जिंदगियों से खेलने पर महज सौ रुपये जुर्माना, नियमों की धज्जियां उड़ाते वाहन चालक

 कानपुर (जागरण संवाददाता)। सड़क हादसों को रोकने के लिए अभियान से लेकर सख्ती तक भले दावे होते हैं, लेकिन कार्रवाई के हथियार की धार कुंद ही है। सड़कों पर जिंदगियों से खिलवाड़ पर कार्रवाई सौ और चार सौ रुपये जुर्माने से ज्यादा नहीं। शायद यही वजह है कि मोटर वाहन अधिनियम एवं नियमावली की धज्जियां उड़ाकर राष्ट्रीय राजमार्गो और प्रमुख सड़कों पर तमाम बेपरवाह वाहन हादसों का कारण बन रहे हैं। चंद रुपये के जुर्माने से इन पर नकेल नहीं कस पा रही है।
सड़क पर दौड़ते डाले के पीछे बेतरतीब ढंग से सरिया, बांस और अन्य वस्तुएं निकली रहती हैं। इनकी चपेट में आकर पीछे आ रहा वाहन सवार भले ही काल के गाल में समा जाए, इसकी उन्हें जरा भी परवाह नहीं है। कोहरे के समय स्थिति और अधिक खतरनाक हो जाती है। जहां मन किया, वाहन खड़ा कर लिया। जितनी भी गति में चलना है, एक्सीलेटर दबा दिया। इस कानून को तोड़ने का दंड चंद रुपये ही हैं। ट्रक, लोडर, ट्राले अक्सर ढाबों के बाहर गलत ढंग से पार्किंग करते हैं। कोहरे में सही तरह से दिखाई न पड़ने पर हादसे का कारण बनते हैं। संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के अधिकारी इस पर 100 रुपये का ही चालान कर पाते हैं। गलत तरह से सरिया और बांस लादकर ले जाने पर 100 रुपये की ही कार्रवाई होती है।
एआरटीओ प्रवर्तन कानपुर प्रभात पांडेय ने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम एवं नियमावली में जो दंड का प्रावधान है, उसके मुताबिक कार्रवाई की जा रही है। कोहरे में विशेष सर्तकता बरतने की आवश्यकता है। सरिया या अन्य वस्तुओं को लादना गलत है। अगर कोई लेकर चल रहा तो सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। खतरनाक ड्राइविंग पर 400 रुपये चालान हाईवे पर खतरनाक ढंग से वाहन चलाने पर 400 रुपये के चालान का प्रावधान है। परिवहन अधिकारियों के मुताबिक उनके टैब में इतनी ही कार्रवाई का ब्यौरा रहता है। गलत तरह से वाहन चलाने के चालान में उसकी पूरी डिटेल भरी जाती है।
कोहरे में क्या करें, क्या न करें
- ट्रक को सभी जगहों पर पार्क न किया जाए।
- फुटपाथ पर भी वाहन खड़ा करना खतरनाक है।
- डाले से बाहर सरिया या बांस पर रिफ्लेक्टिव टेप लगाया जाए।
- वाहनों के पीछे बैक लाइट, इंडीकेटर, रिफ्लेक्टर जरूरी।
- दृश्यता के मुताबिक वाहनों की स्पीड रहे।
- नशे की हालत में वाहन बिल्कुल भी न चलाएं।
हाईवे पर न लगाएं रेस
कई बार माल उतारने के बाद जल्दबाजी के चक्कर में ट्रक, लोडर, कैंटर और ट्राले के चालक रेस लगाते हैं। कोहरे में पहले निकलने की होड़ हादसे का कारण बनती है।
कानपुर में हुए सबसे अधिक हादसे
वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक सड़क हादसे (38811) हुए थे। इसमें 20142 लोगों की जान गई, 27507 घायल हुए। कानपुर सबसे अधिक हादसे वाला जिला रहा। यहां 1568 दुर्घटनाओं में 682 लोगों की जान गई। 

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