संपत्तियों के विवादों में अब स्टांप की भी होगी जांच, पुराने कई मामलों में हो चुकी है धांधली

उनकी लिखावट को उन्होंने भागलपुर में ही साफ करवाया था

पुलिस को आरोपितों के मोबाइल फोन से कानपुर व प्रयागराज कचहरी के कई और लोगों के भी नंबर मिले हैं। उनके बारे में भी जांच कराई जा रही है। थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपितों के पास कुछ स्टांप पेपर वर्ष 1990 के भी मिले हैं।

Publish Date:Fri, 15 Jan 2021 12:16 PM (IST) Author: Akash Dwivedi

कानपुर, जेएनएन। जाली स्टांप व नोटरी टिकट का खेल उजागर होने के बाद पुलिस अब संपत्ति विवादों में स्टांप पेपर की भी जांच शुरू करने की तैयारी कर रही है। खासतौर से वह मामले देखे जाएंगे, जिसमें बिना नंबर वाले स्टांप पेपर इस्तेमाल किए गए हैं। यानी कि वसीयत या रजिस्ट्री वर्षों पहले की बताई गई है। पुलिस के मुताबिक जाली स्टांप पेपर और नोटरी टिकट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल संपत्ति विवाद में फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए किया जाता है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2020 में ही करीब 40 ऐसे मामले आए हैं, जिसमें वसीयत, रजिस्ट्री या इकरारनामे के फर्जी होने का आरोप लगाया गया है। ये मामले ही करोड़ों रुपये की संपत्तियों से संबंधित हैं। पुलिस को आरोपितों के मोबाइल फोन से कानपुर व प्रयागराज कचहरी के कई और लोगों के भी नंबर मिले हैं। उनके बारे में भी जांच कराई जा रही है। थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपितों के पास कुछ स्टांप पेपर वर्ष 1990 के भी मिले हैं। उनकी लिखावट को उन्होंने भागलपुर में ही साफ करवाया था।

आरोपितों ने छह खातों से किया लाखों का लेनदेन

थाना प्रभारी ने बताया कि दोनों आरोपितों के छह बैंक खातों का पता लगा है। पांच सालों में इन खातों से लाखों का लेनदेन हुआ है। जिन खातों में रकम भेजी, उसमें से एक दर्जन खाते पश्चिम बंगाल व बिहार के हैं। जाहिर है कि आरोपित पहले जाली स्टांप व टिकट देने वालों के खातों में पैसा भेजते, बाद में सामग्री उठाते। एक बार में पांच से छह लाख रुपये की सामग्री लेते थे।

पहले स्टांप पेपर पर नहीं लिखे होते थे नंबर

आरोपितों ने पुलिस को यह भी बताया कि वर्ष 1995 से पहले के कई स्टांप पेपरों पर नंबर नहीं लिखे होते थे। इसलिए वह संपत्तियों के पुराने दस्तावेज तैयार कराने वालों को यह स्टांप व टिकट बेचते थे। दोनों की पहली बार मुलाकात कोलकाता में हुई थी, जब वह स्टांप खरीदने पहुंचे थे। दोनों ही करीब 15 वर्ष से इस अवैध काम को अंजाम दे रहे हैं।

नकली नोट भी छाप रहे माफिया

आरोपितों ने बताया कि जाली स्टांप व टिकट 35 फीसद कम कीमत पर खरीदते थे और पांच गुना कीमत पर बेचते थे। दोनों एक साथ कोलकाता, भागलपुर व मालदा जाते थे। स्टांप व टिकट खरीदने के लिए रकम बताए गए खातों में जमा करते थे। यहां और शहरों से भी वेंडर आकर स्टांप ले जाते हैं। आरोपितों के मुताबिक भागलपुर वाले गिरोह के तार मालदा के नकली नोट छापने वाले गिरोह से भी हैं।

30 वर्ष पुरानी वसीयत फर्जी बनाते थे आरोपित

डीआइजी ने बताया कि आरोपित 30 से 35 वर्ष पुराने स्टांप पेपर ब्लीच करके साफ कराते थे और वर्षों पुरानी बताकर फर्जी रजिस्ट्री व वसीयतनामा तैयार कराते थे। प्रॉपर्टी विवाद होने पर यही वसीयतनामा, एग्रीमेंट व रजिस्ट्री आदि पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को प्रस्तुत किए जाते हैं। हालांकि जाली स्टांप पेपर की लिखावट मिटाने के बाद भी आरोपित उसका वाटरमार्क साफ नहीं करा पाते थे।

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