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जनाब-ये लौकी नहीं बैंगन है, इसमें बादी का दोष बहुत कम, जल्द लोग ले सकेंगे स्वाद Kanpur News

कानपुर, जेएनएन। क्या आपने सुना है कि बैंगन में लौकी के गुण भी हो सकते हैं? आप कहेंगे बिल्कुल नहीं, एक बादी है और दूसरा स्वास्थ्यवद्र्धक लेकिन चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साग भाजी विभाग में स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजीटेबल में बैंगन की ऐसी प्रजाति विकसित की है, जो लौकी की तरह है। यह ऐसा बैंगन है जिसके गुण और फल में बिल्कुल लौकी की तरह ही हैं, उतना ही बड़ा और मोटा। 35 से 40 सेमी का यह बैंगन पूरे परिवार के खाने के लिए पर्याप्त होगा और इसमें बादी होने का दोष भी सत्तर फीसद तक कम है।

कृषि विवि में विकसित की 'हरित बुंदेला' प्रजाति

कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर व सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजीटेबल डॉ. एसपी सचान ने बुंदेलखंड के हरे गोल बैंगन व पूसा पर्पिल लांग प्रजाति से क्रास करके 'हरित बुंदेला' प्रजाति विकसित की है। इस प्रजाति के अभिजनक डॉ. सचान ने बताया कि इस बैंगन का पौधा आठ फिट ऊंचा होता है जबकि सामान्य बैंगन के पौधे अधिकतम तीन फिट ऊंचाई तक पहुंच पाते हैं।

बैंगनी रंग न होने के कारण यह बैंगन सत्तर फीसद तक कम बादी होगा। इसकी खेती किसान साल भर तक कर सकते हैं और 54 दिन में फल तोडऩे लायक हो जाते हैं। मौजूदा प्रजाति के बैंगन की खेती साल भर नहीं होती है। उन्होंने बताया कि इस प्रजाति में बीमारी व कीट लगने की आशंका भी नहीं है। यह किसानों की आय बढ़ाने में बेहद मददगार होगा। अब इसके जनकीय बीज तैयार किए जा रहे हैं जो किसानों को दिए जाएंगे।

दो साल में आम आदमी ले सकेंगे इस बैंगन का स्वाद

डॉ. एसपी सचान ने बताया कि इस बैंगन के बीज सीड चेन में पहुंचाए जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। दो साल में बुंदेला बैंगन आम आदमी तक पहुंचने की संभावना है। इसका स्वाद आम बैंगन की अपेक्षा अलग होता है। इस स्वादिष्ट बैंगन के फल के 1/3 ऊपरी भाग में बीज नहीं होते हैं। इसकी खासियत यह भी है कि गृह वाटिका में मात्र जैविक खाद देकर इसे लगाया जा सकता है।

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