पांच गुना तेजी से फैलता है ओमिक्रोन, जानिए- कानपुर में स्वास्थ्य महकमे की क्या हैं तैयारियां

कोरोना वायरस का नया वैरिएंट ओमिक्रोन का संक्रमण 39 देशों में फैल चुका है यह डेल्टा मुकाबले पांच गुना तेजी से फैलता है लेकिन उसकी तरह घातक नहीं है। कानपुर में पहले की दोनों लहरों से सबक लेते सुविधाएं और संसाधन बढ़ाए गए हैं।

Abhishek AgnihotriWed, 08 Dec 2021 12:49 PM (IST)
ओमिक्रोन को लेकर अस्पतालों में पहले से तैयारियां कर ली गई हैं।

कानपुर, जागरण संवाददाता। कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रोन के मरीज भारत में भी मिले हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व के डेल्टा वैरिएंट के मुकाबले ओमिक्रोन पांच गुणा तेजी से संक्रमण फैलाता है। हालांकि राहत की बात है कि यह डेल्टा की तरह घातक नहीं है। उधर, कोरोना की पहली और दूसरी लहर की भयावह स्थिति अभी भी आमजन के जेहन में है, जिससे नए वैरिएंट की दस्तक के बाद से लोग डरे हुए हैं। हालांकि पहले के मुकाबले सुविधाएं और संसाधन बढ़े हैं। अगर अब पहले की तरह हालात पैदा होते हैं, तो भी निपटने के लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं। शहर से लेकर ग्रामीण अंचल के अस्पताल आक्सीजन को लेकर आत्मनिर्भर हो गए हैं। आइसीयू से लेकर वेंटीलेटर और आधुनिक उपकरण भी मुहैया हैं। कोरोना की जांच से लेकर पैथालाजिकल सुविधाएं भी हैं। जो कमियां थीं, उन्हें भी दूर करने पर तेजी से काम चल रहा है। ताकि बेडों की संख्या और बढ़ाई जा सके।

शहर में सात आक्सीजन प्लांट

-जीएसवीएम मेडिकल कालेज के लाला लाजपत राय अस्पताल (हैलट) में तीन आक्सीजन जनरेशन प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। उसमें से दो प्लांट से आक्सीजन की आपूर्ति शुरू है। तीसरे प्लांट की स्थापना हो चुकी है, जल्द ही शुरू हो जाएगा।

एलएलआर अस्पताल में एक और आक्सीजन जनरेशन प्लांट लगेगा। इसे अमेरिका से मंगाने की प्रक्रिया शुरू है। यह प्लांट जिले का सबसे अधिक क्षमता का होगा। यह एक मिनट में 1160 लीटर आक्सीजन जनरेट करेगा। इसे मेडिसिन विभाग के वार्ड की पीछे की तरफ स्थापित किया जना है।

-उर्सला अस्पताल में दो आक्सीजन प्लांट से इमरजेंसी और वार्ड में आक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है। वहीं, जिला महिला अस्पताल डफरिन और रामा देवी स्थित कांशीराम अस्पताल में भी आक्सीजन जनरेशन प्लांट से आक्सीजन मिल रही है।

-ग्रामीण अंचल में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भी आक्सीजन जनरेशन प्लांट लगाए जा चुके हैं। उनकी टेस्टिंग की जा चुकी है।

सीएचसी में बढ़ीं सुविधाएं : घाटमपुर-बिल्हौर सीएचसी में 50-50 बेड के कोविड हास्पिटल बनाए गए हैं, जहां पाइप लाइन से आक्सीजन आपूर्ति की व्यवस्था की गई है। साथ ही 10-10 आक्सीजन कंसन्ट्रेटर भी दिए गए हैं। दो बेड पर वेंटीलेटर की भी व्यवस्था है।

मरीजों की मानीटरिंग का पुख्ता सिस्टम

लेवल थ्री कोविड हास्पिटल में पिछले दो लहर के दौरान एलएलआर अस्पताल के कोविड आइसीयू में मानीटरिंग सिस्टम भी नहीं था। अब 200 मल्टी पैरा मानीटर मंगा लिए गए हैं, उसमें से 50 एडवांस मल्टीपैरा मानीटर हैं। इसके जरिए मरीजों के ब्लड प्रेशर, आक्सीजन-कार्बनडाइआक्साइड और अन्य पैरामीटर की मानीटरिंग की जा सकेगी। दिल की धड़कन तक का पता चलता रहेगा।

कोरोना वायरस के जांच की सुविधा

-जीएसवीएम मेडिकल कालेज में कोविड-19 लैब में आठ आरटीपीसीआर जांच के लिए मशीनें हैं। जहां 10 हजार रोजाना जांच की क्षमता है।

-हालांकि इस समय आउटसोर्सिंग के कर्मचारी हटा दिए गए हैं। इस समय रोजाना 2500 सैंपल की ही जांच हो रही है।

एलएलआर अस्पताल की स्थिति

600 बेड का कोविड अस्पताल, 250 बेड का कोविड-19 आइसीयू है तैयार।

100 बेड पीडिया कोविड अस्पताल (40 पीआइसीयू) और 212 वेंटीलेटर हैं।

200 मल्टी पैरा मानीटर, 100 इंफ्यूजन पंप, 100 सिङ्क्षरज पंप और 10 एनस्थीसिया वर्क स्टेशन।

04 पोर्टेबल डिजिटल एक्सरे, 03 पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीनें, 03 एबीजी मशीनें आइसीयू के लिए।

कांशीराम अस्पताल

120 बेड का कोविड अस्पताल, 20 बेड का आइसीयू, 20 बेड बच्चों के लिए। यहां 20 वेंटीलेटर भी हैं।

-लेवल-थ्री कोविड अस्पताल सुविधाएं और संसाधन के साथ पूरी तरह से तैयार है। आइसीयू में मरीजों की मानीटङ्क्षरग के लिए सेंट्रल मानीटरिंग सिस्टम लगाया गया है। कोविड संक्रमितों के आपरेशन से लेकर प्रोसिजर के लिए 10 वर्क स्टेशन मंगाए गए हैं, जिसमें कम से कम संक्रमित हुए मरीजों का इलाज किया जा सकेगा। -प्रो. आरके मौर्या, प्रमुख अधीक्षक, एलएलआर अस्पताल।

-कोविड कंट्रोल रूप से लेकर बेड के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। आक्सीजन की भी अब कमी नहीं है। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोन से निपटने के लिए हर संभव उपाय हैं। वैक्सीनेशन भी तेजी से हो रहा है। बस, आमजन को सावधानी बरतने की जरूरत है। -डा. जीके मिश्रा, अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कानपुर मंडल।

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