बिना एक्सरे व खून की जांच किए हो रहा इलाज, मरीजों की जेब हो रही हल्की, कर्मचारी भी करते वसूली

सीएचसी में गुरुवार दोपहर कर्मचारी परिसर में ही बायोमेडिकल वेस्ट जलाते मिले। जहरीला धुआं मेटरनिटी विंग और ओपीडी ब्लाक में भर रहा था। दिखाने आईं गर्भवती खांसी से बेदम थीं। उनके बच्चों की आंखों से आंसू बह रहे थे।

Akash DwivediFri, 10 Sep 2021 10:05 AM (IST)
कर्मचारी से पूछा कि खून की जांच नहीं होती क्या, तो वह भड़क गया

कानपुर, जेएनएन। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बिल्हौर को स्वास्थ्य विभाग ने कोविड संक्रमितों के इलाज के लिए अपग्रेड कराया है। यहां की तैयारियों का जायजा लेने अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य और सीएमओ भी गए, पर उन्हेंं सबकुछ ठीक मिला। गुरुवार को जब जागरण टीम सीएचसी की पड़ताल करने पहुंची तो वहां कई बुखार पीडि़त आए थे, जिन्हेंं खून और एक्सरे जांच करानी थी। सभी को बाहर जाने के लिए कह दिया। पैसे देने पर सैंपल लिए जा रहे थे। जब उस कर्मचारी से पूछा कि खून की जांच नहीं होती क्या, तो वह भड़क गया। फिर बताया कि आठ माह से मशीन खराब है। सीएचसी में एक्सरे मशीन भी नहीं है।

परिसर में जला रहे मेडिकल कचरा : सीएचसी में गुरुवार दोपहर कर्मचारी परिसर में ही बायोमेडिकल वेस्ट जलाते मिले। जहरीला धुआं मेटरनिटी विंग और ओपीडी ब्लाक में भर रहा था। दिखाने आईं गर्भवती खांसी से बेदम थीं। उनके बच्चों की आंखों से आंसू बह रहे थे। कैमरा देखते ही कर्मचारी आग बुझाने के लिए दौड़ पड़े।

पैसे देने पर लेते डेंगू-कोरोना की जांच का सैंपल : अनूपपुरवा गांव के बुखार पीडि़त नरेंद्र कटियार दिखाने आए थे। उन्होंने बताया कि डाक्टर को दिखाया। कहा, गांव में डेंगू फैला है, जांच करा दीजिए। डाक्टर ने पर्चे पर लिखा, तब सैंपल देने मेटरनिटी विंग की प्रयोगशाला गए। उनका आरोप है कि लैब टेक्नीशियन (एलटी) ने डेंगू की जांच का सैंपल लेने के 200 रुपये मांगे। मना करने पर अंगुली से खून निकाल मलेरिया की जांच की और लौटा दिया। कहा कि बिना पैसे कोई काम नहीं होता है।

डेंगू या मलेरिया की जांच में कर्मचारियों द्वारा पैसे लेने का आरोप गलत है। सीएचसी की टीम बुखार पीडि़त गांवों में जाकर जांच कर रही है। ऐसे में रुपये मांगने का सवाल ही नहीं उठता है। डेंगू एवं सीबीसी की जांच कानपुर से करवाई जा रही है। फिर भी मामला संज्ञान में आया है, इसकी जांच कराएंगे। कानपुर से मेडिकल कचरा उठाने के लिए गाड़ी आती है। इसलिए अस्पताल में मेडिकल कचरा जलाए जाने का कोई सवाल नहीं है। सफाईकर्मी ने मरीजों द्वारा फेंके कूड़े को एकत्र कर जलाया हो। इसकी जानकारी नहीं है, क्योंकि जांच करने बाहर गए थे।- डा. अरविंद भूषण, अधीक्षक, सीएचसी बिल्हौर।

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