लीज पर ही SPV को मिलेगी Textile Park की भूमि, UPCIDA CEO के साथ बैठक करेंगे कंपनी के Director

वस्त्र मंत्रालय टेक्सटाइल पार्क के लिए स्पेशल परपज व्हीकल के तहत गठित कंपनियों को वित्तीय मदद दे रहा है। इसी कड़ी में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग ने बरेली और फर्रुखाबाद में पार्क की स्थापना का प्रस्ताव भेजा था। इसे सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है।

Akash DwivediWed, 16 Jun 2021 03:05 PM (IST)
पार्क के लिए केंद्र सरकार की ओर से 40 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद मिलेगी

कानपुर, जेएनएन। फर्रूखाबाद के सकवाई गांव में 34.11 एकड़ में प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क की राह की बाधाएं समाप्त हो गई हैं। इसी सप्ताह उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण प्रबंधन और स्पेशल परपज व्हीकल के तहत गठित फर्रूखाबाद टेक्सटाइल पार्क प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों की बैठक होगी। इसमें पार्क के विकास और अन्य मुद्दों पर चर्चा होगी। पार्क के लिए केंद्र सरकार की ओर से 40 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद मिलेगी।

वस्त्र मंत्रालय टेक्सटाइल पार्क के लिए स्पेशल परपज व्हीकल के तहत गठित कंपनियों को वित्तीय मदद दे रहा है। इसी कड़ी में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग ने बरेली और फर्रुखाबाद में पार्क की स्थापना का प्रस्ताव भेजा था। इसे सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है। इसी कड़ी में यूपीसीडा ने कंपनी के लिए फर्रूखाबाद में 34.11 एकड़ भूमि का पुनग्र्रहण कराया। इसके लिए राजस्व विभाग को जरूरी शुल्क दिए गए, लेकिन बाद में कंपनी के निदेशकों ने भूमि को फ्री होल्ड करने की मांग की, तभी से मामला अटका था।

अब सहमति बन गई और उद्यमी भी इस बात पर तैयार हैं कि वे प्राधिकरण को भूमि की कीमत तय शर्तों के अनुसार अदा करेंगे, फिर उनके नाम भूमि की जाएगी। कंपनी जिन उद्यमियों को औद्योगिक इकाई लगाने के लिए भूमि देगी उससे कंपनी के साथ ही प्राधिकरण का भी अनुबंध होगा। पहले उद्यमी त्रिपक्षीय लीज डीड पर भी सवाल खड़ा कर रहे थे, लेकिन अब वे तैयार हैं। कंपनी के एमडी रोहित गोयल का कहना है कि प्राधिकरण मुख्यालय में होने वाली बैठक में ही यह तय होगा कि लीज डीड को कैसे निष्पादित किया जाएगा। पार्क की स्थापना में कुल 104 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके लेआउट, मानचित्र की स्वीकृति समेत समस्त जरूरी प्रक्रिया प्राधिकरण से ही होंगी।

 इनका ये है कहना

पार्क की स्थापना के लिए वित्तीय मदद के लिए अब दोबारा वस्त्र मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा। चूंकि एक बार मंजूरी मिल चुकी है ऐसे में दोबारा मंजूरी मिलने में कोई बाधा नहीं आएगी। उद्यमियों और प्राधिकरण के सीईओ के साथ बैठक कराएंगे ताकि जरूरी प्रक्रिया पूरी हो सके।

                                                       - केपी वर्मा, संयुक्त आयुक्त हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग 

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