कानपुर: चीनी उद्योग को स्वच्छ बनाने के लिए एनएसआइ में शुरू हुआ प्रशिक्षण, पर्यावरणीय मुद्दों पर दिया गया जोर

प्रो नरेंद्र मोहन ने बताया की यह कार्यक्रम विशेष रूप से चीनी उद्योग में पर्यावरणीय मुद्दों के समाधान के लिए डिजाइन किया गया है ताकि चीनी उद्योग को एक स्वच्छ उद्योग बनाया जा सके और गंगा जैसी पवित्र नदियों को दूषित करने वाले इस उद्योग के प्रदूषकों से बचा जासके।

Abhishek AgnihotriPublish:Mon, 06 Dec 2021 04:51 PM (IST) Updated:Mon, 06 Dec 2021 04:51 PM (IST)
कानपुर: चीनी उद्योग को स्वच्छ बनाने के लिए एनएसआइ में शुरू हुआ प्रशिक्षण, पर्यावरणीय मुद्दों पर दिया गया जोर
कानपुर: चीनी उद्योग को स्वच्छ बनाने के लिए एनएसआइ में शुरू हुआ प्रशिक्षण, पर्यावरणीय मुद्दों पर दिया गया जोर

कानपुर, जागरण संवाददाता। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के वैज्ञानिकों के लिए, आज राष्ट्रीय शर्करा संस्थान में पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुरोध पर यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है ताकि एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट के डिजाइन और संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं के बारे में प्रशिक्षण तथा ताजे पानी के उपयोग और एफ्लुएंट को कम करने की नई प्रौद्योगिकी की जानकारी प्रदान की जा सके। 

राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के निदेशक प्रो नरेंद्र मोहन ने बताया की यह कार्यक्रम विशेष रूप से चीनी उद्योग में पर्यावरणीय मुद्दों के समाधान के लिए डिजाइन किया गया है ताकि चीनी उद्योग को एक स्वच्छ उद्योग बनाया जा सके और गंगा जैसी पवित्र नदियों को दूषित करने वाले इस उद्योग के प्रदूषकों से बचा जा सके। उद्घाटन दिवस के दौरान, प्रतिभागियों को चीनी कारखानों में विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा विभिन्न प्रकार की चीनी का उत्पादन करने वाले कारखानों में इकाई संचालन और बिजली निर्यात सुविधाएं के बारे में संस्थान के प्रो वीपी सिंह और महेंद्र यादव ने जानकारी दी। पानी की कमी वाले क्षेत्रों और बंदरगाहों पर स्थित चीनी रिफाइनरियों के उदाहरणों का हवाला देते हुए ताजे पानी के उपयोग और एफ्लुएंट को कम करने के लिए विस्तार से बताया गया।

प्रतिभागियों को विभिन्न इकाई संचालन के दौरान, ताजे पानी की खपत और एफ्लुएंट के मापन के महत्व तथा सुधारात्मक उपाय करने के लिए एफ्लुएंट की गुणवत्ता के संबंध में ऑनलाइन डेटा दिए जाने के बारे में भी बताया गया। वीरेंद्र कुमार, वरिष्ठ उपकरण अभियंता ने कहा, चीनी उद्योग को उपकरणों के अंशांकन (कैलिब्रेशन) और अपशिष्टों के परीक्षण के विभिन्न मापदंडों जैसे बीओडी, सीओडी, टीएसएस, टीडीएस और पीएच के परीक्षण के लिए सुविधाएं बनाने की आवश्यकता है और  इसलिए एक पर्यावरण प्रकोष्ठ अनिवार्य रूप से बनाया जाना चाहिए।

चीनी कारखाने के एफ्लुएंट ट्रीटमेंट, ऐसे संयंत्रों का मानकीकरण, लागत-अर्थव्यवस्था और स्थिर संचालन के लिए बरती जाने वाली सावधानियां के लिए नवीनतम तकनीकों के बारे में प्रो स्वैन ने अपने व्याख्यान में बताया। उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग कारखाने में गन्ने की पेराई अलग-अलग हो सकती है, इस प्रकार एफ्लुएंट की मात्रा भी भिन्न हो सकती है, अत: एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट को डिजाइन करते समय इसका पर्याप्त प्रावधान किया जाना चाहिए।