एलिम्को के उपकेंद्रों का कराएं आधुनिकीकरण, कानपुर में बोले केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री

ए नारायणस्वामी सबसे पहले प्रशासनिक भवन पहुंचे। सीएमडी डीआर सरीन ने उन्हें संस्थान की रिपोर्ट उपलब्धि और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। यहां से वह रिसर्च एंड डेवलपमेंट के नए भवन में गए। वहां किन तकनीकों पर कार्य हो रहा है उसके बारे में पूछताछ की।

Shaswat GuptaTue, 21 Sep 2021 05:23 PM (IST)
कानपुर में ए नारायणस्वामी सबसे पहले प्रशासनिक भवन पहुंचे।

कानपुर, जेएनएन। भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को) के जबलपुर, भुवनेश्वर, मोहाली, बेंगलुरु समेत अन्य उपकेंद्रों का भी आधुनिकीकरण कराया जाए, जिससे कम समय में उपकरणाें व कृत्रिम अंगों का अधिक से अधिक उत्पादन हो सकेगा। यह निर्देश केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री ए नारायणस्वामी ने दिए। वह मंगलवार को एलिम्को में निरीक्षण के साथ ही आधुनिकीकरण की योजना की समीक्षा करने आए थे। उन्होंने संस्थान के सभी विभागों के देखा और लाभार्थियों को उपकरण भी वितरित किए। मंत्री ने आधुनिकीकरण के कार्य को 31 मार्च 2022 तक पूरा कराने का निर्देश दिया।

ए नारायणस्वामी सबसे पहले प्रशासनिक भवन पहुंचे। सीएमडी डीआर सरीन ने उन्हें संस्थान की रिपोर्ट, उपलब्धि और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। यहां से वह रिसर्च एंड डेवलपमेंट के नए भवन में गए। वहां किन तकनीकों पर कार्य हो रहा है, उसके बारे में पूछताछ की। भवन में ही हियरिंग ऐड और क्वालिटी एंड कंट्रोल का विभाग भी बना हुआ है। वहां का दौरा किया। हियरिंग ऐड में स्वदेशी तकनीक से तैयार हो रहे श्रवण संबंधित यंत्रों को देखा। राज्यमंत्री ने फिर पुरानी फैक्ट्री, हाई एंड प्रोस्थेसिस शाप और सात वर्क स्टेशनों का निरीक्षण किया। व्हीलचेयर, मोटराइडज्ड ट्राईसाइकिल, कृत्रिम अंग, छड़ी, बैठने वाली तीन पैर की छड़ी आदि के निर्माण, उनकी असेंब्लिंग आदि यूनिटों में गए। महाप्रबंधक मार्केटिंग ले. कर्नल पीके दुबे, महाप्रबंधक परियोजना एवं वाणिज्यिक प्रवीण कुमार, महाप्रबंधक प्रशासनिक एवं वित्त अतुल रस्तगी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

ढाई गुना बढ़ा उत्पादन, दो शिफ्टों में हो सकता कार्य: सीएमडी डीआर सरीन ने बताया कि राज्यमंत्री संस्थान की व्यवस्था देखकर काफी खुश हुए। उन्होंने उपकेंद्रों के आधुनिकीकरण के लिए प्रस्ताव भेजने के लिए कहा है। एलिम्को के आधुनिकीकरण से ढाई गुणा उत्पादन बढ़ गया है। इससे दो शिफ्टों में कार्य कराया जा सकता है। मौजूदा समय में केवल एक ही शिफ्ट चल रही है। उपकरणों में इस्तेमाल हो रही तकनीक पूरी तरह से स्वदेशी है।

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