Childrens Day 2019: पुलवामा हमले से उठी टीस तो 11वीं के छात्र ने बना डाला आर्मी डिफेंस रोबोट

कन्नौज, प्रशांत कुमार। बाल दिवस पर आइए ऐसी बाल प्रतिभा से मिलाते हैं, जिसकी उम्र भले कम है, मगर उपलब्धि बहुत बड़ी है। 11वीं के छात्र शनि विक्रांत ने देश की सेना को आधुनिक व तकनीकी तौर पर और सशक्त बनाने के लिए अनूठा प्रयोग किया है। शनि ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस तकनीक से ऐसा आर्मी डिफेंस रोबोट बनाया है जो सेना के जवानों को दुश्मनों से बचाएगा और दुश्मनों पर हमला भी करेगा। पुलवामा हमले में कई जवानों के शहीद होने की घटना के बाद शनि ने ऐसा रोबोट बनाने की ठानी थी जो एक निश्चित दूरी से दुश्मनों को धूल चटा सके और हमारे जवानों की रक्षा कर सके।

तिर्वागंज के मोहल्ला कालिका नगर के रहने वाले शनि विक्रांत सरस्वती विद्या मंदिर में पढ़ते हैं। उनके तैयार किए रोबोट की कई खूबियां है। इसमें बम डिफ्यूज करने के लिए रोबोटिक आर्म हैं। पीआइआर सेंसर व मोशन सेंसर लगे हैं जो 10-50 किमी तक दुश्मन की गतिविधियों को भांप सकते हैं। रडार, जीएसएम और जीपीएस सिस्टम है जो इतनी ही दूरी तक की लोकेशन ट्रैस कर कंट्रोल रूम को जानकारी देगा। रोबोट में लगे आइआर सेंसर (इंफ्रारेड) से घुसपैठ को रोकने में मदद मिलेगी। शनि के पिता कमलेश वर्मा वकील हैं जबकि मां गृहणी हैं। फतेहपुर व रायबरेली में हुए विज्ञान मेले में अपने रोबोट के प्रदर्शन पर शनि को प्रथम स्थान मिला था।

ये हैं खासियतें

रोबोट में एक बार 8 से 10 मिसाइल दागने की भी क्षमता है। 30 सेकेंड बाद फिर से मिसाइल लोड हो जाती हैं। दुश्मन पर नजर रखने के लिए कैमरा लगा है, जिसकी मदद से गतिविधियों को देखा जा सकेगा। एक गन भी लगी है, जो दुश्मनों पर गोलियां बरसाएगी। यह रोबोट बैट्री से चलता है। बैट्री खत्म होने पर सौर ऊर्जा से भी चलता है और बैट्री भी अपने आप चार्ज हो जाती है।

तीन माह में बना, 16,000 रुपये आई लागत

रोबोट की लंबाई 15 इंच और चौड़ाई 7.5 इंच है। शनि ने बताया कि इसे बनाने में तीन माह लगे। मार्च 2019 में बनाना शुरू किया था। कुछ सामान स्कूल की लैब से लिया। बाकी सामान उन्होंने बाजार से खरीदा। इस बनाने में करीब 16,000 रुपये की लागत आई है। रोबोट करीब 25 किमी तक का वजन उठा सकता है।

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