हॉलमार्क केंद्र बनाने पर मिल सकता 75 फीसद तक अनुदान, बीआइसी के अधिकारी मंत्री से करेंगे बात

हॉलमार्क के लिए राष्ट्रीय सलाहकार समिति की तीसरी बैठक में यूआइडी पर चर्चा नहीं हुई। अभी प्रदेश के 75 जिलों में महज 19 में ही केंद्रों की संख्या 60 ही है। बीआइएस के अधिकारी अब मंत्री से बात करके संशोधित प्रस्ताव व्यापारियों को देंगे।

Abhishek AgnihotriSun, 30 May 2021 01:51 PM (IST)
सराफा व्यापारियों के लिए संशोधित प्रस्ताव बनेगा।

कानपुर, जेएनएन। उत्तर प्रदेश के 75 में से सिर्फ 19 जिलों में ही हॉलमार्क केंद्र हैं। उनकी संख्या महज 60 है। बुंदेलखंड क्षेत्र में कोई हॉलमार्क केंद्र नहीं है। इन स्थितियों पर शनिवार को हॉलमार्क के लिए बनाई गई राष्ट्रीय सलाहकार समिति के सदस्यों में हुई चर्चा के दौरान कहा गया कि हॉलमार्क के केंद्र बनाने पर 75 फीसद तक अनुदान दिया जा सकता है। वेबिनार में चर्चा हुई कि जो क्षेत्र हॉलमार्क केंद्र की संख्या के मामले में बहुत पिछड़े हैं, उन्हें शुरुआती दौर में राहत दी जाए।

फिलहाल, सिर्फ सोने के जेवरों पर हॉलमार्क की अनिवार्यता के लिए राष्ट्रीय सलाहकार समिति का शनिवार को तीसरा वेबिनार था। दूसरे वेबिनार में सोने के ही जेवरों पर यूनीक आइडेंटीफिकेशन (यूआइडी) नंबर की चर्चा अधूरी रह गई थी। तीसरी बैठक में यूआइडी पर बात न करके हॉलमार्किंग की अनिवार्यता पर चर्चा हुई।

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआइएस) के अधिकारियों ने बताया, कई राज्यों में अभी हॉलमार्क सेंटर नहीं हैं। इसमें यूपी में 75 जिलों में 19 जिलों में 60 हॉलमार्क सेंटर हैं। 56 जिले बिना सेंटर के हैं। कारोबारी सदस्यों ने बुंदेलखंड क्षेत्र में एक भी हॉलमार्क केंद्र नहीं होने की बात उठाई। चर्चा में दो ङ्क्षबदु आए। एक में कहा गया कि फिलहाल, जिन राज्यों में हॉलमार्क सेंटर कम हैं, वहां अनिवार्यता से राहत दी जाए। इसके साथ ही हॉलमार्क केंद्र खोलने वालों को 75 फीसद तक सब्सिडी मिले। इसके साथ ही एक लाख की आबादी या दो करोड़ से नीचे के टर्नओवर वाले कारोबारियों को छूट दी जाए।

कारोबारी सदस्यों ने कहा कि कानून की अनिवार्यता और सजा के प्रविधान के कारण व्यापारी इसे गोल्ड कंट्रोल एक्ट के रूप में देख रहे हैं। माल के आवागमन से लेकर स्टोर करने तक निर्माण की परिभाषा में आखिर पंजीयन किसे लेना है। इतनी तेजी और इतनी जल्दी इसे लागू करने की क्या जरूरत है। सदस्यों ने कहा कि यह पांच हजार वर्ष पुरानी कॉटेज इंडस्ट्री है।

इस कानून से अस्तित्व संकट में आ जाएगा। उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों में कई ऐसे इलाके हैं, जहां ज्वेलर्स को हॉलमार्क सेंटर न होने के कारण जान हथेली पर लेकर हॉलमार्किंग के लिए दूसरी जगह जाना होगा। बीआइएस के अधिकारियों ने कहा कि इस संबंध में बात कर आगे बताया जाएगा। तीसरे वेबिनार के बाद अब किसी वेबिनार की जरूरत होगी तो सदस्यों को पहले बताया जाएगा। इसके अलावा ढाई से तीन माह में रिव्यू कमेटी की बैठक होने की बात भी कही गई।

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