कानपुर में घुसते ही पुलिस ने भीम आर्मी चीफ को रोका,धरने पर बैठे कार्यकर्ता

पुलिस के रोकने पर धरने पर बैठे भीम आर्मी के लोग।

कानपुर में भर्ती उन्नाव कांड की पीड़िता से मिलने जा रहे भीम आर्मी के लोगों को पुलिस ने कानपुर में प्रवेश करने से पहले ही रोक किया। पुलिस की इस कार्रवाई से नाराज भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर धरने पर बैठ गए।

Sarash BajpaiMon, 22 Feb 2021 07:53 PM (IST)

कानपुर, जेएनएन। शहर के रीजेंसी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जंग लड़ रही असोहा कांड की पीड़िता से मिलने सोमवार को भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर भी कानपुर पहुंचे, हालांकि पुलिस ने उन्हेंं गंगा बैराज पर ही रोक लिया। इस दौरान भीम आर्मी समर्थकों ने बैराज पर जमकर हंगामा किया। देर शाम तक हंगामा जारी था और विरोध में समर्थकों के साथ भीम आर्मी प्रमुख धरने पर बैठे थे।

असोहा कांड की पीड़िता से मिलने के लिए भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर का सोमवार की सुबह अस्पताल पहुंचने का कार्यक्रम था, मगर वह दोपहर बाद करीब सवा चार बजे कानपुर पहुुंचे। भीम आर्मी चीफ के आने की सूचना लगने पर पुलिस ने उन्नाव से आने वाले सभी रास्तों पर पुलिस बल तैनात कर दिया था। साथ ही समर्थक भी स्वागत के लिए जुटे थे।

जैसे ही चंद्रशेखर की कार गंगा बैराज पर पहुंची पुलिस ने उन्हेंं रोक लिया। कार रोके जाने को लेकर समर्थकों की एसपी पश्चिम डॉ. अनिल कुमार के साथ तीखी नोकझोंक भी हुई। वहीं पार्टी मुखिया के इंतजार में भीम आर्मी के समर्थक रीजेंसी अस्पताल पर पहले से मौजूद थे। जैसे ही उन्हेंं जानकारी मिली कि पुलिस ने उन्हेंं गंगा बैराज पर ही रोक लिया, सभी ने बैराज की ओर कूच कर दिया। इसके बाद गंगा बैराज पर भीम आर्मी समर्थकों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। नोकझोंक के बाद भी जब उन्हेंं आगे जाने की अनुमति नहीं मिली तो चंद्रशेखर अपने समर्थकों के साथ बैराज पर ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि जब तक कि पुलिस उन्हेंं पीड़ित किशोरी से मिलने की अनुमति नहीं देगी, वह यहां से नहीं हटेंगे। वहीं एसपी पश्चिम डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि उच्चाधिकारियों का आदेश नहीं है। अस्पताल में भीड़ बढऩे नहीं दी जाएगी।

पुलिस के पर्दाफाश पर उठाए सवाल, किशोरी को एम्स भेजने की मांग

भीम आर्मी प्रमुख ने मीडिया से बातचीत में असोहा कांड के पर्दाफाश पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वह पर्दाफाश के तथ्यों से संतुष्ट नहीं हैं। हत्याकांड में कुछ और लोग भी शामिल थे, जिन्हेंं बचाया जा रहा है। सवाल किया कि क्या जीवित बच गई किशोरी का सरकारी अस्पताल में इलाज नहीं हो सकता। क्या सरकारी अस्पताल सही नहीं है। मांग करते हैं कि बेटी को इजाल के लिए एम्स ले जाया जाए। वह किशोरी के बयान के बाद ही पुलिस के पर्दाफाश को सही मानेंगे। 

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