जीका के बाद UP में स्क्रब टायफस की दस्तक, उन्नाव में मिला पहला केस, जानिए - फैलने का कारण और उपचार

Scrub Typhus first case in UP आइडीएसी के नोडल अधिकारी डा. वीके गुप्ता ने बताया कि यह एक वेक्टर जनित बीमारी है। यह समय के साथ सेंट्रल नर्वस सिस्टम कार्डियो वस्कुलर सिस्टम गुर्दे सांस से जुड़ी और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम को प्रभावित करता है।

Shaswat GuptaWed, 17 Nov 2021 08:06 PM (IST)
Scrub Typhus first case in UP : स्क्रब टायफस बीमारी की खबर से संबंधित प्रतीकात्मक फाेटो।

उन्नाव, जागरण संवाददाता। Scrub Typhus first case in UP कोरोना के बाद अब उन्नाव में संक्रामक बीमारियों का हमला तेज हो गया। जीका (Zika Virus) के बाद बुधवार को जिले के हसनगंज में स्क्रब टायफस (Scrub Typhus)ने भी दस्तक दे दी है। जीका और उसके बाद स्क्रब टायफस का जिले में पहला मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य महकमे में खलबली मची है। आइडीएसपी के नोडल अधिकारी डा. वीके गुप्ता ने बताया कि मरीज लखनऊ में भर्ती है। गुरुवार को गांव टीम भेज दवा आदि का छिड़काव कराया जाएगा। 

हसनगंज तहसील के गजफ्फर नगर निवासी युवक को कई दिनों से बुखार आ रहा था। स्वजन ने उसे लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती कराया। जहां कराई गई जांच में स्क्रब टायफस  (Scrub Typhus)होने की पुष्टि है। बुधवार शाम इसकी रिपोर्ट  सीएमओ उन्नाव को मिली। सीएमओ डा. सत्यप्रकाश ने बताया कि हसनगंज सीएचसी से टीम गांव भेजी गई है। 

स्क्रब टायफस वेक्टर जनित बीमारी: आइडीएसी के नोडल अधिकारी डा. वीके गुप्ता ने बताया कि यह एक वेक्टर जनित बीमारी है। यह समय के साथ सेंट्रल नर्वस सिस्टम, कार्डियो वस्कुलर सिस्टम, गुर्दे, सांस से जुड़ी और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम को प्रभावित करता है। कई मामलों में मल्टी आर्गन फेल्योर से रोगी की मौत भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि सामान्यत: यह बीमारी चूहों और झांड़ी आदि के कारण फैलती है।  

स्क्रब टायफस के लक्षण: आइडीएसपी के डा. रवि यादव ने बताया कि इसके प्रमुख लक्षण  बुखार और ठंड लगना, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द होता है। कुछ रोगियों में जोड़ों में दर्द भी होता है, जो चिकनगुनिया का भी लक्षण  होता है।

ये भी हैं लक्षण: 

इस बीमारी से संक्रमित 40-50 फीसदी लोगों में कीड़े के काटने का निशान दिखता है। इसका निशान गोल और ब्लैक मार्क होता है। आधे से अधिक लोगों में इसके निशान दिखते भी नहीं हैं। समय रहते इलाज न होने की स्थिति में यह बीमारी निमोनिया का रूप ले सकती है। इस संक्रमण में कुछ मरीजों में लिवर व किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती जिससे मरीज बेहोशी की हालत में चला जाता है। रोग गंभीर होने पर मरीज़ में प्लेटलेट्स की संख्या भी कम होने लगती है। 

ऐसे करें बचाव

स्क्रब टाइफस से बचाव के लिए अभी तक कोई टीका उपलब्ध नहीं है ऐसे में संक्रमित से दूरी बनाकर रहें। जंगलों और झाड़ वाले इलाकों में यह वायरस अधिक हो सकते हैं, ऐसी जगहों पर जाने से बचें। ऐसे कपड़े पहनें जिससे हाथ और पैर अच्छी तरीके से ढके रहें।  चूहों से बचाव करें। 

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