IAS बनीं जागृति पर फतेहपुर वालों ने लुटाया प्यार, मेधावी ने बताया कैसे हासिल किया मुकाम

फतेहपुर जिले के अमौली ब्लाक के नसेनिया गांव के रहने वाले स्व. महावीर प्रसाद अवस्थी बिंदकी के नेहरू इंटर कालेज में शिक्षक थे। चार बेटों में प्रवक्ता योगेश चंद्र अवस्थी प्रवक्ता केशव चंद्र अवस्थी डा. सुरेश चंद्र अवस्थी पूर्व प्रधान अवधेश चंद्र अवस्थी हैं।

Shaswat GuptaMon, 18 Oct 2021 01:07 PM (IST)
जागृति को पगड़ी पहनाकर स्वागत करते गणमान्य।

फतेहपुर, जेएनएन। यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा सेकेंड टापर जागृति अवस्थी इन दिनों अपने गृह जिले में हैं। नसेनिया गांव की मूल निवासी जागृति को बुजुर्ग आशीर्वाद दे रहे हैं तो युवा प्रेरणा ले रहे हैं। रविवार को बिंदकी में आयोजित अभिनंदन समारोह में उन्होंने कहा कि इंटरनेट दोधारी तलवार है। डिजिटल प्लेटफार्म पर तमाम तरह की सामग्री है। जरूरत इस बात की है कि इसका उपयोग ज्ञानार्जन के लिए किया जाए। इस दौरान टापर जागृति अवस्थी व मेजर हिमांशु दुबे को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष मुन्ना लाल सोनकर, अनुराग अवस्थी, काशी प्रसाद मिश्रा, राजेंद्र मिश्रा, मनोज शुक्ला, मुदित मिश्रा, विनोद द्विवेदी, मोना ओमर, संजय ओमर, आरबी सिंह, राम नारायण वर्मा आदि रहे। शहर के सिविल लाइंस में आयोजित सम्मान समारोह में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं ने सेकेंड टापर से सवाल पूछे। आयोजक मंडल में आदित्य पांडेय, विनय तिवारी,धर्मेंद्र तिवारी, शशि भूषण, संजय पाण्डेय, सुनील अग्निहोत्री, बबलू, अंजू त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।  

फतेहपुर जिले के अमौली ब्लाक के नसेनिया गांव के रहने वाले स्व. महावीर प्रसाद अवस्थी बिंदकी के नेहरू इंटर कालेज में शिक्षक थे। चार बेटों में प्रवक्ता योगेश चंद्र अवस्थी, प्रवक्ता केशव चंद्र अवस्थी, डा. सुरेश चंद्र अवस्थी, पूर्व प्रधान अवधेश चंद्र अवस्थी हैं। डा. अवस्थी ने छतरपुर क्षेत्र में होम्योपैथ कालेज से मेडिकल स्टडीज करने के बाद से ही रह रहे हैं। जागृति की मां मधुबाला अवस्थी महर्षि विद्या मंदिर सीनियर सेकेंड्री स्कूल छतरपुर की पुरातन स्पोर्ट्स टीचर रही हैं। वहीं इन सबके बीच पूरे अवस्थी परिवार ने भोपाल में रहने का निर्णय लिया। जागृति अवस्थी  2017 में मौलाना आजार नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी से बीटेक कर चुकी हैं, तदोपरांत उन्होंने भेल में बतौर इंजीनियर ज्वाइनिंग की। आइएएस क्रैक करने के लिए वे दिल्ली गईं, लेकिन कोरोना संक्रमण आने के बाद भोपाल लौट आईं। वे बताती हैं कि आनलाइन पढ़ाई करके उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया है।

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