Religion Conversion Case: घर आते ही आदित्य ने डिलीट किया मां के मोबाइल का डाटा, बोला-डरता हूं तो बस अल्लाह से

बिठूर के मूक बधिर स्कूल में पढ़ने वाले आदित्य ने माना कि मुस्लिम धर्म के प्रति उसकी रुचि एक शिक्षक और दोस्त की वजह से बढ़ी। उसे दिल्ली भेजने के बाद केरल में फंडिंग देकर प्राइवेट नौकरी दिला दी गई थी।

Abhishek AgnihotriWed, 23 Jun 2021 12:05 PM (IST)
कानपुर से भी जुड़े हैं मतांतरण गिरोह के तार।

कानपुर, जेएनएन। नोएडा स्थित नेशनल डीफ सोसाइटी से मतांतरण का बड़ा मामला खुलने के बाद कानपुर के आदित्य का नाम सामने आया तो सभी सन्न रह गए। बिठूर के मूक-बधिर विद्यालय में पढ़ने वाला आदित्य कब अब्दुल कादिर बन गया किसी को पता ही नहीं चला। अब जब वह घर लौटा तो एटीएस ने उससे पूछताछ भी की है। उससे पूछताछ में एटीएस ज्यादा कुछ हासिल करने में नाकाम रही है लेकिन काफी कुछ पता भी लगाया है। घर लौटने पर आदित्य पूरी तरह मुस्लिम तहजीब और लिबाज में था और उसने सबसे पहले अपनी मां का मोबाइल फोन चोरी से लेकर सारा डाटा डिलीट कर दिया।

घर लौटने पर ऐसे थे आदित्य के हाव-भाव

आदित्य ने घर वापसी के बाद किसी से बात नहीं की थी। सोमवार शाम को उसने टीवी पर न्यूज देखी तो उसे पता चला कि एटीएस ने बड़ी कार्रवाई कर दी है। वापस लौटने पर वह पूरी तरह मुस्लिम तहजीब में था। कुर्ता पायजामा के अलावा चेहरे पर बड़ी-बड़ी दाढ़ी भी थी। हालांकि, स्वजन के अनुरोध पर उसने मंगलवार को दाढ़ी बनवा ली। उसने भी माना कि मुस्लिम धर्म के प्रति उसकी रुचि उसके स्कूल शिक्षक और दोस्त वासिफ की वजह से ही बढ़ी। उसने बताया कि वासिफ चमनगंज में स्थित एक नामी स्कूल में हर रविवार मोटिवेशन कैंप चलाता था। चोरी-छिपे कानपुर में मतांतरण के बाद सबसे पहले उसे दिल्ली उमर गौतम और जहांगीर के पास भेजा गया था। यहां से उन्होंने केरल भेजा था।

उसने बताया कि उमर और उनकी टीम लगातार उसके साथ जुड़ी हुई थी। फंडिंग करने के साथ ही उसे प्राइवेट नौकरी भी वहां पर दिला दी थी। 10 मार्च को घर से भागने के बाद वह दिल्ली में जहांगीर और उमर गौतम के पास रुका। इनमें एक वकील है। केरल में वह एक कारखाने में नौकरी करता था। हालांकि, मुस्लिम मत के प्रति उसका नजरिया अभी बदला नहीं है। बार-बार दोहराता है कि वह केवल अल्लाह से डरता है और किसी से उसे डर नहीं है।

घर आते ही मां के मोबाइल से डिलीट किया डाटा

आदित्य भले ही घर लौट आया है, लेकिन उसकी चाल ढाल अभी भी संदिग्ध है। रविवार की रात जब पूरा घर सो रहा था तो उसने चुपचाप मां का मोबाइल लिया और अपने से जुड़ा सारा डाटा डिलीट कर दिया। मां लक्ष्मी के मोबाइल पर आदित्य गुप्ता के कई चरमपंथी साथियों के मोबाइल नंबर उनकी फोटोग्राफ, वाट्सएप चैटिंग के स्क्रीन शाट व वीडियो थे।

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