जागरण विमर्श 2021 प्रथम सत्र: प्राचीन धरोहरों को संरक्षित कर पर्यटन को लगेंगे पंख, फतेहपुर में वक्ताओं ने रखी बात

Jagran Vimarsh 2021 स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि गंगा-यमुना कटरी क्षेत्र के विकास को लेकर सरकारों ने बहुत काम किए हैं। सबसे अधिक जहां काम करने की जरूरत थी वहां हम पिछड़ गए। प्राचीन धरोहरों को चिह्नित करके उन्हें संरक्षित करने की दिशा में काम करने की जरूरत है।

Shaswat GuptaFri, 03 Dec 2021 09:19 PM (IST)
Jagran Vimarsh 2021 जागरण विमर्श में अपना पक्ष रखते हुए स्वामी विज्ञानानंद।

फतेहपुर, जागरण संवाददाता। Jagran Vimarsh 2021 ऐतिहासिक, धार्मिक व पौराणिक स्थलों का बचाने और संवारने की जरूरत है। इससे जिले में पर्यटन को पंख लगेंगे, जबकि गौरवशाली अतीत की स्वर्णिम यादों को संजोने में सबकी सहभागिता हो सकेगी। जागरण विमर्श के प्रथम सत्र गंगा-यमुना कटरी का विकास और प्राचीन धरोहरों का संरक्षण में संत, मनीषियों के साथ इतिहासकार व साहित्यकारों ने गंगा-यमुना कटरी के विकास की सोच को सामने रखा। शुक्रवार को आयोजित विमर्श में वक्ताओं ने गंगा-यमुना कटरी के विकास और प्राचीन धरोहरों के संरक्षण पर अपनी राय दी। 

चर्चा की शुरुआत करते हुए स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि गंगा-यमुना कटरी क्षेत्र के विकास को लेकर सरकारों ने बहुत काम किए हैं। सबसे अधिक जहां काम करने की जरूरत थी, वहां हम पिछड़ गए। प्राचीन धरोहरों को चिह्नित करके उन्हें संरक्षित करने की दिशा में काम करने की जरूरत है। इस कार्य में जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ आम जनता को पूरा सहयोग करना होगा। असोथर में यमुना किनारे बने प्राचीन ब्रह्म कुंड का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इस अलौकिक स्थल को संवारने की जरूरत है। लोगों को अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधि पर इसे लेकर दबाव बनाना होगा। कहा कि देश आजादी के आंदोलन से जुड़ी एक धरोहर उनके पास है। गदर पार्टी के अवशेषों को वह निजी स्तर पर संरक्षित करेंगे। साथ ही भृगु धाम में वह भृगु ऋषि की आदमकद प्रतिमा लगवाने की तैयारी कर चुके हैं। डा. ओपी अवस्थी ने कहा कि जागरण के प्रयास से जिले में कई तालाबों व मंदिरों का संरक्षण हुआ है। ऐसी कई प्राचीन धरोहरें हैं, जिनका संरक्षण सभी के प्रयास से हो चुका है। गंगा-यमुना कटरी के विकास में जागरण के साथ ही जिला प्रशासन व आम जनमानस सहयोग करेगा तो उसे भी पूरा किया जा सकता है। भिटौरा, नौबस्ता, शिवराजपुर आदि घाटों को संरक्षित करने की जरूरत है। इन्हें भी लोगों की सहभागिता से संरक्षित किया जा सकता है। औंग के पास एक संत बीते कई वर्षों से तपस्या कर रहे हैं। वह बेहद पढ़े-लिखे हैं, ऐसे लोगों की सहभागिता होनी चाहिए। कहा कि गंगा-यमुना नदियां सिर्फ हमारे जिले की माटी को उर्वरा शक्ति ही नहीं देती हैं, यह पवित्र भी करती हैं। चंददास शोध संस्थान के निदेशक डा. चंद्रकुमार पांडेय ने कहा कि कटरी के विकास में धाराएं बाधक बनी हुई हैं। मौरंग खनन की वजह से बहुत हद तक कटरी की हालत खराब हुई है। बांधों ने नदियों को और नुकसान पहुंचाया है। जमरावां में शिवराज ङ्क्षसह की कोठी व बावनी इमली को संरक्षित किए जाने पर इन्होंने जोर दिया। 

वरिष्ठ साहित्यकार शिवशरण ङ्क्षसह चौहान अंशुमाली ने कहा कि गंगा-यमुना नदी क्षेत्र से 13 किमी की दूरी तक बुंदेलखंड जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए। कटरी हमारा अंतरवेद है। इसका संरक्षण बेहद जरूरी है। गंगा-यमुना कटरी के गांवों में सार्वजनिक स्नानागार, पक्के घाट, कटान रोकने के लिए पत्थर लगाए जाने जैसी योजनाएं शुरू की जानी चाहिए। व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष शिवचंद्र शुक्ल ने स्वामी जी से सवाल किया, जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि कटरी के विकास व प्राचीन धरोहरों के संरक्षण पर उनका प्रयास जारी रहेगा। 

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