चित्रकूट में रामघाट से लेकर कामदगिरि तक पसरा सन्नाटा, अमावस्या में नहीं आए श्रद्धालु

यूपी एमपी की सीमा को सील कर मंदिरों के कपाट बंद हैं और चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा है

यूपी के चित्रकूट और एमपी के सतना जिला प्रशासन ने मंगलवार को पडऩे वाले वैशाखी अमावस्या मेला को कोरोना के कारण पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया था। वैसे मध्यप्रदेश में पहले से लॉकडाउन है और कामतानाथ प्रमुख द्वार मंदिर समेत सभी मंदिरों के पट बंद है।

Akash DwivediTue, 11 May 2021 04:05 PM (IST)

कानपुर, जेएनएन। कोरोना महामारी ने वैशाखी अमावस्या मेला में आने वाले श्रद्धालुओं के पैरों को बांध दिए हैं, जिससे प्रभु श्रीराम की तपोभूमि सूनी रही। श्रद्धालुओं के अमावस्या में नहीं आने से रामघाट से लेकर कामदगिरि परिक्रमा तक में सन्नाटा पसरा रहा। हालांकि प्रशासन को आशंका थी कि भगवान कामतानाथ में आस्था के कारण कुछ श्रद्धालु पहुंच सकते है। उनको रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। यूपी एमपी की सीमा को सील कर मंदिरों के कपाट बंद हैं और चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा है। 

यूपी के चित्रकूट और एमपी के सतना जिला प्रशासन ने मंगलवार को पडऩे वाले वैशाखी अमावस्या मेला को कोरोना के कारण पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया था। वैसे मध्यप्रदेश में पहले से लॉकडाउन है और कामतानाथ प्रमुख द्वार मंदिर समेत सभी मंदिरों के पट बंद है। फिर भी मेला को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किेए गए थे, जिसका असर भी दिखा। श्रद्धालु चित्रकूट नहीं पहुंचे। रामघाट का मंदाकिनी तट सूना रहा। एक भी बंदा नजर नहीं आया। कुछ ऐसा ही हाल कामदगिरि प्रमुख द्वार और परिक्रमा का भी रहा। एसडीएम मझगवां पीएस त्रिपाठी ने बताया कि सभी मंदिर आम लोगों के लिए बंद है। परिक्रमा पथ में बैरिकेडिंग है। लोगों से अपील है कि वह चित्रकूट न आएं। वैसे एमपी में लॉकडाउन के कारण वहां से कोई घरों से निकल नहीं पा रहा है। यूपी के जिलों से ही श्रद्धालु आ सकते हैं तो उनके लिए यूपी-एमपी सीमा को सील कर दिया गया है। चित्रकूट में किसी को प्रवेश की अनुमति नहीं है।

वहीं चित्रकूट जिला प्रशासन ने रामघाट, कामदगिरि परिक्रमा मार्ग, भरतकूप एवं अन्य स्थलों से पाबंदी को लागू करने के लिए अधिकारियों व पुलिस की ड्यूटी लगी है। डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने बताया कि जिले में दस से 17 मई तक की प्रात : सात बजे तक पूर्णतया कोरोना कफ्र्यू लागू है। चित्रकूट के प्रवेश द्वार भरतकूप, शिवरामपुर और बेड़ी पुलिया में बैरिकेडिंग कर पुलिस तैनात है। आने वाले श्रद्धालुओं को वहीं से वापस किया जा रहा है। कोरोना के बचाव के लिए लोग से अपील है कि घरों में ही रहें और वहीं से पूजा करें।

लोगों ने घरों में मनाई सत्तू हाई अमावस्या : वैशाख माह की अमावस्या को बुंदेलखंड में च्सत्तू हाई अमावस्याज् कहा जाता है। इस दिन लोग जौ चने से बने सत्तू को प्रसाद रूप भगवान में चढ़ा कर ग्रहण करते हैं। पौराणिक महत्व के कारण प्रतिवर्ष सत्तू की जबरदस्त डिमांड होती है। आने वाले श्रद्धालु परिक्रमा में ही सत्तू को प्रसाद रूप में खाते है, लेकिन इस बार लोगों ने घरों में इस परंपरा को मनाया। 

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