साइबर अपराधियों के हौसले हो रहे बुंलद, इस साल 337 लोगों से पौने दो करोड़ ठगे

एक व्यापारी से तो लाख हड़पे पिछले वर्ष रुद्रा रीयल एस्टेट कंपनी के सर्वर पर मालवेयर भेजकर मांगी थी फिरौती एसपी क्राइम ने बताया कि फेसबुक वाट्सएप आदि से हुए अपराधों के मामलों में आइपी एड्रेस ट्रेस करने की कोशिश की जा रही

By Abhishek AgnihotriEdited By: Publish:Tue, 22 Sep 2020 01:15 PM (IST) Updated:Tue, 22 Sep 2020 01:15 PM (IST)
साइबर अपराधियों के हौसले हो रहे बुंलद, इस साल 337 लोगों से पौने दो करोड़ ठगे
साइबर ठग को दर्शाती हुई प्रतीकात्मक तस्वीर

कानपुर, जेएनएन। साइबर अपराधी प्रतिदिन लोगों की मेहनत की कमाई पर डाका डाल रहे हैं। इस वर्ष अब तक करीब 337 मामले सामने आ चुके हैं, इसमें ठगी की रकम का आंकड़ा करीब पौने दो करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। एक कपड़ा व्यापारी से तो गिफ्ट भेजने का झांसा देकर खाते में 70 लाख रुपये जमा करा लिए गए थे। इसी तरह पिछले वर्ष रीयल एस्टेट कंपनी के सर्वर पर मालवेयर भेजकर फिरौती मांगी गई थी।

गुरुवार को दिल्ली में सीबीआइ ने मालवेयर प्रोग्राम भेजकर इंटरनेट यूजर्स से वसूली करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की। इन कंपनियों के कर्मचारी लोगों के कंप्यूटर पर मालवेयर भेजकर उसे करप्ट करते थे और फिर ठीक करने के नाम पर रकम वसूलते थे। गिरोह अब तक दर्जनों लोगों को शिकार बना चुका था। ठीक इसी तरह कानपुर में सिविल लाइंस स्थित रुद्रा रीयल एस्टेट कंपनी के सर्वर पर मालवेयर भेजकर बिटक्वाइन में फिरौती मांगी गई थी। इसके लिए दो ईमेल आइडी भी दिए गए थे। साइबर सेल टीम ने जांच की तो पता लगा था कि यह ईमेल यूरोप के किसी देश से भेजी गई है। पुलिस साइबर हैकरों का आज तक पता नहीं लगा सकी। इसके बाद बिरहाना रोड स्थित तीन ज्वैलरी कारोबारियों को पत्र भेजकर बिटक्वाइन में फिरौती मांगने का मामला सामने आया था। गनीमत रही कि कंपनी के पास अपना डाटा अलग से सुरक्षित था। इसी वजह से अपराधी अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके।

एसपी क्राइम डॉ. सुरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि फेसबुक, वाट्सएप आदि से हुए अपराधों के मामलों में आइपी एड्रेस ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है। 70 लाख की ठगी मामले में एक आरोपित को दिल्ली पुलिस ने पकड़ा था। उससे पूछताछ के बाद अन्य साथियों की तलाश की जा रही है। आइआइटी निदेशक के नाम से फर्जी फेसबुक आइडी और राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के निदेशक के नाम से फर्जी जीमेल आइडी बनाकर उनके परिचितों से रकम मांगने वाले साइबर अपराधियों का पुलिस अब तक पता नहीं लगा सकी है। हाल ये है कि फेसबुक और जीमेल से भी पुलिस को आइपी (इंटरनेट प्रोटोकॉल) एड्रेस के बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है।

पुलिस को मिलेगा साइबर क्राइम से निपटने का मंत्र

साइबर अपराधों से निपटने के लिए पुलिस अधिकारी विवेचकों को साक्ष्य एकत्र करने के तरीके सिखाएंगे। 23 सितंबर को पुलिस लाइन में इसका प्रशिक्षण शुरू होगा। साइबर क्राइम थाना खुलने के बाद भी कई विवेचनाओं में टीम को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। एसपी पश्चिम डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण दो तरह का होगा। पहले चरण में पुलिस कर्मियों को साक्ष्य संकलन की जानकारी दी जाएगी, कई बार साक्ष्य संकलन में कमी का फायदा अपराधी उठाते हैं। दूसरे चरण में ठगों को पकडने के तौर तरीके की जानकारी दी जाएगी।  

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