छह वर्ष के बच्चे समेत 10 पर वैक्सीन का ट्रायल, वालंटियर में किसी प्रकार के साइड इफेक्ट की शिकायत नहीं

इसी तरह 12 से 18 वर्ष के पांच वालंटियर्स को भी वैक्सीन लगाई गई। उनमें से किसी भी वालंटियर में किसी प्रकार के साइड इफेक्ट की शिकायत नहीं मिली है। शहर के इस सेंटर में तीन दिन में 25 वालंटियर्स पर वैक्सीन का ट्रायल किया जा चुका है।

Akash DwivediFri, 11 Jun 2021 07:55 AM (IST)
50 वालेंटियर्स पर ट्रायल के तहत वैक्सीन की दो डोज लगाई जानी है

कानपुर, जेएनएन। शहर में बच्चों को कोरोना वायरस से बचाव के लिए स्वदेसी कोवैक्सीन का ट्रायल चल रहा है। गुरुवार को आर्य नगर स्थित एक अस्पताल में 6 से 12 उम्र वर्ग के पांच वालंटियर्स को वैक्सीन लगाई गई, उसमें सबसे कम उम्र का वालंटियर्स छह वर्ष का भी शामिल रहा। इसी तरह 12 से 18 वर्ष के पांच वालंटियर्स को भी वैक्सीन लगाई गई। उनमें से किसी भी वालंटियर में किसी प्रकार के साइड इफेक्ट की शिकायत नहीं मिली है। शहर के इस सेंटर में तीन दिन में 25 वालंटियर्स पर वैक्सीन का ट्रायल किया जा चुका है।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) और हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक इंटरनेशन ने मिलकर बच्चों के लिए स्वदेसी कोवैक्सीन तैयार की है। पहले चरण का ट्रायल लैब में करने के बाद दूसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल बच्चों पर करने की अनुमति ड्रग कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया (डीजीसीआइ) से लेने के बाद ट्रायल शुरू किया है। देश भर में छह स्थानों पर ट्रायल चल रहा है, जिसमें उत्तर प्रदेश के कानपुर के आर्यनगर स्थित प्रखर हास्पिटल समेत एम्स दिल्ली, पीजीआइ रोहतक, एम्स पटना, निजाम इंस्टीट््यूट हैदराबाद और चेन्नई है। इन सेंटर पर 450 वालेंटियर्स पर ट्रायल के तहत वैक्सीन की दो डोज लगाई जानी है।

दो समूह के लिए गए बच्चे : इसमें 6 से 12 वर्ष और 12 से 18 वर्ष के बच्चों को लिया गया है। इन पर पहले और 28 दिन के अंतराल पर वैक्सीन लगाई जाएगी। वैक्सीन लगाने से पहले और 28 दिन बाद दूसरी डोज लगाने से पहले उनके खून का नमूना एंटीबाडी जांच के लिए लेंगे। वैक्सीन लगाने से पहले आरटीपीसीआर जांच भी कराई जाएगी। उसका डाटा आइसीएमआर को भेजा जाएगा।

2 से 6 वर्ष के बच्चों का ट्रायल अभी नहीं : प्रखर हॉस्पिटल के चीफ गाइड प्रो. जेएस कुशवाहा का कहना है कि 2 से 6 वर्ष के बच्चों पर भी वैक्सीन का ट्रायल होना है। इसके लिए आइसीएमआर से अभी कोई दिशा-निर्देश नहीं मिला है। छोटे बच्चों पर ट्रायल पहले बड़ी संस्थानों में किया जाएगा। उसके बाद ही यहां 2 से 6 वर्ष की उम्र के बच्चों को बतौर वालंटियर्स ट्रायल में शामिल किया जाएगा।

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