फर्जी प्रमाण पत्र से नौकरी पाने वाले डाक सहायक को सात साल की कैद, 29 साल से कर रहा था सर्विस

फर्जी प्रमाण पत्र में नौकरी पाने वाले को सात साल की सजा।

फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र के आधार पर डाक विभाग में नौकरी हासिल करने वाले फतेहगढ़ प्रधान डाकघर में तैनात डाक अधीक्षक को सीजेएम ने सात साल कैद की सजा सुनाई। उन पर जुर्माना भी लगाया गया। उसने 29 वर्ष पहले फर्जी दस्तावेज के आधार नौकरी पाई थी।

Sarash BajpaiThu, 25 Feb 2021 07:19 PM (IST)

कानपुर, जेएनएन। फर्रुखाबाद में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर डाक विभाग में डाक सहायक की नौकरी पाने के मामले में सीजेएम ने अभियुक्त को सात वर्ष की सजा सुनाई है। छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर अभियुक्त को तीन माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

फतेहगढ़ प्रधान डाकघर में तैनात डाक अधीक्षक आरएस दोहरे ने 27 दिसंबर 1992 को औरैया के थाना फंफूद के गांव पुरवा उदई निवासी गंगा प्रसाद के खिलाफ फतेहगढ़ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें कहा था कि वर्ष 1991 में विभाग में रिक्त पदों पर भर्ती की गई। गंगा प्रसाद ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से जारी शैक्षिक प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए। प्रमाण पत्रों के आधार पर उसकी नियुक्ति कर प्रशिक्षण के लिए भेजा गया।

प्रशिक्षण के दौरान ही 29 अक्टूबर 1992 को विभाग ने प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया। 27 दिसंबर 1992 को विश्वविद्यालय से पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें कहा गया कि उनकी संस्था से गंगा प्रसाद के नाम पर कोई शैक्षिक प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। आरोपित द्वारा लगाए गए सभी प्रमाण पत्र कूटरचित हैं। विवेचक ने आरोपित के खिलाफ न्यायालय में  आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद से मुकदमे की सुनवाई सीजेएम कोर्ट में चल रही थी। गुरुवार को सुनवाई के दौरान अभियोजन अधिकारी लक्ष्मी राज सिंह व बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद सीजेएम राजेंद्र कुमार सिंह ने कूटरचित प्रमाण पत्र तैयार करने में सात वर्ष की कैद व दो हजार रुपये जुर्माना, योजना बनाने में पांच वर्ष की कैद व दो हजार रुपये का जुर्माना, धोखाधड़ी करने के आरोप में पांच वर्ष कैद व दो हजार रुपये जुर्माना लगाया।  

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