को भर्ती कराने की जरूरत पड़ती है?

जवाब : 95 फीसद संक्रमित घर पर ही रहते हुए ठीक हो जाते हैं। पांच फीसद में दिक्कत होती है, उनमें अधिक उम्र, मधुमेह, हाइपरटेंशन, हार्ट, किडनी, लिवर और कैंसर से पीडि़तों को दिक्कत होती है। उनका ऑक्सीजन लेवल कम होने और आक्सीजन सैचुरेशन 90-94 के बीच होने पर भर्ती कराना पड़ता है।

सवाल : कोरोना संक्रमित के इलाज में स्टेरॉयड थेरेपी का क्या रोल है?

जवाब : अधिकतर में जरूरत नहीं पड़ती है। आक्सीजन लेवल गिरने, सांस फूलने और 10 दिन से बुखार न उतरने पर स्टेरॉयड की दवाइयां चलानी पड़ती है। यह आसानी से उपलब्ध सस्ती और कारगर होती हैं। जल्दी स्टेरॉयड नहीं देना चाहिए, इम्यून सिस्टम ही उसे ठीक करता है। कोरोना से उबरने के बाद फेफड़ों को साफ करने में भी स्टेरॉयड उपयोगी है। स्टेरॉयड का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह पर न करें।

सवाल : संक्रमित का सीटी स्कैन जांच कब कराना चाहिए?

जवाब : 90 फीसद संक्रमितों में सीटी स्कैन जांच कराने की जरूरत नहीं पड़ती है। फेफड़े में कितना संक्रमण हुआ है। फेफड़े कितने डैमेज हुए हैं, उसका पता लगाने के लिए कराते हैं। संक्रमण के तुरंत बाद सीटी स्कैन जांच नहीं करानी चाहिए। जब आरटीपीसीआर जांच निगेटिव हो और स्थिति गंभीर हो रही हो तो सीटी स्कैन जांच मददगार साबित होती है। प्रयास करें कि लो रेडिएशन सीटी स्कैन ही कराएं।

सवाल : कोरोना वायरस के संक्रमण की दूसरी लहर कितनी गंभीर है, उसकी मृत्युदर कितनी है?

जवाब : कोरोना की दूसरी वेब (लहर) का संक्रमण बहुत तेज है। पहली वेब की तुलना में इसकी तीव्रता 70-71 फीसद तक अधिक है। इसकी मृत्युदर के बारे में अभी डाटा नहीं है, इसलिए अभी कुछ कहना मुश्किल है।

सवाल : कोरोना वायरस से किन लोगों को सावधान रहने की जरूरत है?

जवाब : कोरोना की इस वेब से सभी को बचना जरूरी है। खासकर अधिक उम्र के व्यक्तियों, मधुमेह, हार्ट, हाइपरटेंशन, सीओपीडी, फेफड़े की बीमारी वालों को जटिलताएं अधिक हो सकती है। उन्हेंं इंटेंसिव केयर की जरूरत पड़ सकती है।

सवाल : कोरोना वैक्सीनेशन कितना सुरक्षित है?

जवाब : कोरोना वायरस से बचाव के लिए वैक्सीनेशन ही एकमात्र उपाए है। अधिक से अधिक वैक्सीनेशन कराना चाहिए, ताकि बीमारी से बचा जा सके। हर दवाई के कुछ न कुछ साइड इफेक्ट होते हैं। कोरोना की भयावह स्थिति को देखते हुए अगर एक-आध को कोई साइड इफेक्ट हो तो उसे नजरअंदाज करें। वैक्सीन लगवाने के बाद अगर किसी को संक्रमण होता है तो जटिलता नहीं होगी।

सवाल : ब्लैक फंगल से कैसे बचा जा सकता है?

जवाब : महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली में ब्लैक फंगल के कुछ मामले सुनने को मिले हैं। अब यहां भी दस्तक दे दी है। यह एक फंगल इंफेक्शन है, जो पहले से होता आ रहा है। इससे डरने की जरूरत नहीं है। कम प्रतिरोधक क्षमता होने पर ब्लैक फंगल का खतरा हो सकता है। इसलिए मधुमेह नियंत्रित रखें। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए खानपान बेहतर रखें। फंगल का असर आंख, नाक, मुंह एवं जबड़े से होते हुए ब्रेन एवं लंग्स तक पहुंच जाता है।

सवाल : कोरोना वायरस का नया वैरिएंट कितना घातक है?

जवाब : कोरोना वायरस अपने रूप में तेजी से बदलाव करता है। इसलिए नए तरीके के वैरिएंट आने का खतरा रहता है। इस समय इंडिया में सक्रिय वायरस का वैरिएंट ब्रिटेन के स्टेन से मिलता-जुलता है। इसके अलावा देश में ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और नार्थ अमेरिका के स्टेन भी पाए गए हैं। नए वैरिएंट में लक्षण बदल जाते हैं। वह शरीर के किस अंग को प्रभावित करेगा, यह भी पता नहीं चलता है। कई बार वैक्सीन की एंटीबॉडी को भी चकमा देने में कामयाब होता है।

फैशन में मास्क न लगाएं

डॉ. कटियार का कहना है कि मास्क, शारीरिक दूरी और सैनिटाइजेशन के जरिए संक्रमण से बचा जा सकता है। फैशन में मास्क न लगाएं, ऐसा करके आप अपने को धोखा न दें। अगर लगाना हो तो पहले सॢजकल एवं मेडिकल मास्क लगाएं, उसके ऊपर फैशनेबल मास्क लगा सकते हैं। मास्क लगाए तो नाक और मुंह ठीक से बंद रखें।  

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