कनपुरिये हैं हम.. मजाक अपनी जगह.., सबसे प्यारा कानपुर हमारा और गर्व है शिक्षा, उद्योग और क्रांति गाथा पर

कानपुर के ग्रीनपार्क स्टेडियम में गुटखा खाते युवक की फोटो वायरल होने के बाद इंटरनेट मीडिया पर कानपुर का नाम बदनाम किया जा रहा है। इसे कई लोगों ने गलत बताया और कहा कि मजाक अपनी जगह और शहर की प्रतिष्ठा अपनी जगह।

Abhishek AgnihotriSat, 27 Nov 2021 09:58 AM (IST)
कानपुर शहर गुटखा नहीं क्रांति, शिक्षा और उद्योग की धरा है।

कानपुर, [दिवाकर मिश्र]। कानपुर नाम है इस शहर का...। माना कि यहां गुटखा बनता है, बिकता है, लोग खाते भी हैं। इसका मतलब यह तो नहीं कि इसे शहर की संस्कृति या पहचान से जोड़ दिया जाए। स्वर्णिम इतिहास है कानपुर का। हमारी पहचान बड़े-बड़े उद्योगों से है, गंगा के घाटों से है। अब तो मेट्रो भी है यहां। बिठूर का पौराणिक और क्रांतिकारी इतिहास है। आइआइटी और चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय (सीएसए) जैसे संस्थानों का विदेश तक में डंका बजता है। गुटखा खाना गलत है, अपराध नहीं। इसे लेकर कोई स्टेडियम में पहुंच जाए तो यह व्यवस्था का दोष है शहर का नहीं।

इंटरनेट मीडिया का युग है। लोग मौज लेने उतरते हैं तो कुछ भी वायरल करते हैं। ग्रीन पार्क में गुरुवार से भारत-न्यूजीलैंड के बीच टेस्ट मैच शुरू हुआ। इस बीच ट्विटर पर एक फोटो सामने आया जिसमें एक युवक गुटखा खाए था और फोन पर किसी से बात कर रहा था। देखते ही देखते यह फोटो फेसबुक, वाट्सएप और ट्विटर पर धड़ाधड़ शेयर होने लगी। लोग मजा लेने लगे। किसी ने लिखा कानपुर गुटखा की नगरी है तो कोई कहने लगा कानपुर की पहचान है गुटखा। इस बीच कुछ लोग सामने आए और उन्होंने इसका विरोध भी किया। लोगों का कहना है कि मजाक अपनी जगह है, पर इसे शहर की प्रतिष्ठा और संस्कृति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

इतिहासकार अनूप शुक्ला कहते हैं कि एक चलन सा हो गया है हर बात को कानपुर से जोडऩे का। हमारी पहचान तो हमारी भाषा से, हमारी संस्कृति से, नाना साहब पेशवा और तात्या टोपे जैसे क्रांतिकारियों से है। गुटखा खाना गलत है और इसे कानपुर की पहचान से जोडऩा भी।

राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द : कानपुर देहात के परौंख में जन्मे और कानपुर में पढ़े-लिखे राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द जब भी कानपुर आते हैं तो वह यह बताना नहीं भूलते कि यहां उनके सब अपने हैं। कानपुर का नाम उनकी जुबान पर हमेशा रहता है।

आइआइटी : इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी (आइआइटी) कानपुर का नाम रोशन कर रहा है। यहां हो रहे अनुसंधान देश के काम आ रहे हैं। कई दिग्गज यहां से पढ़कर निकले और विदेश में भारत का डंका बजा रहे। वर्तमान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी यहां के छात्र रहे हैं। यहां के प्रोफेसर रहे एचसी वर्मा को पिछले दिनों ही पद्मश्री मिला है।

जीएसवीएम मेडिकल कालेज : गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कालेज नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। हाल ही में यहां प्रदेश का पहला बोन मैरो ट्रांसप्लांसट हुआ है। यहां के डाक्टरों ने देसी बैलूनिंग डिवाइस ईजाद की है। जो प्रसूताओं की जान बचाने में काम आ रही है। पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन भी यहां के छात्र रह चुके हैं।

हृदय रोग संस्थान : राजधानी लखनऊ की बात छोड़ दें तो प्रदेश में हृदय रोगों के इलाज का बड़ा केंद्र कानपुर में ही है। यहां का लक्ष्मीपत सिंहानिया हृदय रोग संस्थान अपनी सुविधाओं और कामयाब इलाज के चलते सेंटर आफ एक्सीलेंस का खिताब पा चुका है।

सीएसए कृषि विश्वविद्यालय : चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) नित नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। किसानों के लिए नए-नए बीज तैयार हो रहे हैं तो उपकरण भी ईजाद कि जा रहे हैं।

कानपुर मेट्रो : एनसीआर को छोड़ दें तो प्रदेश में लखनऊ के बाद कानपुर ही ऐसा शहर है जहां मेट्रो दौडऩे जा रही है। यहां का काम रिकार्ड समय में पूरा हुआ।

स्वर्णिम रहा है इतिहास

-पद्मश्री श्यामलाल गुप्त पार्षद ने झंडा गीत विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा लिखा था और कानपुर को पहचान दी।

-पीपीएन कालेज में पढ़े बटुकेश्वर दत्त ने भगत सिंह के साथ मिलकर अंग्रेजों को खूब छकाया। वह कानपुर में भले पैदा नहीं हुए लेकिन उनसे शहर को पहचान मिली।

-नाना साहब पेशवा और तात्या टोपे ने बिठूर को अपनी कर्मस्थली बनाया और अंगे्रजों को नाकों चने चबवा दिए। नाना साहब के लड़ाकों ने 1857 की क्रांति में अहम भूमिका निभाई।

-प्रताप अखबार ने अंग्रेजों के खिलाफ जो माहौल बनाया उसका पूरा श्रेय गणेश शंकर विद्यार्थी को जाता है। मार्च 1931 में हुए दंगों में वह लोगों को समझाने उतरे और अपने प्राणों की आहुति दे दी।

-अटल बिहारी वाजपेयी की पढ़ाई डीएवी कालेज से हुई और राजनीति का ककहरा उन्होंने यहीं से सीखा। आगे चलकर वह प्रधानमंत्री बने।

-कानपुर अपने आप में सशक्त है। इसका अपना इतिहास है। किसी फोटो के वायरल होने से शहर की प्रतिष्ठा पर कोई आंच नहीं आने वाली। कानपुर उद्योगों के लिए प्रसिद्ध है, लेदर इंडस्ट्री में एक अलग मुकाम है। यहां अटल जी ने पढ़ाई की तो वर्तमान राष्ट्रपति भी कानपुर के ही हैं। -राजू श्रीवास्तव, हास्य कलाकार

-कानपुर में वीरता, शौर्य और उद्योगों की कहानी लिखी गई। गुटखा खाते युवक की फोटो वायरल करने के लिए उसे पब्लिसिटी पाने जैसी बात समझ आ रही है। गुटखा खाते युवक को कतई कनपुरिया अंदाज से नहीं जोडऩा चाहिए। -अजय मोहन जैन, कवि और लेखक

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