शस्त्र लाइसेंस लेने के लिए अब मानसिक जांच जरूरी, देना होगा प्रमाणपत्र

कानपुर (जागरण स्पेशल)। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद शस्त्र लाइसेंस की नियमावली में बदलाव कर दिया गया है। अब लाइसेंस लेने के लिए मानसिक रूप से स्वस्थ होना भी जरूरी है। इसके लिए आवेदकों को मनोचिकित्सक से जारी प्रमाण पत्र देना होगा।
लाइसेंसी शस्त्र से खुदकशी और मामूली विवाद में हत्या के कई मामले सामने आ चुके हैं। इस पर हाईकोर्ट ने नियमों में बदलाव के आदेश दिए थे। शासन ने अब आयुध नियमावली में बदलाव कर मानसिक परीक्षण जांच को भी अनिवार्य कर दिया है। इसके बाद अब शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के साथ मानसिक रूप से स्वस्थ होने का प्रमाण पत्र भी देना होगा। एडीएम सिटी विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि नियमावली बदल गई है। अब मानसिक जांच कराना जरूरी होगा। सीएमओ से प्राप्त फिटनेस प्रमाणपत्र भी आवेदन के साथ देना होगा।
तीन स्तर पर होता परीक्षण
-किसी व्यक्ति के मानसिक रूप से स्वस्थ होने या न होने के लिए 45 मिनट का एक परीक्षण होता है।
-दो से तीन चरण में यह परीक्षण पूरा होता है।
-परीक्षण के लिए कई तरह के सवाल पूछे जाते हैं। इसमें व्यक्ति की सहनशीलता, व्यक्तित्व, गुस्सैल स्वभाव, भावनात्मक पक्ष और कुंठित होने की जांच की जाती है।
जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मनोरोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विपुल सिंह बताते हैं कि कई चक्र की काउंसिलिंग के बाद एक नतीजे पर पहुंचा जाता है।
इन बिंदुओं पर होता परीक्षण
मेजर डिप्रेशन : ऐसे रोगी खुद को मारने से पहले परिवारिक सदस्य या करीबी को मारते हैं और फिर स्वयं जान दे देते हैं।
बॉर्डर लाइन पर्सनालिटी : ऐसा व्यक्ति काफी गुस्सैल और होशियार होता है। योजनाबद्ध वारदात को अंजाम देता है।
एंटी सोशल डिस्ऑर्डर : इसमें रोगी सामाजिक न होकर अकेला रहना पसंद करता है। छोटी-छोटी बातों पर परेशान हो जाता है।
बाई पोलर डिस्ऑर्डर : इसमे रोगी भावनात्मक रूप से बीमार होता है और पल भर में कोई भी फैसला ले लेता है।
किस असलहे के कितने लाइसेंस
27,378 कुल शस्त्र लाइसेंस
16,453 रिवॉल्वर व पिस्टल लाइसेंस
6,976 राइफल लाइसेंस
3,949 सिंगल व डबल बैरल लाइसेंस

 

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