Kanpur Dakhil Daftar Column: कोरोना के बाप हैं हम, हमें संक्रमित नहीं करेगा

कानपुर के सरकारी कार्यालयों की खबर है दाखिल दफ्तर।

कानपुर में सरकारी दफ्तरों में अफसरों के बीच की बातों को चुटीले ढंग से लोगों तक दाखिल दफ्तर कॉलम पहुंचाता है। एक विभाग के साहब की रिपोर्ट बड़े साहब तक पहुंची तो उन्होंने मौखिक रूप से मुकदमा दर्ज कराने को कह दिया है।

Shaswat GuptaTue, 20 Apr 2021 08:14 AM (IST)

कानपुर, [दिग्विजय सिंह]। कानपुर शहर में प्रशासनिक दफ्तरों में रोजाना कई चर्चाएं सामने आती हैं लेकिन सुर्खियां नहीं बन पाती हैं। ऐसी ही पर्दे के पीछे की हकीकत को चुटीले अंदाज में लेकर आता है दाखिल दफ्तर कॉलम..। आइए देखते हैं पिछले सप्ताह दफ्तरों में किन बातों की हलचल बनी रही...।

लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में...

शादी अनुदान में हुए फर्जीवाड़े अपात्रों को पात्र बनाने वाले चार लेखपाल निलंबित कर दिए गए। अभी जांच चल ही रही थी कि एक और फर्जीवाड़ा सामने आया, वह है गलत पते पर जाति और आय प्रमाण पत्र बनाने का। पहले तो राजस्व विभाग के बड़े साहब ने अपात्र होने के बाद भी गलत तरीके से पात्र बने लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया और थाने में तहरीर भी दे दी गई, लेकिन जैसे ही बड़े साहब को पता चला कि आय और जाति प्रमाण पत्र भी फर्जी बने हैं तो वे परेशान हो गए, क्योंकि उन्हें अब राजस्व विभाग के ही कुछ बड़े अफसरों के विरुद्ध भी कार्रवाई करनी पड़ेगी और शासन तक जवाब देना होगा, लेकिन वे कर्मचारी खुश हो गए जिन्होंने इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया था, क्योंकि अब अगर उन पर कार्रवाई होगी तो बड़े भी जद में आएंगे, जो संभव नहीं है।

जांच न कराना काम बहुत है

एक विभाग में आधा दर्जन अधिकारी कर्मचारी तैनात हैं। सभी इस वक्त खांसी, जुकाम और बुखार से पीडि़त हैं। सभी की टेबल पर दवाएं रखीं और वे सुबह-शाम दवा खाकर काम करते हैं। जिसे ज्यादा थकान लगी वह दफ्तर में ही फाइलों के ढेर पर लेट गया। विभाग के बड़े साहब दफ्तर आए थोड़ी देर बैठे तभी एक के बाद एक कर्मचारियों ने खांसना शुरू कर दिया। कुछ को छींक भी आ गई। अब साहब परेशान हो गए, काम तो ज्यादा था, लेकिन किया नहीं धीरे से उठे और दूसरे दफ्तर चले गए। एक महिला कर्मचारी साहब के पास फाइल लेकर पहुंची तो साहब फिर डर गए। बोले वहीं फर्श पर फाइल रख दो सैनिटाइज कराने के बाद हस्ताक्षर करूंगा। महिला ने पूछा साहब ऐसा क्यों तो बोले कोरोना से संक्रमित हो सकती हो। महिला ने कहा जांच कराने जा रहे हैं। साहब बोले जांच न कराना काम बहुत है।

कोरोना के बाप हैं हम

गांवों में विकास कराने वाले एक विभाग के बड़े साहब कोरोना से भी नहीं डरते तभी तो साहब अपने यहां कुछ खास लोगों को बुला लेते हैं और फिर पार्टी करते हैं। साहब के साथ बैठे लोग मास्क लगाते हैं और न ही शारीरिक दूरी का पालन करते हैं। खूब हंसी-ठिठोली होती है। साहब ने पिछले दिनों एक कर्मचारी से चाय लाने के लिए कहा तो वह चाय लाया तो हाथ सैनिटाइज करके उन्हें कप पकड़ाना चाहा। साहब नाराज हो गए और बोले बार-बार सैनिटाइजर क्यों लगाते हो। चपरासी भी गुस्से में आ गया और बोला साहब ये कोरोना है, ये किसी को नहीं पहचानता। ये थोड़े ही देखेगा कि आप क्लास वन के अधिकारी हैं। संभल जाएं नहीं तो ऑक्सीजन भी नहीं मिलेगी। इतना सुनते ही साहब कुछ देर ठिठके फिर जोर से हंसते हुए बोले ई कोरोना के बाप तो हम ही हैं। कोरोना हमें संक्रमित नहीं करेगा।

चिंता में डूबे साहब

सड़क निर्माण करने वाले विभाग के एक साहब आजकल कुछ ठेकेदारों से ही घिरे रहते हैं। साहब पर जनप्रतिनिधियों के खासमखास ठेकेदारों को काम देने का दबाव भी रहता है, लेकिन साहब अपने खास ठेकेदारों को भी काम देने का तरीका निकाल ही लेते हैं। इस राह में उन्हें बड़ी मुश्किल भी आती है, लेकिन करें क्या सबको खुश भी रखना है। इसलिए कई बार जनप्रतिनिधियों की डांट भी खा लेते हैं। पिछले दिनों साहब ने एक काम मंजूर कराया काम बड़ा है इसलिए एक जनप्रतिनिधि ने अपने खास ठेकेदार को काम देने के लिए कह दिया, लेकिन साहब के सबसे खास ठेकेदार ने भी जिद पकड़ ली उसी काम के लिए। अब साहब असमंजस में पड़ गए। अगर खास ठेकेदार को काम देते हैं तो माननीय नाराज होंगे और जनप्रतिनिधि के खास ठेकेदार को देंगे तो अपना वाला। बचत के रास्ते की चिंता साहब को खाए जा रही है।

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