Kanpur Shaernama Column: सियासी दिग्गजों का चाणक्य दारोगा.., नेताजी ने पूछा कितना है दम

कानपुर शहर में चुनाव नजदीक आते ही सियासत तेज हो गई है। सरकारी शिष्टाचार में प्रोटोकाल की खास अहमियत है पर वही अफसरों के लिए जी का जंजाल बना है। भाजपा में टिकट की दावेदारी अब गाली-गलौज तक आ गई है।

Abhishek AgnihotriSun, 19 Sep 2021 09:53 AM (IST)
कानपुर की राजनीतिक गलियारों की हलचल है शहरनामा कालम।

कानपुर, [राजीव द्विवेदी]। कानपुर शहर में राजनीतिक हलचल अब तेज हो चली है और चुनावी सरगर्मी भी अभी से नजर आने लगी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं भी तेज हो गई है, ऐसी चर्चाएं जो सुर्खियां नहीं बन सकी है उन्हें चुटीले अंदाज में लेकर फिर आया है शहरनामा कालम...।

सियासी दिग्गजों का चाणक्य दारोगा

तमाम माननीयों का भविष्य तय करने की हैसियत रखने वालों का सलाहकार एक दारोगा है। हाथी वालों की सरकार में सत्ता शीर्ष तक पहुंच रखने वाला दारोगा वर्तमान में भगवा दल के कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के बड़े नेता का सलाहकार है। संघ के अनुशासन के बाद भी संगठन में किसको समायोजित करना ठीक होगा या फिर कौन किस चुनाव में कहां फिट रहेगा इतना तक वह तय करवाता है। भगवा दल में ही नहीं नीचे परचम वाले कान्यकुब्ज क्षेत्र के नेता के दरबार में भी उसकी खास जगह है। संघ के संस्कारों से चलने वाले दल और शोषितों के पैरोकार दल के नेता भले खुद का आचार व्यवहार पार्टी लाइन पर होने का दावा करें पर हकीकत जुदा है। दोनों संगठनों के नेता दारोगा की सलाह को तरजीह देते हैैं, ये दोनों दलों के कार्यकर्ता तक जानते हैैं तभी 2022 के कई दावेदार उसके जरिए जुगाड़ लगाने के जतन में हैं।

प्रोटोकाल इनकी बला से

सरकारी शिष्टाचार में प्रोटोकाल की खास अहमियत है पर वही शहर के अफसरों के लिए जी का जंजाल बना है। व्यवस्था है कि सरकारी आयोजन, बैठक या फिर वीवीआइपी मूवमेंट पर सभी जनप्रतिनिधियों को सूचना देकर आमंत्रित किया जाता है। अमूमन प्रोटोकाल अफसर द्वारा जारी होने वाले पत्र में सरकार के ओहदेदार फिर शहर के प्रथम नागरिक और उसके सांसद, विधायक के नाम रहते हैैं। सरकार का ओहदा त्यागकर देश की पंचायत पहुंचे माननीय को ये नागवार गुजरता कि भला उनके सामने राजनीति शुरू करने वाले या फिर कनिष्ठ का नाम सूची में उनसे पहले कैसे है। व्यवस्था को भलीभांति समझने के बाद भी माननीय का कोप अफसरों पर बरसता है। तमाम बार जलालत झेलने के बाद अफसरों ने उसका तोड़ निकाल लिया, अब वह माननीय को जाने वाले पत्र में सिर्फ उन्हीं का नाम रखते, सभी के पास अलग-अलग पत्र पहुंचने से अब माननीय को कोई शिकवा नहीं है।

नेताजी ने पूछा कितना है दम

भाजपा में टिकट की दावेदारी अब गाली-गलौज तक आ गई है। दो विधानसभा चुनावों में जिस सीट को भाजपा अब तक न जीत सकी वहां के लिए टिकट की तगड़ी दावेदारी है। पिछले चुनाव में शिकस्त के बाद भी उसे अपनी सीट मानने वाले नेताजी को गवारा नहीं कि कोई दावेदार उनके क्षेत्र में दखल दे। हाल में शहर आए प्रदेश संगठन के बड़े पदाधिकारी द्वारा उनका भ्रम भी तोड़ा गया, साफ कहा गया कि हारने के बाद भी सीट उनका दावा हास्यापद है। बावजूद इसके नेताजी का भ्रम नहीं टूटा। कोई दूसरा दावेदार क्षेत्र में होॄडग, पोस्टर, बैनर लगा दे तो उनको मिर्ची लग जाती। एक ने गुस्ताखी की तो नेताजी ने फोन पर गरियाकर धमकाया कि चुनाव बाद में होगा पहले पैसे और गुंडई का जितना जोर हो लगाकर निपट लो। आडियो वायरल होने पर नेताजी सफाई दे रहे हैं तो चकल्लसबाज उनकी खुशफहमी की मौज ले रहे।

कहीं बेनकाब न हो जाए बहुमत

पंचायत चुनाव में भगवा दल के प्रत्याशियों की जीत के बाद सरकार और संगठन ने बहुमत का दम जरूर भरा पर अब समितियों के चुनाव में हकीकत सामने आ रही है। सरकारी आशीर्वाद पाकर मुखिया बनीं दीदी ने पूरा जोर लगाया कि जिला योजना समिति के लिए चुनाव की नौबत न आए, उसके लिए विरोधियों को भी संतुष्ट करके सदस्यों को सहमति से निॢवरोध निर्वाचित करा लिया। अब उप समितियों के चुनाव में इस बात का ख्याल रख रही हैं कि कोई नाखुश न रहे। सभी को साधकर रहने की उनकी कोशिशों को देख पार्टी ही नहीं उनसे मुकाबिल हुए प्रतिद्वंदी खूब चटकारे लेते हैं कि बहन जी कम वक्त में सियासत सीख गईं। वहीं उनके ही दल के साथी चर्चा छिडऩे पर ये समझाना नहीं भूलते कि चुनाव होगा तो मत विभाजन नौबत आएगी और तब जिस बहुमत से विजयश्री का दावा किया गया वह बेनकाब न हो जाएगा।

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