Kanpur Naaptol Column: स्टेट्स सिंबल के लिए लगा रहे दौड़, अंगुली टेड़ी करने से बना काम

कानपुर शहर की व्यापारिक राजनीतिक गतिविधियां ।

कानपुर महानगर व्यापारिक केंद्र और यहां व्यापार के साथ व्यापारियों की राजनीतक गतिविधियां भी खासा तेज रहती हैं। पिछले दिनों एक व्यापार मंडल में भी इसी तर्ज पर इस्तीफे की राजनीति का खेल हो गया वहीं एक पोस्ट से व्यापारी नेताओं वाट्सएप ग्रुप के साथ समिति भी छोड़ दी।

Abhishek AgnihotriThu, 06 May 2021 10:54 AM (IST)

कानपुर, राजीव सक्सेना। शहर में व्यापारिक गतिविधियां खासा रहती है, इस समय बाजार बंदी का माहौल है तो व्यापार मंडल की राजनीति बढ़ गई है। ऐसे में कई चर्चाएं तेजी पकड़ती हैं लेकिन सुर्खियां नहीं बन पाती है। ऐसी चर्चाओं को नापतोल कॉलम आप तक पहुंचाता है।

अंगुली टेढ़ी करने से बना काम

बड़े-बुजुर्ग कह गए हैं कि घी सीधी अंगुली से न निकले तो अंगुली टेढ़ी कर लो। पिछले दिनों एक व्यापार मंडल में भी इसी तर्ज पर इस्तीफे की राजनीति का खेल हुआ। संगठन के एक युवा पदाधिकारी की रफ्तार कई पदाधिकारियों को पच नहीं रही। वाट््सएप ग्रुप पर उनका निर्देशात्मक लहजा भी पदाधिकारियों को खटकता है। पहले भी इस पर व्यापार मंडल में विवाद हो चुका है।

अब आपसी टीका टिप्पणियों से आहत संगठन के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने अपना इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सिर्फ पद ही नहीं छोड़ा संगठन को भी छोड़ दिया। कहते हैं न कि एक से भले दो, एक का इस्तीफा हुआ तो एक अन्य पदाधिकारी ने भी अध्यक्ष को अपना इस्तीफा थमा दिया। मामला बढ़ते देख संगठन की बैठक बुलाई गई और दोनों को इस्तीफा अस्वीकार करते हुए ससम्मान वापस बुला लिया गया। युवा पदाधिकारी को भी थोड़ा कंट्रोल करने की नसीहत दी गई है।

समिति संघर्ष की, विचारों पर ताला

नई-नई बनी संघर्ष समिति में शहर के अलग-अलग तमाम संगठनों के व्यापारियों को जोड़ा गया। कुछ नया करने का जोश था तो सभी वाट््सएप ग्रुप में कुछ न कुछ नए विचार रख रहे थे। सेना में रह चुके एक साथी इनदिनों कारोबार कर रहे हैं। उन्होंने जूही पुलिस से जुड़ी एक पोस्ट डाल दी, जिसमें उसने एक अनाथ का अंतिम संस्कार कराया। ग्रुप एडमिन को पसंद नहीं आया तो उसे तुरंत हटा लिया गया। अगले दिन उन्होंने फिर एक पोस्ट डाली तो नाराज ग्रुप एडमिन ने बाकी सभी सदस्यों के विचार रखने के विकल्प को खत्म कर दिया। विचारों पर ताला लगा तो जिन व्यापारी नेता की पोस्ट से यह स्थिति आई उन्होंने ग्रुप के साथ समिति भी छोड़ दी। बाकी बड़े नेताओं ने भी यह कहते हुए समिति को नमस्ते कह दिया कि जब बात रखने की जगह ही नहीं है तो ऐसे ग्रुप में जुडऩे से क्या लाभ।

स्टेट्स सिंबल के लिए ई-पास की दौड़

घर से बाहर निकलने में हर तरफ कोरोना का खतरा है। कारोबारी ज्यादा से ज्यादा समय घर में रहें, इसलिए आधा दर्जन से अधिक बाजार बंद हैं। सरकार ने भी कोरोना कफ्र्यू लगा दिया है। फिलहाल, 10 मई तक बंदी की घोषणा कर दी गई है। किसी जरूरतमंद को पुलिस जाने से नहीं रोक रही है, फिर भी शासन, प्रशासन ने जरूरत होने पर ई-पास की व्यवस्था कर दी है। अब तक घर में चुपचाप बैठे कारोबारी ई-पास का नाम आते ही इन्हें बनवाने के लिए जुगाड़ लगाने लगे हैं। अब सब्जी मंडी, किराना, दूध और मेडिकल की दुकानें छोड़कर सबकुछ बंद है तो उनसे पूछा भी जा रहा कि ई-पास लेकर इसका क्या करेंगे। जवाब मिलता है कि समाजसेवा के कार्य हैं। हालांकि, जिनसे ई-पास बनवाने की गुजारिश की जा रही है, वे जानते हैं कि ई-पास इनके लिए स्टेट््स सिंबल का जरिया है, जिसको लेकर वे परेशान हैं।

प्रशासनिक नहीं, पुलिस अफसर से मिले

कोरोना के इस काल में भी व्यापारी लोगों की सहायता कर रहे हैं, लेकिन खतरे को भांप वे पिछले वर्ष की तरह भीड़ जुटाकर नहीं, वरन फोन पर शांतिपूर्वक किसी के लिए सिलिंडर तो किसी के लिए आक्सीजन किट का इंतजाम करा रहे हैं। इससे प्रेरित होकर पिछले दिनों कुछ व्यापारियों के बीच वर्चुअल बैठक भी हुई। इसमें समाजसेवा करने की बात तय हुई। अस्पताल बनाने का भी निर्णय लिया गया। बैठक में किसी ने कह दिया कि इसके लिए प्रशासन की अनुमति चाहिए।

अब उसके बाद से व्यापारी नेता किसी प्रशासनिक अधिकारी से मुलाकात के लिए परेशान हैं। मुलाकात भी एक-दो लोगों की नहीं, 10-12 की हो। हर तरफ से जुगाड़ लगाकर भी कोई मिलने को तैयार नहीं हुआ तो तय हुआ कि किसी पुलिस अधिकारी से मिलकर अपनी योजना बताई जाए। आखिरकार, एक व्यापारी नेता का लिंक काम कर गया। अब व्यापारी प्रशासनिक नहीं, पुलिस अधिकारी से मिले।

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