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युवाओं का योगदान पूरी करेगा मरीजों में खून की कमी, कानपुर में संस्थाएं कर रहीं अपील

कानपुर में रक्तदान शिविर से संबंधित प्रतीकात्मक तस्वीर।

डॉ. लुबना खान ने बताया कि खून की सर्वाधिक जरूरत थैलेसिमिया हीमियोफिलिया और गर्भवती महिलाओं के मामलों में पड़ती है। इन बीमारियों से पीड़ित बच्चों को महीने में कई बार खून की जरूरत पड़ती है। बच्चों में एक यूनिट और वयस्क में दो यूनिट खून की जरूरत होती है।

Shaswat GuptaFri, 07 May 2021 05:35 PM (IST)

कानपुर, जेएनएन। संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के बीच ऑक्सीजन और दवाओं की कमी से जूझ रहे शहरवासियों को जल्द ही खून की कमी से भी दो-चार हो पड़ सकता है। कोरोना काल में रक्तदान शिविर न लगने और लोगों के कम रक्तदान करने के कारण थैलेसिमिया, हीमियोफिलिया के मरीजों के साथ इमरजेंसी और गर्भवती महिलाओं को भटकना पड़ सकता है। लोगों को इस समस्या से न जूझना पड़े इसलिए डॉक्टरों द्वारा वैक्सीनेशन से पहले रक्तदान की अपील की जा रही है। इसमें युवा बढ़कर प्रतिभाग करेंगे तो शहर को होने वाली खून की कमी पूरी हो जाएगी।

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ट्रांसफ्यूजन विभााग की नोडल ऑफिसर डॉ. लुबना खान ने बताया कि कोरोना के समय रक्तदान शिविर के स्थगित और लोगों के कम से कम रक्तदान के कारण ब्लड बैंक में खून की कमी हो रही है। वैक्सीनेशन के बाद कुछ दिनों तक खून नहीं दे पाना और प्लाज्मा डोनेट भी इसकी एक वजह है। ऐसे में खून की कमी न पड़े इसलिए युवाओं को वैक्सीनेशन से पहले रक्तदान करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। पहले वैक्सीनेशन के बाद 28 दिन खून नहीं दे सकते हैं अब इसे घटाकर 14 दिन कर दिया गया। ताकि उनके द्वारा किए गए रक्तदान से मरीजों को जीवन का अभयदान मिल सके।

थैलेसिमिया, हीमियोफिलिया और गर्भवती महिलाओं के लिए संकट: डॉ. लुबना खान ने बताया कि खून की सर्वाधिक जरूरत थैलेसिमिया, हीमियोफिलिया और गर्भवती महिलाओं के मामलों में पड़ती है। इन बीमारियों से पीड़ित बच्चों को महीने में कई बार खून की जरूरत पड़ती है। बच्चों में एक यूनिट और वयस्क में दो यूनिट खून की जरूरत होती है। वहीं, गर्भवती महिलाओं को आपात स्थिति में खून की कमी को पूरा करना पड़ता है। ऐसी स्थितियों से बचने के लिए खून तत्काल च़़ढ़ाना पड़ता है।

एनजीओ और समितियों से रक्तदान की अपील, एबी और ए ग्रुप का खून रेयर: उन्होंने बताया कि खून की कमी न पड़े इसके लिए अभी तक रक्तदान अभियान से जुड़े एनजीओ और समितियों को रक्तदान करने के लिए कहा जा रहा है। इच्छुक व्यक्ति रक्तदान और प्लाज्मा दान कर कई मरीजों को नया जीवन देने में अपना योगदान दे सकते हैं। इसके साथ ही सबसे ज्यादा दिक्कत एबी और ए ग्रुप के खून को लेकर हो सकती है। यह ब्लड ग्रुप कम लोगों का होता है। इसलिए इसका ब्लड मिलना मुश्किल होता है।

युवा टोली ने उर्सला में जाकर किया रक्तदान: बुधवार को उर्सला के ब्लड बैंक में जाकर युवाओं की एक टोली ने खून की कमी न हो इस पहल में अपना योगदान दिया। विकास नगर निवासी प्रखर अग्रवाल के साथ उनके दोस्त गौरव, ऋतिक, तेजस और पार्थ ने भी रक्तदान किया। प्रखर ने बताया कि वैक्सीन लगने के बाद रक्तदान नहीं कर सकते हैं। इसलिए दोस्तों संग रक्तदान कर दूसरों को इसमें उत्साह दिखाने का आग्रह किया है।

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