Mukhtar Ansari News: बांदा जेल में कभी थी माफिया की मुख्तार गिरी, बंदी भी करते थे सेवा

बांदा जेल में माफिया पर सख्त पहरा है।

माफिया मुख्यतार अंसारी इससे पहले 30 मार्च 2017 से जनवरी 2019 तक तक बांदा जेल में निरुद्ध रहा था तब असरदार होने के चलते बैरक में सभी सुविधाएं मिलती थीं। अब उसे सामान्य बंदी की तरह ही रखा जा रहा है।

Abhishek AgnihotriMon, 12 Apr 2021 10:52 AM (IST)

बांदा, [सुजीत दीक्षित]। माफिया मुख्तार अंसारी की असरदारी पहले बांदा जेल में दिखाई पड़ चुकी है। पूर्व में बांदा जेल में निरुद्ध रहने के दौरान उसे बैरक में सभी सुविधाएं मिलती थीं। जिसकी शिकायत भी उच्च स्तर पर हुई थी। जांच के घेरे में डिप्टी जेलर व बंदी रक्षक आए थे। इस बार जेल में माफिया के जलवा जलाल पर ग्रहण लग गया है। फिलहाल शिकंजा इतना कड़ा है कि उसे अपने आसपास केवल निगरानी ही नजर आ रही है, बाकी आने वाला समय बताएगा।

पंजाब के रूपनगर जेल से बांदा स्थानांतरित हुए माफिया मुख्तार पूर्व में भी यहां निरुद्ध रह चुका है। माफिया मुख्तार अंसारी ने तब 30 मार्च वर्ष 2017 से 21 जनवरी वर्ष 2019 तक बांदा जेल में समय काटा था। तब भी जेल में उसका पता बैरक नंबर 15 ही रहा है। सूत्रों की मानें तो पिछली बार यहां निरुद्ध रहने पर उसकी मुख्तार गिरी भी दिखी थी। जेल के अंदर से जो बाते सामने आती रहीं, उसमें बैरक में अलग टीवी से लेकर मनोरंजन के अन्य साधन तो उपलब्ध रहे ही हैं, उसके गुर्गे भी सेवा खुशामत के लिए अलग से लगे रहते थे। यहां तक की उसका अलग खाना भी बनता था। बांदा जेल में रहने से उसके गुर्गे भी शहर में ही डेरा डाले रहे।

खांईपार व स्वराज कालोनी में बाकायदा उन्होंने किराए का पूरा मकान ले रखा था। लग्जरी गाडिय़ां व असलहे तक उनके पास रहते थे। जो समय-समय पर जेल में उसकी व्यवस्था पैसों के बल पर कराते थे। धन अधिक खर्च करने से जेल के एक डिप्टी जेलर व कुछ बंदी रक्षकों का खाने के सामान से लेकर अन्य व्यवस्था उपलब्ध कराने तक में विशेष योगदान रहता था। मामला चर्चाओं में आने से इसकी सूचना उच्च अधिकारियों तक पहुंची थी। जिसमें डिप्टी जेलर व बंदी रक्षक भी गोपनीय जांच के घेरे में आए थे। लेकिन कोई ठोस सबूत न होने से बाद में वह कार्रवाई होने से बच गए थे।

इस बार अभी माफिया को जेल में आए चंद दिन हुए हैं। जेल में पीएसी से लेकर कैमरों से पल-पल की निगरानी की जा रही है। इससे फिलहाल व्यवस्था अभी कड़ी बनी है। इस संबंध में प्रभारी जेलर पीके त्रिपाठी का कहना है कि उनकी जेल में किसी को अलग से कोई व्यवस्था किए जाने की इजाजत नहीं है। कैमरे लगे होने से सबकुछ पारदर्शी रहता है। जिसे उच्च अधिकारी खुद देखकर संज्ञान लेते हैं।

बवाल की आशंका से भी डरता था जेल प्रशासन : सूत्रों की मानें तो पिछली बार जब माफिया बांदा जेल में था तो उसके असर को लेकर जेल प्रशासन के भी कान खड़े रहते थे। बाहुबली होने के चलते जेल के अधिकारी व कर्मचारियों में उसका अंदर से भय भी रहता था। उन्हें आशंका रहती थी कि यदि माफिया के मन की नहीं हुई तो वह जेल में अपने लोगों के सहयोग से बवाल भी उत्पन्न कर सकता है। इससे भी उसकी हर इच्छा को पूरा किया जाता था। हालांकि अब पहले जैसा समय नहीं रह गया है। अधिकारियों के निर्देश पर कड़ाई फिलहाल ज्यादा दिखाई पड़ रही है। आगे समय के साथ स्थिति क्या रहती है यह अलग बात है।

जेल में अन्य बंदी भी करते थे सेवा : बाहुबली विधायक का पिछली बार जेल में इतना ज्यादा वर्चस्व था कि अन्य बंदी तक सजदा करते थे। नहाने से लेकर शौच के लिए जाने पर भी उसके मददगार पीछे रहते थे। हाथ-पैर दबाने वाले भी अपनी ड्यूटी बजाते थे। जिसका विरोध जल्दी कोई करने की हिम्मत नहीं कर पाता था।

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