मोबाइल पर वीडियो देखकर सीखेंगे ड्राइविंग, यूपी में पहली बार कानपुर से शुरू हो रही व्यवस्था

उत्तर प्रदेश में पहली बार कानपुर शहर में इसी महीने से मोबाइल पर वीडियो के जरिए वाहन चलाना सिखाने की नई व्यवस्था शुरू की जाएगी । इससे स्थाई लाइसेंस के लिए आवेदन करने वालों को सहूलियत मिलेगी ।

Abhishek AgnihotriFri, 17 Sep 2021 08:47 AM (IST)
कानपुर में नई व्यवस्था से सहूलियत मिलेगी।

कानपुर, [मोहम्मद दाऊद खान]। लर्निंग लाइसेंस बनने के बाद स्थाई लाइसेंस के लिए आवेदकों को प्रशिक्षित भी किया जाएगा। उनके पंजीकृत मोबाइल फोन पर चल रहे वाट्सएप पर वाहन चलाने के तरीकों से जुड़े वीडियो भेजे जाएंगे। वाहन चलाने की जानकारी के साथ ही उन्हें यातायात नियम बताए जाएंगे। आटोमेटिक टेस्टिंग ड्राइविंग ट्रैक पर टेस्ट देने का तरीका भी बताया जाएगा ताकि टेस्ट देते समय उन्हें परेशानी न हो। यह व्यवस्था इसी माह के अंत तक लागू करने की तैयारी है।

लर्निंग लाइसेंस का टेस्ट पास करने के बाद स्थाई लाइसेंस के लिए प्रदेश के पहले आटोमेटिक टेस्टिंग ड्राइविंग ट्रैक पनकी में टेस्ट देना होता है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक बने ट्रैक पर वाहनों चलाते समय 52 से 55 फीसद लोग फेल हो जाते हैं। इसकी बड़ी वजह ट्रैक पर वाहन चलाने की जानकारी न होना है। अब लर्निंग लाइसेंस बनने के बाद संभागीय परिवहन कार्यालय के अधिकारियों ने स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस के लिए टेस्ट देने वालों को वीडियो के माध्यम से प्रशिक्षण देने की पहल की है। प्रदेश में ऐसी व्यवस्था पहली बार की गई है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के माडल ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट विकास नगर के प्रधानाचार्य की मदद से वीडियो तैयार किए गए हैं।

टेस्टिंग ट्रैक पर लगेंगी एलईडी स्क्रीन

टेस्ट में पारदर्शिता के लिए कानपुर में पिछले साल ही प्रदेश का पहला आटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पनकी में शुरू हुआ था। ट्रैक पर सीसीटीवी कैमरे व सेंसर लगे हैं। टेस्ट के बाद कंप्यूटर से पास या फेल का रिजल्ट आता है। अब वहां स्थाई लाइसेंस टेस्ट देने वालों को वीडियो दिखाकर जानकारी दी जाएगी। इसके लिए ट्रैक पर दो एलईडी स्क्रीन लगाई जाएंगी। दो पहिया व चार पहिया वाहनों के लिए अलग-अलग स्क्रीन लगेंगी।

-लर्निंग लाइसेंस का टेस्ट पास करने वाले आवेदकों को वीडियो भेजे जाएंगे। इनमें आटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक के विवरण के साथ उस पर वाहन चलाने की जानकारी है। ये व्यवस्था इसी महीने शुरू होगी। -राजेश सिंह, संभागीय परिवहन अधिकारी

ऐसे होता है टेस्ट

चार पहिया वाहन

पैरलल पार्किंग ट्रैक -45 सेकेंड

वाहन को स्टार्ट कर रिवर्स गियर पर पीछे फिर आगे लाना है। इसके बाद स्टाप प्वाइंट पर ले जाना होता है।

ग्रेडिएंट ट्रैक - 45 सेकेंड

स्टार्ट प्वाइंट से ढलान पर गाड़ी चलाना, इस दौरान सेंसर से बचना है, गाड़ी स्लिप नहीं होनी चाहिए।

एस ट्रैक - 50 सेकेंड

वाहन को रिवर्स गियर में चलाकर अंग्रेजी का एस बनाना होता है।

एट ट्रैक -45 सेकेंड

वाहन को ट्रैक पर अंग्रेजी का आठ के आकार में चलाना होता है।

एच ट्रैक - 90 सेकेंड

अंग्रेजी के एच के आकार पर बने ट्रैक पर आगे, पीछे, दाएं व बाएं लगे प्वाइंट पर वाहन चलाकर दिखाना होता है।

दोपहिया वाहन

सर्पेनटाइन व टी डब्ल्यू ट्रैक- 90 सेकेंड

सांप के आकार के ट्रैक पर दो बार आठ बनाना है। इस दौरान पैर जमीन पर नहीं छुएं वर्ना सेंसर फेल कर देंगे।

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