Ramadan 2021 Kanpur: जानबूझ कर रोजा छोड़ने वाला होगा गुनाहगार, बीमारी और सफर में है छूट

रमजान माह मे रोजे को लेकर जानकारी दी।

रमजान माह में रोजेदारों के मन में कई तरह के सवाल उठते हैं। मौलाना तहसीन रजा कादरी ने कहा है कि रोजा दूसरों की मदद करने का जज्बा पैदा करता है। रमजान माह के रोजे की खास अहमियत होती है।

Abhishek AgnihotriMon, 19 Apr 2021 12:52 PM (IST)

कानपुर, जेएनएन। मौलाना तहसीन रजा कादरी ने कहा है कि रमजान के रोजे फर्ज किए गए हैं। रमजान के रोजे की बहुत अहमियत है। जानबूझ कर रोजा छोडऩे वाला गुनाहगार होगा। अगर कोई शख्स बीमार है, अथवा सफर में हैं तो उसके लिए रोजे में छूट दी गई है लेकिन बाद में उसे रोजा रखना होगा।

उन्होंने बताया कि जैसे जुमा सभी दिनों का सरदार है, वैसे ही रमजान सभी महीनों का सरदार है। रमजान की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस महीने कुरआन शरीफ नाजिल किया गया। रमजान को कुरआन का महीना बी कहते हैं। रमजान में ज्यादा से ज्यादा कुरआन शरीफ की तिलावत करनी चाहिए। कुरआन शरीफ को समझ कर पढऩा चाहिए। कुरआन शरीफ पढऩे के साथ उसका तर्जुमा भी पढ़ें। इससे कुरआन शरीफ में दिए अल्लाह के हुक्म को जान सकेंगे।

उन्होंने कहा कि रमजान में जो लोग किसी वजह से रोजा नहीं रख पा रहे हैं, वे खुलेआम कुछ खाने-पीने से परहेज करें,रोजेदार के सामने तो बिलकुल भी कुछ न खाएं। उन्होंने कहा कि रोजा रखने से दूसरों की मदद का जज्बा पैदा होता है। जब हम सारा दिन भूखे प्यासे रहते हैं तो उन लोगों की भूख प्यास का भी एहसास होता है जिनको खाने-पीने को कुछ नहीं मिल पाता है। इस तरह हम उनकी मदद को आगे आते हैं। उन्होंने कहा कि रोजा सिर्फ दिनभर भूखे प्यासे रहने का नाम नहीं है बल्कि अपने आप को हर बुराई से बचाना है।

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