UP Board Result Kanpur: अब आसमान छूने की है चाहत, पढ़िए-कैसे सपने संजो रहे हैं दसवीं के मेधावी

कानपुर शहर में यूपी बोर्ड दसवीं का रिजल्ट आने पर मेधावियों में खुशी तो है लेकिन परीक्षा न दे पाने की कसक भी नजर आ रही है। सफल छात्र छात्राओं ने आसमान छूने जैसे सपने संजोए हैं और भविष्य के लिए भी तानाबाना बुनने लगे हैं।

Abhishek AgnihotriSun, 01 Aug 2021 01:49 PM (IST)
कानपुर में दसवीं के मेधावियों से खास बातचीत।

कानपुर, जेएनएन। यूपी बोर्ड में 10वीं का रिजल्ट आने के बाद मेधावियों में खुशी का माहौल है। हालांकि इस बार मेधावियों में परीक्षा न दे पाने की कसक जरूर है लेकिन सफलता मिलने से खुशी से लबरेज भी हैं। कानपुर शहर में दसवीं की परीक्षा में सर्वाधिक पाने वाले मेधावियों ने कुछ इस तरह अपने खुशी और भविष्य के सपने साझा किए...।

आइएएस बनना चाहती हैं दिशा

मैं आइएएस बनकर आमजन की मदद करना चाहती हूं। शनिवार को यह बात शिवाजी इंटर कालेज में 10वीं की छात्रा दिशा अवस्थी ने कही। यूपी बोर्ड के 10वीं के परिणाम में दिशा को 96 फीसद अंक मिले। नारायणपुरी नौबस्ता निवासी दिशा ने बताया कि उसे पढ़ाई के अलावा खेलों में सबसे ज्यादा बैडमिंटन खेलना अ'छा लगता है। इसके साथ ही किताबें पढऩा, संगीत सुनना भी खूब भाता है। दिशा ने हालांकि यह भी कहा कि अगर परीक्षाएं होती हैं तो उनके अंक और अधिक होते। दिशा के पिता राजकुमार अवस्थी का फर्नीचर का व्यवसाय है, जबकि माता पिंकी अवस्थी गृहणी हैं।

साक्षी की सफलता में शामिल है मां की मेहनत

अर्रा निवासी साक्षी ने जिन परिस्थितियों में पढ़ाई करके 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 96 फीसद अंक प्राप्त किए वह काबिले-तारीफ हैं। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के चलते उन्होंने स्वाध्याय को मूलमंत्र बनाया। शिवाजी इंटर कालेज अर्रा की छात्रा साक्षी की मां विनीता देवी शिक्षामित्र हैं जबकि पिता रामकृष्णा रोडवेज में कंडक्टर हुआ करते थे। साक्षी बताती हैं कि अब घर की पूरी जिम्मेदारी मां के कंधों पर है। उनकी सफलता में मां की मेहनत शामिल है। साक्षी की बहन पहली कक्षा में पढ़ती है, जबकि भाई चौथी कक्षा का छात्र है। हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान व ड्राइंग विषय के साथ बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली साक्षी की ख्वाहिश पुलिस विभाग में कार्य करने की है।

नीट की तैयारी करना चाहते घनेंद्र

मैं अपने परिणाम से तो संतुष्ट हूं, मगर परीक्षाएं होतीं तो शायद इससे अधिक अंक मिलते। शनिवार को यह बात ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कालेज में 10वीं के छात्र घनेंद्र सिंह ने कही। यूपी बोर्ड की ओर से जारी 10वीं के परिणाम में घनेंद्र को 95.66 फीसद अंक मिले। मूलरूप से बांदा निवासी घनेंद्र ने जवाहर नगर में रहकर तैयारी की। घनेंद्र ने बताया कि कई विषयों में औसतन उन्हें कम अंक मिले। वह अब नीट की तैयारी करना चाहते हैं, इसकी शुरुआत भी उन्होंने कर दी है। घनेंद्र के पिता राम सिंह सरकारी विद्यालय में शिक्षक हैं, और माता किरन सिंह गृहणी हैं।

आर्थिक तंगी में मिला मां का साथ तो छुआ आसमान

यह जग जाहिर है कि अपनी आंचल की छांव देने वाली मां ब'चे के सपने भी बुनती है। खुद कष्ट झेलती है, लेकिन ब'चे पर आंच नहीं आने देती। परितोष इंटर कालेज से 95.5 फीसद अंकों के साथ 10वीं की परीक्षा में सफलता पाने वाले उत्तम सिंह सेंगर की मां ने भी कुछ ऐसा ही किया। उत्तम अपनी सफलता का श्रेय मां को देते हैं, जिन्होंने आर्टिफिशियल माला बनाकर व सिलाई, कढ़ाई का काम करके अपने बेटे को सफलता के इस शिखर पर पहुंचाया। हालांकि पिता राजेंद्र सिंह सेंगर की मृत्यु के बाद उनके दादा-दादी, नाना-नानी व दोनों चाचा ने मदद की। कभी कभी ऐसा भी हुआ जब उत्तम की मां को आर्थिक तंगी से दो चार होना पड़ा। वह किसी तरह बेटे की फीस जमा करती थीं। केडीए कालोनी निवासी उत्तम बताते हैं कि उनका व मां का सपना है कि वह आइआइटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करें इसके लिए उन्होंने तैयारी शुरू कर दी है। वह तीन भाई बहन हैं।

पढ़ाई के जुनून ने लिखी सफलता की इबारत

अमेरिकन लेखक बुकर टी वाशिंगटन की लिखित कहानी 'माई स्ट्रगल फार एन एजुकेशन ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कालेज की छात्रा संध्या निषाद पर सटीक बैठती है। जिस तरह इस कहानी में एक गरीब लड़के का शिक्षा के लिए संघर्ष बताया गया है। उसी संघर्ष के बूते संध्या निषाद ने 10वीं में 94.6 फीसद अंक पाकर अपने परिवार को खुशियों का तोहफा दिया है। आर्थिक तंगी से जूझने वाले उसके मजदूर पिता से जब बेटी ने आगे पढऩे की बात कही तो उन्होंने मना कर दिया। पिता को किसी तरह मनाया और रोजाना 24 किमी साइकिल चलाकर स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने लगी।

शंकरपुर कटरी की रहने वाली संध्या ने आठवीं तक की पढ़ाई वहीं के प्राइमरी स्कूल से की है। पिता सुंदरलाल मजदूरी करते हैं। माता श्यामकली गृहणी हैं। संध्या के तीन भाई और तीन बहन हैं। परिवार में वह और उनका छोटा भाई ही पढ़ाई कर रहा है। संध्या ने बताया कि पापा से आठवीं के बाद आगे पढऩे को कहा था तो उन्होंने कहा कि चुप करके घर में बैठो। कहा कि इतनी दूर स्कूल जाने के लिए भाड़ा कहां से आएगा तो मैंने साइकिल से स्कूल जाने की बात कहते हुए पढ़ाई के लिए उनसे हामी भरवा ली। अब वह अपने सुनहरे भविष्य के लिए और मेहनत से पढ़ाई करेगी।

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