Scam in kanpur : शादी अनुदान व पारिवारिक लाभ योजना में अपात्रों ने खूब खाई मलाई, अब फंसी अधिकारियों की गर्दन

एडीएम आपूर्ति की अध्यक्षता वाली कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस घोटाले के लिए सत्यापन अधिकारी जिम्मेदार हैं। एसडीएम और तहसीलदार की जिम्मेदारी है कि वे शादी अनुदान पारिवारिक लाभ योजना व प्रमाण पत्र बनाने के लिए आने वाली रिपोर्ट की रेंडम जांच कराएं

Akash DwivediThu, 17 Jun 2021 07:37 AM (IST)
दोषियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने का आदेश देकर उनके नाम की सूची मांगी

कानपुर, जेएनएन। शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना के 1808 लाभाॢथयों के आय प्रमाण पत्रों को रद किया जाएगा। साथ ही इन अपात्रों में जो अनुसूचित जाति और पिछड़ी जाति के हैं, उनके जाति प्रमाण पत्र भी रद किए जाएंगे। इस पूरे मामले में जो भी दोषी लेखपाल और कानूनगो हैं, उनके विरुद्ध भी कार्रवाई होगी। एसडीएम व तहसीलदार कार्रवाई के दायरे में आएंगे या नहीं इसका फैसला डीएम आलोक तिवारी को करना है। फिलहाल उन्होंने एडीएम वित्त एवं राजस्व और एसडीएम सदर से दोषियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने का आदेश देकर उनके नाम की सूची मांगी है।

डीएम ने सदर तहसील में वित्तीय वर्ष 2019-20 और 2020-21 में और अन्य तहसीलों में 2020-21 में बांटे गए शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना की जांच कराई है। इस जांच में ही यह बात सामने आई है कि 1808 लाभार्थी ऐसे हैं जिनके नाम आय प्रमाण पत्र तो बना, पर वे मौके पर नहीं मिले। न ही उनके बारे में कोई जानकारी दे सका। इसमें पारिवारिक लाभ योजना के 1106 और शादी अनुदान के 702 लाभार्थी हैं। इन्हीं में अनुसूचित जाति और पिछड़ी जाति के भी लाभार्थी शामिल हैं। शादी अनुदान में 935 और पारिवारिक लाभ योजना में 1310 अपात्र अनुदान पाने में सफल हुए हैं। 5.80 करोड़ के घोटाले में अब इन अपात्रों पर क्या कार्रवाई होगी, यह डीएम को तय करना है। डीएम ने लेखपाल, कानूनगो के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश दिए हैं। साथ ही अगर कोई अपात्र गांव का होगा तो दोषी पंचायत सचिव के विरुद्ध कार्रवाई होगी।

प्रमाण पत्रों के फर्जीवाड़े से हुआ घोटाला : आय और जाति प्रमाण पत्रों को बनाने में ही लेखपालों ने पहले खेल किया। अगर प्रमाण पत्रों के आवेदन के समय जांच हो जाती तो पता फर्जी होने की तस्दीक हो जाती, लेकिन घर बैठे ही प्रमाण पत्र का सत्यापन किया गया। एडीएम आपूर्ति की अध्यक्षता वाली कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस घोटाले के लिए सत्यापन अधिकारी जिम्मेदार हैं। एसडीएम और तहसीलदार की जिम्मेदारी है कि वे शादी अनुदान, पारिवारिक लाभ योजना व प्रमाण पत्र बनाने के लिए आने वाली रिपोर्ट की रेंडम जांच कराएं, लेकिन सदर तहसील से नहीं कराई गई।

छह साल की बेटी को भी बना दिया पात्र : जूही लाल कालोनी निवासी रिचा की शादी के लिए अनुदान स्वीकृत किया गया है। जांच में पाया गया कि रिचा छह साल की है। ग्वालटोली की गुंजन सिंह की शादी के लिए अनुदान स्वीकृत किया गया। संबंधित पते पर पता चला कि गुंजन नाम की उस घर में कोई लड़की ही नहीं है। केशवपुरम के उमाशंकर की बेटी की शादी पांच साल पहले हो चुकी है, लेकिन दोबारा अनुदान स्वीकृत हुआ।

इनका ये है कहना

दोषियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश एडीएम वित्त व एसडीएम सदर को दिया है। उनसे दोषियों के नाम भी मांगे हैं। अनुदान देने वाले विभाग के कर्मचारी अगर दोषी होंगे तो उन पर भी कार्रवाई होगी। - आलोक तिवारी, डीएम

 

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