बदहाली की जमीन पर औद्योगिक क्रांति की उम्मीद

जागरण संवाददाता, कानपुर : कभी 'मैनचेस्टर ऑफ ईस्ट' कहा जाने वाला कानपुर अब औद्योगिक विकास को लेकर जद्दोजहद कर रहा है। ऐसा नहीं कि उद्यमी यहां उद्योग नहीं लगाना चाहते, मगर बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर न होने से वह अपने कदम पीछे खींच रहे हैं। जिले में आठ औद्योगिक क्षेत्र हैं। इनमें पांच की स्थापना यूपीएसआइडीसी (अब यूपीसीडा) ने की है, जबकि दो उद्योग विभाग और एक कोऑपरेटिव सेक्टर द्वारा स्थापित है। इन औद्योगिक क्षेत्रों में लघु और मध्यम तथा बड़ी औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। यूपीएसआइडीसी के औद्योगिक क्षेत्रों में अभी बड़े पैमाने पर इकाइयां लग सकती हैं, लेकिन उद्यमी उद्योग लगाएं भी तो कैसे, जब वहां न तो सुविधाएं हैं और न ही भविष्य में मिलने की उम्मीद दिख रही है। पनकी, दादानगर, जैनपुर, रनिया, रूमा औद्योगिक क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्गो से जुड़े हुए हैं। चकेरी औद्योगिक क्षेत्र की दूरी भी प्रयागराज हाईवे से बमुश्किल पांच किमी. है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर न होने की बात को अफसर समझते भी हैं, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हो रही है जिससे वहां सुविधाएं बढ़ें और अधिक से अधिक औद्योगिक इकाइयां स्थापित हो सकें।

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रूमा में एक और ट्रीटमेंट प्लांट चाहिए

प्रयागराज हाईवे के किनारे स्थित रूमा औद्योगिक क्षेत्र में तीन दर्जन से अधिक प्लाट खाली पड़े हैं। यहां ज्यादातर टेक्सटाइल से जुड़ी इकाइयां हैं। अभी यहां एक ही ट्रीटमेंट प्लांट है। उद्यमियों को अक्सर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से प्रदूषण फैलाने के आरोप में नोटिस मिलती है। इकाई बंद करने के आदेश दिए जाते हैं। इससे उद्यमी परेशान हैं, लेकिन उनकी समस्या सुनने वाला कोई नहीं है। एक और ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना हो जाए तो कुछ राहत मिले।

टैक्स लेकर काम नहीं कर रहा नगर निगम

नगर निगम और यूपीएसआइडीसी रूमा औद्योगिक क्षेत्र में साथ-साथ टैक्स वसूल रहे हैं। दोहरी कर प्रणाली का मुद्दा उद्यमी कई बार उद्योग बंधु की बैठक में उठा चुके हैं, लेकिन फरियाद नहीं सुनी गई। यूपीएसआइडीसी मरम्मत शुल्क लेता है तो नगर निगम हाउस टैक्स। यूपीएसआइडीसी सड़कों की मरम्मत करा रहा है, लेकिन नगर निगम कोई काम नहीं कराता। दो दर्जन से अधिक आवंटियों को भूखंड पर कब्जा नहीं मिल पाया है क्योंकि किसान मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर अड़े हुए हैं।

लाइटें खराब, पेयजल आपूर्ति नहीं

यहां स्ट्रीट लाइटें खराब हैं तो पानी की टंकी ठूंठ बनी खड़ी है। कब पानी की आपूर्ति शुरू होगी तय नहीं। अब तो पाइप लाइन भी ध्वस्त हो गई है। उद्यमियों ने सबमर्सिबल लगा रखा है।

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चकेरी में एक-दो नहीं, बल्कि तमाम समस्याएं

