गमों का दौर भी आए तो मुस्करा के जियो.., शिवपाल ने क्यों गाया ये गाना, क्या है राजनीतिक निहितार्थ

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह ने एक समारोह में फिल्मी गीत गाया तो उसके राजनीतिक निहितार्थ निकाले जाने शुरू हो गए हैं। कहा जा रहा है कि फिल्मी गीत के बोल से प्रसपा प्रमुख का दर्द छलका है।

Abhishek AgnihotriSun, 31 Oct 2021 10:57 AM (IST)
प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने गीत गाया।

इटावा, जागरण संवाददाता। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह का दर्द शनिवार को फिल्मी गीत के बोल बनकर छलका। केके कालेज में सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती समारोह के एक दिन पहले आयोजित कार्यक्रम में वह बोले कि न सिर झुका के जियो, न मुंह छिपा के जियो, गमों का दौर भी आए तो मुस्करा के जियो। उनकी इस बात के राजनीतिक हलकों में अलग-अलग निहितार्थ निकाले जा रहे हैैं।

उन्होंने कहा कि सरदार पटेल की तरह अडिग होकर जीने की हर किसी को जरूरत है। सरदार पटेल कट्टरवाद के खिलाफ थे, वो देश का बंटवारा नहीं करना चाहते थे, बल्कि देश को एकजुट रखना चाहते थे। उन्होंने कहा कि यदि वह देश के प्रधानमंत्री होते तो देश की तस्वीर ही अलग होती। उन्होंने किसानों की वेदना बयान करते हुए कहा कि आज किसानों को खाद की जगह पुलिस की लाठियां मिल रही हैं।

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने दोहराया कि प्रसपा जिस दल के साथ होगी, उसी की यूपी में 2022 में सरकार बनेगी। यूपी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रसपा जल्द ही एक बड़े राष्ट्रीय दल से गठबंधन करेगी। इसका समय आ रहा है जबकि चुनाव में अभी पांच माह शेष हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह लक्ष्मण ने अपने भाई राम को आदर्श माना था, उसी तरह वह भी नेता जी को आदर्श मानकर आगे बढ़ रहे हैं। वह बोले कि सपा से गठबंधन पर अपनी बात रख चुके हैं, अब अखिलेश के जवाब में देरी दिख रही है।

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