कानपुर के इस गांव में प्रधान के संकल्प से स्वावलंबन की ओर अग्रसर हुईं बेटियां, पंचायत में बही विकास की बयार

ग्राम पंचायत में बना स्कूल और सामुदायिक इज्जतघर।

ग्राम प्रधान मंजू सिंह ने गांव को पहुंचाया शिखर पर। स्नातक डिग्री धारक मंजू सिंह जब प्रधान बनीं तो उन्होंने स्कूलों में साफ- सफाई व शैक्षिक गुणवत्ता को पटरी पर लाने का काम शुरू किया। गांव में अधिकतर बेटियां स्कूल नहीं जातीं थीं।

Shaswat GuptaMon, 22 Feb 2021 08:40 AM (IST)

कानपुर, जेएनएन। सरसौल ब्लाक की शीशूपुर ग्राम पंचायत में गांव की शिक्षित बहू व प्रधान मंजू सिंह ने जब बेटियों को अशिक्षा के अंधियारे में उनकी जिंदगी को जकड़ते हुए देखा तो उन्होंने संकल्प लिया कि वह इन्हें शिक्षित कर स्वावलंबी बनाएंगी। मुखिया बनने के बाद उन्होंने गांव के परिषदीय स्कूलों की बदहाल तस्वीर को दुरुस्त कर बालिकाओं को शिक्षा के लिए प्रेरित किया। शिक्षा संग गांव में स्वच्छता की अलख जगाई। साथ ही नाली, खड़ंजा ,पंचायत भवन व सामुदायिक शौचालय आदि से ग्राम सभा को संतृप्त करवाया। उनके दृढ़ निश्चय की सराहना करते हुए 2017 -18 में मुख्यमंत्री ने उन्हें पुरस्कृत किया।

बताया कैसे जलाई स्वावलंबन की अलख 

 सरसौल ब्लाक की शीशूपुर ग्राम पंचायत से लगने वाले गांव फतेहपुर की सीमा से जुड़े हैं। स्नातक डिग्री धारक मंजू सिंह जब प्रधान बनीं तो उन्होंने स्कूलों में साफ- सफाई व शैक्षिक गुणवत्ता को पटरी पर लाने का काम शुरू किया। मंजू सिंह बतातीं हैं कि गांव में अधिकतर बेटियां स्कूल नहीं जातीं थीं। प्रधान बनने के बाद अभिभावकों को जागरूक किया और लड़कियों को भी स्कूल की राह दिखाई। आज पूरी ग्राम पंचायत में लगभग हर घर की बेटियां शिक्षा के उजाले से स्वावलंबन की राह पर चल पड़ीं हैं। 

मंजू सिंह ने बताया कि ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति भी जागरूक किया। ग्राम पंचायत ने भी गांव के विकास को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया। 123 ईंटों से नए खड़ंजे बनवाए गए। पुरानों की मरम्मत कराई गई। पक्की नालियां बनीं। जर्जर पंचायत भवन का सौंदर्यीकरण किया गया। सामुदायिक के साथ निजी शौचालय बनवाए गए। प्रधान मंजू सिंह ने लगभग 25 लाख रुपये ग्राम पंचायत से खर्च किए। सांसद व ब्लाक प्रमुख निधि से 20 लाख रुपये विकास पर खर्च किए गए। पानी की टंकी निर्माणाधीन है। शीशूपुर में पक्का नाला व हृदयखेड़ा में सीसी रोड बन गई है।  मंजू ङ्क्षसह ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा सम्मान मिलने के बाद विकास के लिए तीन लाख रुपये मिले थे। उस राशि को भी पंचायत भवन को संवारने पर खर्च किया गया है।

एक नजर में जानिए गावं की स्थिति 

कुल आबादी - 10,000 मजरा - मिश्रीखेड़ा व हृदयखेड़ा परिषदीय स्कूल - 5 विधवा,दिव्यांग ,वृद्धा पेंशन - 400 पंचायत भवन - 2 स्वास्थ्य उपकेन्द्र - 1 जॉब कार्डधारक - 120 सक्रिय व्यक्तिगत शौचालय - 300 सार्वजनिक शौचालय - 1 ग्राम पंचायत से खर्च - 25 लाख लगभग - जनप्रतिनिधियों द्वारा खर्च - 20 लाख

इनका ये है कहना 

पहले जर्जर पंचायत भवन में शादी समारोह आदि करने में ग्रामीणों को दिक्कतें होतीं थीं। अब गांव का पंचायत भवन शहर के गेस्टहाउस जैसा हो गया है।  टाइल्स, रंगाई-पुताई आदि ने पंचायत भवन को शानदार बना दिया है। हमें भी गर्व का अनुभव होता है।   - अनिल सिंह पहले गांव की बालिकाएं स्कूलों में नहीं जातीं थीं। चूल्हा - चौका व खेतों का काम करने को ही उन्हें कहा जाता था, लेकिन महिला प्रधान मंजू ङ्क्षसह ने घरों में लोगों से बात कर शिक्षा के लिए प्रेरित किया। अब हर घर से बालिकाएं स्कूल जाती हैं।   - शिवचरन नाली - खड़ंजे बनने से जलभराव की समस्या से निजात मिली है। गांव में साफ सफाई रहती है। स्वच्छता के प्रति विशेष ध्यान दिया गया है। लोग खुले में शौच से मुक्त हैं। हर घर में शौचालय है। बहू- बेटियां सम्मान के साथ रह रहीं हैं। - मोना परिषदीय स्कूलों की बदहाली दूर हुई। खस्ताहाल इमारतें अब चमक रहीं हैं। स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता पर जोर है। अध्यापकों से बात कर प्रधान अभिभावकों से भी मिलतीं हैं। वह कहतीं हैैं कि अच्छी शिक्षा से बच्चे अपने गांव,घर का नाम रोशन करेंगे।   - राकेश सिंह

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