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कानपुर में प्ली बारगेनिंग से कम होंगे अदालतों में मुकदमे, इसका प्रयोग किए जाने से जेल में कम होगी बंदियों की संख्या

मुकदमों को भी कम करेगी और जेलों में बढ़ रहे बंदियों की संख्या भी घटाएगी

इसमें प्रविधान है कि यदि किसी ने पहली बार कोई अपराध किया है और वह प्ली बारगेनिंग के तहत पीडि़त के साथ बातचीत कर सुलह समझौता करना चाहता है तो उसे इसका अवसर दिया जाएगा। समझौता होने पर आरोप पत्र दाखिल होने पर भी उसे सजा नहीं होगी।

Akash DwivediSun, 16 May 2021 09:15 AM (IST)

कानपुर (आलोक शर्मा)। अदालतें मुकदमों के बोझ से पहले ही दबी थीं। कोविड के चलते एक साल में इनकी संख्या और बढ़ गई है। जेलों में बंदी भी बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कानून में दिए प्रविधान प्ली बारगेङ्क्षनग को अमल में लाया जाए। यह वह व्यवस्था है जो मुकदमों को भी कम करेगी और जेलों में बढ़ रहे बंदियों की संख्या भी घटाएगी।

क्या है प्ली बारगेनिंग : दंड प्रक्रिया संहिता में आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम 2005 के तहत धारा 265 में ए से आइ तक जोड़ी गई थी। इसमें प्रविधान है कि यदि किसी ने पहली बार कोई अपराध किया है और वह प्ली बारगेनिंग के तहत पीडि़त के साथ बातचीत कर सुलह समझौता करना चाहता है तो उसे इसका अवसर दिया जाएगा। समझौता होने पर आरोप पत्र दाखिल होने पर भी उसे सजा नहीं होगी। न्यायालय प्रोबेशन का लाभ देकर तत्काल रिहा कर देगा।

इस तरह ले सकते सुविधा : प्ली बारगेनिंग का लाभ लेने के लिए आरोपित को न्यायालय में शपथपत्र के साथ प्रार्थना पत्र देना होता है। इसके बाद न्यायालय अभियोजन, वादी और परिवादी को नोटिस जारी करेगा। सभी की सहमति होने पर कोर्ट मुकदमे का सम्मानजनक समाधान निकालने का निर्देश देगा, जिसके बाद आपसी सहमति से तय क्षतिपूर्ति राशि से ज्यादा की धनराशि का दंड नहीं दिया जा सकेगा। अभियुक्त को प्रोबेशन का लाभ मिलेगा। पूरी प्रक्रिया में अभियुक्त, अभियोजन, परिवादी, वादी अथवा पीडि़त की संयुक्त बैठक में बनी आपसी सहमति को पूरी तवज्जो दी जाएगी।

इन मामलों में हो सकेगी प्ली बारगेनिंग : प्ली बारगेनिंग का लाभ सात वर्ष से कम सजा वाले सभी मुकदमों में मिलता है। कुछ प्रमुख व प्रचलित आपराधिक धाराओं का उल्लेख हम नीचे कर रहे हैं।

-138 चेक बाउंस -380 चोरी 323 मारपीट 342 किसी को सदोष बंधक बनाना 354 छेड़खानी 504 जान से मारने की धमकी 324 धारदार हथियार से मारना 171 घूस लेना (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम नहीं लगा है तो समझौता हो जाएगा) 153 समुदाय के बीच वैमनस्यता फैलाना 181 सरकारी कर्मचारी को गलत हलफनामा देना 182 फर्जी रिपोर्ट दर्ज कराना 186 लोक सेवक के काम में बाधा डालना 1.75 लाख मुकदमे लंबित हैं 50 हजार अपराधिक मामलों के केस 20 हजार मामले सात वर्ष से कम सजा वाले

इनका ये है कहना

प्ली बारगेनिंग सफल नहीं हुई तो पूर्व की तरह मुकदमा चलता रहेगा। गुण दोष के आधार पर ही आरोपित को दोषी माना जाएगा। प्ली बारगेनिंग के तहत स्वीकृत किए गए अपराध के तथ्यों को उसके खिलाफ नहीं पढ़ा जाएगा।

                                                                                  कौशल किशोर शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता

अधिकतर लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। लोगों को लगता है कि अपराध स्वीकार कर लेंगे तो सजायाफ्ता हो जाएंगे, जबकि ऐसा नहीं है। समझौता जिन बिंदुओं पर होगा, अदालत उसी पर निर्णय देगी।

                                                                                      सुरेश सिंह चौहान, वरिष्ठ अधिवक्ता  

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