राज्यसभा में उठा कानपुर के राजा ययाति के किले का मसला, जितना बाहर उतना टीले के नीचे है किला

समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सदस्य चौधरी सुखराम ने संसद के शून्यकाल में कानपुर के राजा ययाति किले की भूमि पर कब्जे का मामला उठाया है। उन्होंने पौराणिक और एतिहासिक किले के संरक्षण और संवर्द्धन की मांग भी उठाई है।

Abhishek AgnihotriWed, 01 Dec 2021 01:45 PM (IST)
कानपुर के राजा यायाति किले पर भूमाफिया का कब्जा।

कानपुर, जागरण संवाददाता। जाजमऊ गंगा तट पर बसे पौराणिक राजा ययाति के किले पर कब्जे का मामला राज्यसभा में उठा है। इस प्रकरण को सपा के राज्यसभा सदस्य चौधरी सुखराम सिंह ने शून्यकाल के दौरान उठाया और सरकार से इसके संरक्षण व संवद्र्धन की मांग की है। पौराणिकता और एतिहासिकता समेटे यह किला जाजमऊ टीले के जितना बाहर है, उतना ही धरती के अंदर भी दबा हुआ है। मामला तूल पकड़ने के बाद अब इस किले की भूमि की खसरा-खतौनी में बदलाव किया जा रहा है।

राजा ययाति के किले पर भूमाफिया के कब्जे को लेकर दैनिक जागरण ने सितंबर माह में मुहिम शुरू की थी। पुलिस आयुक्त असीम अरुण ने राज्य पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से बात करके पौराणिक किले को भूमाफिया से कब्जा मुक्त कराने को कहा था। उन्होंने विभाग से पूछा कि वह बताएं कि उनकी कितने भूभाग पर कब्जा है। ऐसे भूभाग को चिह्नित करें, जिसके बाद इसे हटाया जा सके। इस वार्ता के बाद लखनऊ में बैठे राज्य पुरातत्व विभाग के अफसर भी जागे थे, लेकिन जैसे ही इस मुद्दे को लेकर चर्चा बंद हुई, विभाग ने अपनी कार्यवाही रोक दी।

अब इस मुद्दे को सपा के राज्यसभा सदस्य चौधरी सुखराम सिंह ने राज्यसभा में उठाया है। उन्होंने कहा कि राजा ययाति का किला कानपुर के पौराणिक इतिहास को साबित करने वाला दस्तावेज है। इसीलिए उन्होंने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान मुद्दा उठाया और सरकार से इसके संरक्षण व संवद्र्धन की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि किले में भूमाफिया का कब्जा है। भूमाफिया संरक्षित जमीन पर प्लाङ्क्षटग कर रहा है। राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से खसरा खतौनी तक बदली जा रही हैं। यहां पर बस्ती बसा दी है। इससे किला अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। यह आगे आने वाली पीढ़ी के लिए धरोहर है, जिसे संरक्षित किया जाना जरूरी है।

जाजमऊ टीले की खास बातें

-गंगा के किनारे जाजमऊ टीला के नाम से जाने वाला किला में कभी राजा ययाति का राजमहल हुआ करता था। यहीं से वह अखंड भारत पर राज करते थे।

-टीला जितना ऊंचा दिखाई देता है, उससे भी नीचे जमीन के अंदर तक धंसा हुआ है।

-टीला रूपी किला 28 फरवरी 1968 से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षण में है।

-पुरातत्व विभाग द्वारा की गई खोदाई में यहां से 2800 साल पुरानी संस्कृति के मिट्टी के बर्तन, मिट्टी के आभूषण, मिट्टी की मुहरें मिलीं। उत्खनन में चांदी के कई सिक्के भी मिले थे।

-16 बीघा क्षेत्रफल वाले इस किले के पांच बीघे क्षेत्रफल में भूमाफिया पप्पू स्मार्ट व उसके परिवारीजनों का कब्जा है। उन्होंने एक ऊंची दीवार खड़ी करके एक बड़ा गेट लगाकर इस कब्जे को सुरक्षित किया है।

-इस मामले में तत्कालीन अपर नगर मजिस्ट्रेट पीसी लाल श्रीवास्तव ने 7 मई 2018 को एक रिपोर्ट डीएम कानपुर को सौंपी थी। इस जांच में उन्होंने लिखा है कि इस किले से संबंधित दस्तावेजों में छेड़छाड़ की कोशिश की गई है।

-वर्ष 2017 में सबसे पहले अधिवक्ता संदीप शुक्ला ने किले पर भूमाफिया के कब्जे का मामला उठाया था और रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट दर्ज हुई, चार्जशीट हुई, आरोपितों के घरों की कुर्की हुई, लेकिन अवैध कब्जे ज्यों के त्यों बने रहे।

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