चकेरी औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग लग जाएं तो बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार मिलेगा। मगर, निकट भविष्य में ऐसा होते नजर नहीं आता। यहां सिर्फ दो दर्जन फैक्ट्री चल रही हैं। टूटी सड़कें सालों से दर्द दे रहीं तो टंकी से पानी भी नहीं मिल रहा। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला कचरा या पानी आसपास खाली पड़े प्लाटों में भरा रहता है, जो भूगर्भ जल को दूषित कर रहा है। बड़े-बड़े बबूल के पेड़ उगे हुए हैं। सुरक्षा का भी प्रबंध नहीं है, जबकि औद्योगिक क्षेत्र के आसपास पुलिस चौकी बहुत ही जरूरी है।

रेलवे क्रासिंग पर कई बार लगता जाम

चकेरी क्रासिंग पर फ्लाईओवर न होने की वजह से रोज दो सौ से अधिक बार रेलवे क्रासिंग का फाटक बंद होता है। ऐसे में जाम की स्थिति बनती है। इस वजह से भी उद्यमी इकाई स्थापना से कतरा रहे हैं। फ्लाईओवर बन जाए और सुविधाएं विकसित हो जाएं तो यहां उद्योग फलने फूलने लगेंगे। उद्यमी कई बार मांग कर चुके हैं पर कोई नहीं सुन रहा है।

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रनिया और जैनपुर में सीवर भराव से जूझते उद्यमी

कानपुर देहात जिले में स्थित जैनपुर औद्योगिक क्षेत्र के ग्रोथ सेंटर में कोई भी ऐसी सड़क नहीं है जो टूटी न हो। सीवर लाइन नहीं होने के चलते गंदा पानी भरा रहता है। बरसात के दिनों में हालात और बिगड़ जाते हैं। रनिया औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है, यहां भी जल निकासी की समस्या है। दोनों क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटें नहीं जलतीं, अंधेरे में लोगों को आवागमन करना पड़ता है। हाईवे किनारे होने के कारण यहां के उद्यमी आसानी से कश्मीर से कन्याकुमारी तक माल भेज लेते हैं। अगर सुविधाएं मिलें तो यहां और उद्योग स्थापित हो सकेंगे।

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पनकी औद्योगिक क्षेत्र में टूटी सड़कें दे रहीं दर्द

पनकी, दादानगर और फजलगंज औद्योगिक क्षेत्र में भी अनगिनत समस्याएं हैं। फजलगंज में जहां अतिक्रमण से उद्यमी जूझ रहे हैं तो पनकी में टूटी सड़कें, उड़ती धूल और जल भराव की समस्या से परेशान हैं। सड़कों में बड़े बड़े गड्ढे हादसे का सबब बनते हैं। इन क्षेत्रों में आठ करोड़ रुपये से सड़क बनाने, स्ट्रीट लाइट लगाने व अन्य कार्य होने हैं। हालांकि यह राशि ऊंट के मुंह में जीरा ही है। उद्यमी पनकी में प्रदर्शनी हाल बनाने की मांग वर्षो से कर रहे हैं, लेकिन उनकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है।

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कहां कितने उद्योग लगे

औद्योगिक क्षेत्र इकाई

दादानगर 2000

पनकी 1270

जैनपुर 295

रूमा 250

चकेरी 22

रनिया 80

फजलगंज 108

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मिनी औद्योगिक क्षेत्रों में उड़ती धूल

ककवन (लोधनपुरवा) और घाटमपुर (रामसारी) में उद्योग विभाग के मिनी औद्योगिक क्षेत्र हैं। ककवन औद्योगिक क्षेत्र के बगल में बिल्हौर और रामसारी स्थित क्षेत्र से सटा पतारा औद्योगिक क्षेत्र है। ये चारों बदहाल हैं, यहां धूल उड़ रही है। न तो जल निकासी की व्यवस्था है और न ही अन्य सुविधा। मैदान में बच्चे क्रिकेट और गुल्ली डंडा खेलते नजर आते हैं। ये औद्योगिक क्षेत्र चरागाह बन गए हैं। अगर ये औद्योगिक क्षेत्र बस जाएं तो बेरोजगारों का पलायन रुक जाएगा।

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