Pollution Report Kanpur : तेज बारिश में धुल गया कानपुर का प्रदूषण, वायु गुणवत्ता सूचकांक रहा बेहतर

नवरात्र मेला रामलीला दशहरे के दौरान पीएम 2.5 पीएम 10 नाइट्रोजन डाईआक्साइड सल्फर डाईआक्साइड कार्बन डाईआक्साइड समेत अन्य गैसों का स्तर मानक से कई गुणा ज्यादा मिली थी। वाहनों की आवाजाही और सड़क किनारे उड़ती धूल ने अतिसूक्ष्म तत्वों का घनत्व बढ़ाकर रख दिया।

Shaswat GuptaTue, 19 Oct 2021 10:49 AM (IST)
कानपुर में प्रदूषण की खबर से संबंधित प्रतीकात्मक फोटो

कानपुर, जेएनएन। शहर में पिछले कुछ दिनों से बिगड़ी शहर की हवा बेहतर हो गई है। दो दिन से हो रही बारिश ने वायु प्रदूषण के खतरे को धो डाला है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नेहरू नगर, किदवई नगर, आइआइटी और एनएसआइ के मानीटरिंग स्टेशनों की रिपोर्ट ने वायु गुणवत्ता बेहतर होने की पुष्टि की है। यह स्थिति वर्षा होने तक अच्छी रहेगी।

नवरात्र मेला, रामलीला, दशहरे के दौरान पीएम 2.5, पीएम 10, नाइट्रोजन डाईआक्साइड, सल्फर डाईआक्साइड, कार्बन डाईआक्साइड समेत अन्य गैसों का स्तर मानक से कई गुणा ज्यादा मिली थी। वाहनों की आवाजाही और सड़क किनारे उड़ती धूल ने अतिसूक्ष्म तत्वों का घनत्व बढ़ाकर रख दिया। दशानन के पुतलों के दहन ने वायु गुणवत्ता सूचकांक को बिगाड़ दिया। हवा में प्रदूषण का स्तर मानक से दो से तीन गुणा अधिक हो गया। अमूमन यह हालात नवंबर में होत हैं, लेकिन इस बार तेजी से बढ़ते वायु प्रदूषण ने चिंता के हालात पैदा कर दिए। बच्चे, बुजुर्ग, दमा के रोगी, टीबी के मरीजों के लिए हवा नुकसान पहुंचा सकती थी। चक्रवाती तूफान जवाद की वजह से दो दिन से बारिश हुई, जिसने वातावरण को बेहतर कर दिया।

मानीटरिंग स्टेशनों की रिपोर्ट: 

कारक       किदवई नगर    आइआइटी    एनएसआइ    नेहरू नगर

पीएम 2.5      13                44            15            34

पीएम 10        14                --             13            42

एनओटू           13               --              09             --

एसओटू          16                --              11            08

(पीएम 2.5 का मानक 60, पीएम 10 का 100, एनओटू, एसओटू का मानक 60 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर है।)

धूल व गर्द सबसे बड़ी वजह: शहर में प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह धूल और गर्द का गुबार है। कई प्रमुख सड़कें और गलियां खस्ताहाल हैं, जिन पर वाहनों की आवाजाही से धूल उड़ती है। काफी संख्या में खटारा वाहन फर्राटा भर रहे हैं। इनके इंजन से काला और दूषित हवा वातावरण को जहरीला बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ती है। आइआइटी कानपुर के विशेषज्ञ शहर के वायु प्रदूषण का लगातार आकलन कर रहे हैं।

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