Pitra Paksh Special: गंगा घाट पर पितरों का तर्पण, जानिए- पूजन की खास विधि और श्राद्ध की तिथियां

पूर्वजों के पूजन पर्व पितृपक्ष में 21 सितंबर को प्रतिपदा और छह अक्टूबर को अमावस्या का श्राद्ध होगा। इसके लिए गंगा किनारे प्रमुख घाटों पर तैयारियां शुरू हो गई हैं और साफ सफाई भी कराई जा रही है। सोमवार से श्राद्ध कर्म शुरू हो जाएंगे।

Abhishek AgnihotriSun, 19 Sep 2021 08:54 AM (IST)
पितृपक्ष के लिए गंगा किनारे तैयारियां शुरू हो गईं।

कानपुर, जेएनएन। सोमवार से पूर्वजाें के पूजन के पर्व पितृपक्ष की शुरुआत गंगा के घाटों पर श्राद्ध कर्म से हो गई। पूर्णिमा पर गंगा तट पर सुबह से ही श्राद्ध कर्म करने वाले पहुंचे और कर्मकांड पूरा किया, वहीं 21 सितंबर को प्रतिपदा का श्राद्ध होगा। छह अक्टूबर को अमावस्या के श्राद्ध के साथ पूर्वजों की विदाई होगी। नगर निगम ने श्राद्ध करने आने वालों की सुविधा के लिए प्रमुग गंगा घाटों की सफाई कराई है। सुबह से ही बिठूर समेत सभी प्रमुख घाटों पर श्राद्ध करने वाले पहुंचने लगे, यह सिलसिला 21 सितंबर तक रहेगा, इस बार पितृ पक्ष 16 दिन के लिए हैं।

पितृपक्ष में पूर्वजों का स्मरण किया जाता है, उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध कर्म किया जाता है। तमाम लोग घरों में ही श्राद्ध कर्म करते हैं। हालांकि गंगा, यमुना आदि नदियों के तट पर किए गए श्राद्ध कर्म का खास महत्व है। शंकुतला शक्ति पीठ के संस्थापक आचार्य अमरेश मिश्र ने बताया कि सिद्धि योग में पितृपक्ष की शुरुआत होगी। पितृपक्ष में संतान स्वर्गीय स्वजन के लिए श्राद्ध पूजन करते हैं। पितरों के श्राद्ध पूजन से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। गंगा , यमुना आदि नदियों के तट पर विधिवत पूजन कर श्राद्ध करना श्रेयकर माना गया है। जो लोग गंगा तट पर नहीं जा सकते हैं वे सूर्य देवता का स्मरण करते हुए लोटे में जौ, तिल, अक्षत व सफेद पुष्प लेकर घर पर ही श्राद्ध कर्म करें। आचार्य को भोजन कराने से सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

ऐसे करें पूजन : जल में काला तिल व हाथ में कुश रखकर स्वर्गीय हो चुके स्वजन का स्मरण , पूजन करना चाहिए। जिस दिन निधन की तिथि हो उस दिन अन्न व वस्त्र का दान अवश्य करना चाहिए। पितरों की तिथि पर ब्राह्मण देवता को भोजन करवाएं। कौआ को दाना चुगाएं व कुत्तों को भी भोजन दें।

श्राद्ध की तिथियां : 20 सितंबर को पूर्णिमा का श्राद्ध। 21 को प्रतिपता का श्राद्ध, 22 को द्वितीया, 23 को तृतीया, 24 को चतुर्थी, 25 को पंचमी, 27 को षष्ठी, 28 को सप्तमी, 29 को अष्टमी व 30 को नवमी का श्राद्ध पूजन होगा। एक अक्टूबर को दशमी, दो को एकादशी, तीन को द्वादशी, चार को त्रयोदशी, पांच को चतुर्दशी तथा छह अक्टूबर को अमावस्या का श्राद्ध किया जाएगा।

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