डा. प्रसाद के हमलावरों की गिरफ्तारी के बजाय समझौता कराने में जुटी कानपुर पुलिस, पांच की हुई पहचान

कानपुर शहर में डा. एएस प्रसाद के क्लीनिक पर हमले व तोडफ़ोड़ के मामले पुलिस आयुक्त से शिकायत के बाद हमलावरों पर मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट क कार्रवाई की गई। अबतक आठ आरोपितों में पांच की पहचान हो चुकी है।

Abhishek AgnihotriThu, 29 Jul 2021 07:54 AM (IST)
आइएमए पदाधिकारियों ने कठोर कार्रवाई की मांग की है।

कानपुर, जेएनएन। डाक्टरों से मारपीट, हमला और अस्पताल व क्लीनिक पर तोडफ़ोड़ की वारदातें बढ़ती जा रही हैं, लेकिन पुलिस कार्रवाई के बजाय समझौता कराने में जुटी है। इसी वर्ष अस्पतालों में मारपीट, अभद्रता और तोडफ़ोड़ की आधा दर्जन घटनाएं हुईं, लेकिन पुलिस मामूली धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर शांत बैठ गई। पिछले दिनों अस्थि रोग विशेषज्ञ डा. एएस प्रसाद के परेड स्थित क्लीनिक पर हुए हमले में भी यही लापरवाही बरती गई। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के पदाधिकारी जब पुलिस आयुक्त असीम अरुण से मिले, तब मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट के तहत कार्रवाई हुई और दो आरोपितों को जेल भेजा गया। मामले में एक नामजद समेत आठ लोग आरोपित हैं। इनमें से पांच और की पहचान हो चुकी है, लेकिन उनकी गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है।

स्वरूप नगर निवासी डा. प्रसाद के क्लीनिक पर 13 जुलाई को कुछ युवकों की पर्चा बनवाने को लेकर स्टाफ से कहासुनी हुई थी। उसके बाद युवकों ने डाक्टरों पर हमला किया और वार्ड ब्वाय यासिर को बेरहमी से पीटने के बाद क्लीनिक में तोडफ़ोड़ की। डा. प्रसाद ने बताया कि आरोपित फिरोज और कमाल अहमद ने खुद को मीडिया कर्मी बताया और फिर फोन करके 100 से ज्यादा साथी बुला लिए। क्लीनिक में मौजूद डा. नरूला को जान बचाने के लिए डार्करूम में छिपना पड़ा।

पुलिस ने आकर उन्हें निकाला था। उसके बाद जब वह थाने पहुंचे तो वहां भी आरोपितों ने हंगामा किया। पुलिस ने यासिर की तहरीर पर आरोपितों के खिलाफ बलवा, मारपीट, तोडफ़ोड़ की मामूली धाराओं में ही मुकदमा लिखा। साथ ही आरोपित की ओर से भी रिपोर्ट दर्ज कर ली। उप्र चिकित्सा परिचर्या सेवाकर्मी एवं चिकित्सा परिचर्या सेवा संस्था (हिंसा और संपत्ति की क्षति का निवारण) अधिनियम की धारा ही नहीं लगाई। आइएमए पदाधिकारियों ने पुलिस आयुक्त से शिकायत की। तब 10 दिन बाद अधिनियम की धारा लगाकर आरोपित कमाल और उसके साथी नफीस को जेल भेजा गया। बाकी आरोपित अब तक गिरफ्तार नहीं किए गए हैैं।

फरार पांच आरोपितों की हुई पहचान, तलाश जारी

एसीपी कर्नलगंज त्रिपुरारी पांडेय ने बताया कि मुकदमे में एक नामजद समेत आठ लोग आरोपित हैं। इसमें से दो आरोपितों को जेल भेजा जा चुका है। सीसीटीवी कैमरे की फुटेज के आधार पर पांच अन्य आरोपितों की भी पहचान हो चुकी है। उनकी तलाश में टीम लगी है। जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं थाना प्रभारी प्रभुकांत ने कहा कि घटना के बाद तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच करके उप्र चिकित्सा परिचर्या सेवाकर्मी व संस्था अधिनियम की धाराएं बढ़ाई गईं।

क्या कहता है कानून

एसीपी कर्नलगंज ने बताया कि चिकित्सा परिचर्या सेवाकर्मी और चिकित्सा परिचर्या सेवा संस्था (ङ्क्षहसा व संपत्ति की क्षति का निवारण) अधिनियम की धारा तीन के तहत अगर कोई व्यक्ति मेडिकेयर सर्विस पर्सन के खिलाफ ङ्क्षहसा करता है या चिकित्सा सेवा संस्थान की संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है तो वह सात वर्ष तक कारावास या 50 हजार रुपये जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा। धारा चार के अनुसार अपराध संज्ञेय और गैरजमानती है। धारा पांच के अनुसार सजा के अलावा आरोपित से क्षतिग्रस्त चिकित्सा उपकरणों की खरीद मूल्य की राशि व अन्य संपत्ति को हुए नुकसान का दोगुना दंड वसूला जाएगा।

इनका ये है कहना

घटना में पुलिस ने शुरुआत से लापरवाही की। घटनास्थल के पास ही पुलिस चौकी थी, लेकिन कोई बचाने नहीं आया। रिपोर्ट लिखाई लेकिन उसमें मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट की धारा ही नहीं लगाई बल्कि आरोपितों की ओर से भी क्रास एफआइआर दर्ज कर ली। पुलिस आयुक्त से शिकायत के बाद धारा बढ़ी और कार्रवाई की गई। पुलिस को डाक्टरों के खिलाफ हिंसा करने वालों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि समाज में एक संदेश जाए। -डा. एएस प्रसाद, अस्थि रोग विशेषज्ञ

डाक्टर व चिकित्सा संस्थान के खिलाफ हिंसा करने वालों के खिलाफ मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। राज्य व केंद्र सरकारों की ओर से भी इस बाबत निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कोविड महामारी में भी डाक्टरों की सुरक्षा के लिए कड़े दिशा निर्देश आए थे। लेकिन इनका प्रतिपालन नहीं हो रहा है। पुलिस आयुक्त से मांग की गई है कि वह इन अधिनियम व कानूनों के बारे में मातहतों को बताएं और उनका पालन कराएं। -डा. नीलम मिश्रा, आइएमए अध्यक्ष

मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को लेकर सभी थाना प्रभारियों को निर्देश जारी होंगे कि इसके तहत किस तरह की कार्रवाई करनी है। साथ ही जल्द ही प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करके कानून के बारे में पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। उक्त प्रकरण में जो लोग अभी फरार हैं, उन्हें चिह्नित करके गिरफ्तार किया जाएगा। -असीम अरुण, पुलिस आयुक्त

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