जानें-कानपुर की पुलिस के पास हैं कितने स्मार्ट एप, कैसे आसान हुई डिजिटल पुलिसिंग की राह

कानपुर की स्मार्ट पुलिस के साथ अब तकनीक।

कानपुर पुलिस को विभिन्न मोबाइल एप के जरिये अपराधियों पर नजर रखना सुविधाजनक हो गया है। सीसीटीएनएस की शुरुआत ने पुलिस की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से बदल दिया है।अब अपराधी पुलिस की नजरों से बच नहीं सकता।

Publish Date:Sat, 16 Jan 2021 12:45 PM (IST) Author: Abhishek Agnihotri

कानपुर, जेएनएन। सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम) की शुरुआत के बाद डिजिटल पुलिसिंग ने रफ्तार पकड़ी है। किसी व्यक्ति के चरित्र सत्यापन, शस्त्र लाइसेंस सत्यापन, पासपोर्ट सत्यापन समेत तमाम काम अब एक टच के माध्यम से हो रहे हैं। यही नहीं, त्रिनेत्र जैसे एप ने अपराधियों की भी कुंडली सामने रख दी है। अब अपराधी चाहे जहां रहे, पुलिस की नजरों से बच नहीं सकता। कुछ समय पूर्व सट्टा माफिया राजा यादव के पकड़े जाने पर उसके अपराधों का ब्योरा इसी एप पर लोड किया गया था।

सी प्लान एप : इस एप से पुलिस का मुखबिर तंत्र बढ़ता जा रहा है। सांप्रदायिक तनाव व दूरदराज के गांवों में होने वाले विवादों के बारे में सूचना मिलने के साथ ही इस एप पर जुड़े संभ्रांत 10 सदस्य पुलिस को अराजक तत्वों की सूचना दे रहे हैं। जल्द ही इस एप को यूपी 112 के साथ भी जोडऩे की तैयारी है।

त्रिनेत्र एप : इस एप पर पुलिस अपराधियों की फोटो व उनके मुकदमों का पूरा ब्योरा अपलोड करती है। यह एप भी सीसीटीएनएस से जुड़ा है। यानी कि फोटो व ब्योरा अपलोड होते ही देश के किसी भी हिस्से में बैठे पुलिस अधिकारी एप के जरिए अपराधियों की कुंडली निकाल सकते हैं।

बीट पुलिसिंग एप (प्रहरी) : प्रहरी एप सभी सिपाहियों के स्मार्ट फोन में डाउनलोड कराया गया है। इस एप की मदद से सिपाही भी तमाम दस्तावेजों का सत्यापन कर रहे हैं और अपराधियों की निगरानी करके उसकी सूचना अपलोड कर रहे हैं। अब चरित्र सत्यापन, पासपोर्ट सत्यापन भी इसी एप की मदद से होता है।

यूपी कॉप : आम जनता के लिए यूपी कॉप एप बेहद अहम हो गया है। इसकी मदद से लोग अपना कीमती सामान खोने की रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि चोरी, छिनैती, साइबर फ्रॉड आदि घटनाओं की एफआइआर भी दर्ज कराने लगे हैं। इसके अलावा एफआइआर देखने, किरायेदारों का सत्यापन आदि में भी यह एप उपयोगी है।

ई-चालान एप : ट्रैफिक पुलिस अब यातायात नियम तोडऩे वालों का चालान इसी एप की मदद से कर रही है। वाहन की फोटो व उसका रजिस्ट्रेशन नंबर डालते ही एप पर वाहन का पूरा ब्योरा सामने आ जाता है। इसके बाद पुलिसकर्मी जिन नियमों को तोड़ा गया है, उन पर क्लिक करके चालान सबमिट कर देते हैं।

यूपी पुलिस ट्रैफिक एप : यूपी पुलिस का ट्रैफिक एप जनता की यातायात संबंधी समस्याओं के निराकरण के लिए है। इसके जरिए लोग यातायात व्यवस्था से जुड़ी जानकारी हासिल कर रहे हैं। हालांकि अभी इस एप पर सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं हो रही है, लेकिन दारोगा व सिपाहियों को प्रशिक्षित कराया जा रहा है।

-स्मार्ट फोन आने से कई काम आसान हो गए हैं। काम की समयसीमा भी तय हुई है। इससे मॉनीटरिंग के साथ जवाबदेही भी बढ़ी है। लोगों को भी अब थाने या चौकी जाने की जरूरत नहीं रही। - डॉ. अनिल कुमार, एसपी पश्चिम।

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